जहानाबाद में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधायक सतीश दास ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ विवादित टिप्पणी की है। यह घटना काको थाना क्षेत्र के घटकन गांव में बाबा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम के दौरान हुई। उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सभा को संबोधित करते हुए सतीश दास ने कहा, “जो लोग दिमाग को सुन्न कर दें, उसे ब्राह्मण कहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “अंगूठा छाप ब्राह्मण जो कहता है, पूरा समाज सुनता है, लेकिन एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति जो बोलता है, उसे नहीं सुना जाता।” दास ने यह भी दावा किया कि लोग उनकी बात नहीं सुनते, जबकि एक पंडित की बात सभी सुनते हैं। ”जो गुलामी को स्वीकार नहीं करता, वही सबसे बड़ा बुद्धिमान” अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि जो गुलामी को स्वीकार नहीं करता, वही सबसे बड़ा बुद्धिमान है, और बाबा भीमराव अंबेडकर ने गुलामी स्वीकार नहीं की, इसलिए वे सबसे बड़े बुद्धिमान व्यक्ति हैं। पूर्व विधायक ने भगवान बजरंगबली के बारे में भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। टिप्पणी से आम लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा सतीश दास द्वारा एक विशेष जाति के खिलाफ की गई इस तरह की टिप्पणी से आम लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां सभी लोग जाति प्रथा मिटाने की बात कर रहे हैं, वहीं नेताओं द्वारा ऐसी बातें समाज में नफरत फैलाती हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ नेता समाज में नफरत फैलाकर वाहवाही लूटना चाहते हैं। यह पहली बार नहीं है जब सतीश दास ने इस तरह के विवादित बयान दिए हैं। पूर्व में भी उन्होंने भगवान शंकर के बारे में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया था, जिसके कारण उनकी काफी किरकिरी हुई थी। इसी तरह के भाषणों के चलते मखदुमपुर क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव में उनका विरोध किया था, जिसके बाद राजद पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। जहानाबाद में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधायक सतीश दास ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ विवादित टिप्पणी की है। यह घटना काको थाना क्षेत्र के घटकन गांव में बाबा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम के दौरान हुई। उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सभा को संबोधित करते हुए सतीश दास ने कहा, “जो लोग दिमाग को सुन्न कर दें, उसे ब्राह्मण कहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “अंगूठा छाप ब्राह्मण जो कहता है, पूरा समाज सुनता है, लेकिन एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति जो बोलता है, उसे नहीं सुना जाता।” दास ने यह भी दावा किया कि लोग उनकी बात नहीं सुनते, जबकि एक पंडित की बात सभी सुनते हैं। ”जो गुलामी को स्वीकार नहीं करता, वही सबसे बड़ा बुद्धिमान” अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि जो गुलामी को स्वीकार नहीं करता, वही सबसे बड़ा बुद्धिमान है, और बाबा भीमराव अंबेडकर ने गुलामी स्वीकार नहीं की, इसलिए वे सबसे बड़े बुद्धिमान व्यक्ति हैं। पूर्व विधायक ने भगवान बजरंगबली के बारे में भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। टिप्पणी से आम लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा सतीश दास द्वारा एक विशेष जाति के खिलाफ की गई इस तरह की टिप्पणी से आम लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां सभी लोग जाति प्रथा मिटाने की बात कर रहे हैं, वहीं नेताओं द्वारा ऐसी बातें समाज में नफरत फैलाती हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ नेता समाज में नफरत फैलाकर वाहवाही लूटना चाहते हैं। यह पहली बार नहीं है जब सतीश दास ने इस तरह के विवादित बयान दिए हैं। पूर्व में भी उन्होंने भगवान शंकर के बारे में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया था, जिसके कारण उनकी काफी किरकिरी हुई थी। इसी तरह के भाषणों के चलते मखदुमपुर क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव में उनका विरोध किया था, जिसके बाद राजद पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था।


