Deloitte Global Survey: बंद कमरों में होने वाली मीटिंग और पुराना कॉर्पोरेट कल्चर का दौर अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। दुनियाभर के युवा प्रोफेशनल अब सफलता, लीडरशिप और ऑफिस के माहौल की नई परिभाषा तय कर रहे हैं। डेलॉयट (Deloitte) के हालिया ग्लोबल सर्वे में यह बात सामने आई है कि, जेन जेड (Gen Z) और मिलेनियल्स अब पुरानी कॉर्पोरेट कल्चर को अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। 44 देशों के 22,500 से ज्यादा युवाओं पर किए गए इस सर्वे ने कंपनियों और एचआर (HR) लीडर्स को एक साफ संदेश दिया है कि, भविष्य का वर्कफोर्स बड़ा बदलाव चाहता है।
बिना दबाव के बनना चाहते हैं बॉस
यह एक आम धारणा है कि, आज के युवा कम महत्वाकांक्षी हैं और लीडरशिप की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। लेकिन सर्वे इस बात को गलत साबित करता है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 76 परसेंट जेन जेड और 67 परसेंट मिलेनियल्स अपने करियर में सीनियर या एग्जीक्यूटिव पदों पर पहुंचना चाहते हैं। हालांकि केवल 6 प्रतिशत ही ऐसे हैं जिनका, एकमात्र लक्ष्य सिर्फ कॉर्पोरेट की सीढ़ी चढ़ना है। युवा जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं लेकिन वे नहीं चाहते कि, सफलता की कीमत उन्हें लगातार स्ट्रेस और थकान के रूप में चुकानी पड़े।
मेंटल हेल्थ और वर्क लाइफ बैलेंस है पहली पसंद
सर्वे में शामिल लगभग 50 परसेंट जेन जेड और 49 परसेंट मिलेनियल्स का मानना है कि, बड़े पदों का सीधा मतलब लगातार तनाव और मानसिक थकान (बर्नआउट) है। इसके अलावा आधे लोगों ने ज्यादा जिम्मेदारियों को और 41 से 46 परसेंट युवाओं ने खराब वर्क लाइफ बैलेंस को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। संदेश साफ है कि अब सिर्फ अच्छी सैलरी ही काफी नहीं है। युवा कर्मचारी ऐसा काम चाहते हैं जहां, उन्हें फ्लेक्सिबिलिटी मिले और करियर ग्रोथ के साथ मानसिक स्वास्थ्य से कोई समझौता न करना पड़े।

महंगाई ने किया जीवन को प्रभावित
आर्थिक असुरक्षा का युवाओं के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। लगातार पांचवें साल बढ़ती महंगाई जेन जेड और मिलेनियल्स की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। लगभग आधे युवाओं ने माना कि, वे केवल महीने की सैलरी पर निर्भर हैं और कोई बचत नहीं कर पा रहे हैं। इसी आर्थिक दबाव के कारण 55 प्रतिशत जेन जेड और 52 प्रतिशत मिलेनियल्स शादी, परिवार शुरू करने या अपना बिजनेस शुरू करने जैसे अहम फैसलों को टाल रहे हैं। वहीं 51 प्रतिशत जेन जेड को लगता है कि, अपना घर खरीदना उनके लिए एक सपना ही रह जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नहीं है कोई डर
पुरानी पीढ़ी के विपरीत युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक खतरे के बजाय बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं। सर्वे के अनुसार, लगभग 74 प्रतिशत मिलेनियल्स अपने रोजमर्रा के काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे एआई का इस्तेमाल सिर्फ काम तेजी से खत्म करने के लिए नहीं बल्कि, करियर गाइडेंस, सीखने और यहां तक कि ऑफिस का तनाव कम करने के लिए भी कर रहे हैं। हालांकि 30 प्रतिशत युवाओं को लगता है कि, उनकी कंपनियां अभी भी नई तकनीक को अपनाने और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने में काफी पीछे हैं।

बदलना होगा कॉर्पोरेट कल्चर
डेलॉयट की चीफ पीपल एंड पर्पस ऑफिसर एलिजाबेथ फैबर के मुताबिक, यह सर्वे बताता है कि युवा अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं रहे हैं बल्कि, वे इसे अपनी शर्तों पर निभाना चाहते हैं। कंपनियों को समझना होगा कि, भविष्य का नेतृत्व लंबे समय तक काम करने या दबाव झेलने के बारे में नहीं है। जेन जेड और मिलेनियल्स ऐसे वर्कप्लेस की मांग कर रहे हैं जो, उनके काम को महत्व दे। जो कंपनियां पुरानी लीडरशिप के तरीकों पर चलेंगी वे अच्छी प्रतिभाओं को खो देंगी।


