मुजफ्फरनगर में नशे का कारोबार सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट के रूप में पैर पसार चुका है। इसका बड़ा खुलासा उस समय हुआ, जब SSP संजय कुमार वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर “ऑपरेशन सवेरा” के तहत पकड़े गए तस्करों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया। SSP के मुताबिक, नई मंडी क्षेत्र में पकड़े गए 5 तस्कर किसी छोटे गिरोह का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े इंटर-स्टेट ड्रग सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। यह गिरोह उड़ीसा से सस्ते दामों पर भारी मात्रा में गांजा लाकर मुज़फ़्फ़रनगर और आसपास के जिलों में सप्लाई करता था। खास बात यह है कि तस्करी के लिए गिरोह ने बाकायदा प्लानिंग के तहत दो वाहनों छोटा हाथी और क्रेटा का इस्तेमाल किया, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। लेकिन सिसोना रोड पर चेकिंग के दौरान पुलिस को भनक लग गई और मुठभेड़ के बाद पूरा नेटवर्क उजागर हो गया। मुठभेड़ के दौरान बदमाशों ने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान 2 तस्कर घायल हो गए, जबकि कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 250 किलो गांजा, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है, के अलावा अवैध तमंचे, कारतूस और दोनों वाहन भी बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह का सरगना किफायतुल्ला पहले भी कई बार जेल जा चुका है और लंबे समय से इस अवैध कारोबार को चला रहा था। SSP ने साफ किया है कि अब इस नेटवर्क के “फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक” खंगाले जा रहे हैं, जिससे बड़े स्तर पर जुड़े लोगों तक भी कार्रवाई पहुंचेगी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद साफ संकेत हैं कि मुज़फ़्फ़रनगर को ड्रग्स सप्लाई के हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे तोड़ने के लिए अब पुलिस पूरी ताकत से जुट गई है।


