सीवान शहर के राजेंद्र पथ स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रीजनल ब्रांच में सोमवार सुबह आग लग गई। बैंक परिसर से धुआं निकलता देख आसपास के लोगों ने तुरंत बैंक प्रबंधन को सूचना दी। बैंक मैनेजर के पहुंचने तक आग की लपटें दिखाई देने लगी थीं, जिसके बाद नगर थाना और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही नगर थाना की गश्ती टीम मौके पर पहुंची। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और दमकल विभाग को अलर्ट किया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंचीं, लेकिन तब तक आग बैंक के भीतर तेजी से फैल चुकी थी। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक बैंक का सर्वर रूम पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था। कमरे में लगे फर्नीचर और अन्य उपकरण भी आग की चपेट में आ गए। शॉर्ट सर्किट से आगजनी की आशंका बैंक मैनेजर ने बताया कि स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड को बुलाया गया था। प्रथम दृष्टया आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक परिसर अभी धुएं से भरा हुआ है, इसलिए नुकसान का पूरा आकलन बाद में किया जाएगा। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार ने जानकारी दी कि सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और दमकल विभाग को बुलाकर राहत कार्य शुरू कराया गया। उन्होंने बताया कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। बैंक प्रबंधन की ओर से आवेदन मिलने के बाद आगे की जांच की जाएगी। आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं इस घटना ने शहर की व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजेंद्र पथ इलाके में मॉल, बैंक और बड़ी व्यावसायिक इमारतें हैं, लेकिन अधिकांश भवनों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई इमारतों में केवल औपचारिकता के तौर पर छोटे फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं, जबकि फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार आधुनिक सुरक्षा उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन व्यवस्था अनिवार्य होती है। लोगों कहना है कि जब भवनों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो आखिर फायर विभाग ने इन कमर्शियल बिल्डिंगों को एनओसी कैसे जारी कर दी। घटना के बाद फायर विभाग की कार्यशैली और शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीवान शहर के राजेंद्र पथ स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रीजनल ब्रांच में सोमवार सुबह आग लग गई। बैंक परिसर से धुआं निकलता देख आसपास के लोगों ने तुरंत बैंक प्रबंधन को सूचना दी। बैंक मैनेजर के पहुंचने तक आग की लपटें दिखाई देने लगी थीं, जिसके बाद नगर थाना और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही नगर थाना की गश्ती टीम मौके पर पहुंची। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और दमकल विभाग को अलर्ट किया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंचीं, लेकिन तब तक आग बैंक के भीतर तेजी से फैल चुकी थी। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक बैंक का सर्वर रूम पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था। कमरे में लगे फर्नीचर और अन्य उपकरण भी आग की चपेट में आ गए। शॉर्ट सर्किट से आगजनी की आशंका बैंक मैनेजर ने बताया कि स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड को बुलाया गया था। प्रथम दृष्टया आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक परिसर अभी धुएं से भरा हुआ है, इसलिए नुकसान का पूरा आकलन बाद में किया जाएगा। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार ने जानकारी दी कि सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और दमकल विभाग को बुलाकर राहत कार्य शुरू कराया गया। उन्होंने बताया कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। बैंक प्रबंधन की ओर से आवेदन मिलने के बाद आगे की जांच की जाएगी। आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं इस घटना ने शहर की व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजेंद्र पथ इलाके में मॉल, बैंक और बड़ी व्यावसायिक इमारतें हैं, लेकिन अधिकांश भवनों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई इमारतों में केवल औपचारिकता के तौर पर छोटे फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं, जबकि फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार आधुनिक सुरक्षा उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन व्यवस्था अनिवार्य होती है। लोगों कहना है कि जब भवनों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो आखिर फायर विभाग ने इन कमर्शियल बिल्डिंगों को एनओसी कैसे जारी कर दी। घटना के बाद फायर विभाग की कार्यशैली और शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


