Fixed Deposit : अपनी बचत को बाजार जोखिम से बचाने और उस पर अच्छा रिटर्न पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सबसे भरोसेमंद ऑप्शन है। लेकिन अलग-अलग बैंकों जैसे कि स्मॉल फाइनेंस बैंक, सरकारी बैंक और प्राइवेट बैंक में FD पर मिलने वाली ब्याज दर अलग होती है। इसलिए FD करवाने से पहले सही बैंक चुनना सबसे ज्यादा जरूरी है।
FD क्यों है भरोसेमंद ऑप्शन
FD की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है और साथ में तय ब्याज भी मिलता है। रेगुलर सेविंग अकाउंट के मुकाबले FD पर ब्याज दर हमेशा ज्यादा होती है। इसके अलावा अलग-अलग अवधि के लिए FD करवाने का विकल्प भी मिलता है।
एक साल की अवधि पर कौनसा बैंक दे रहा ज्यादा रिटर्न
नीचे दी गई लिस्ट से पता चलता है कि स्मॉल फाइनेंस बैंकों की ब्याज दरें सरकारी और प्राइवेट बैंकों के मुकाबले ज्यादा है।सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 1 साल की FD पर 7.25 फीसदी ब्याज दे रहा है, जो इस लिस्ट में सबसे ज्यादा है। वहीं, SBI, HDFC बैंक, PNB और केनरा बैंक जैसे बड़े बैंक 6.25 फीसदी ब्याज दे रहे हैं।
| बैंक का नाम | अवधि (Tenure) | ब्याज दर |
|---|---|---|
| सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक | 1 साल | 7.25% |
| इंडसइंड बैंक | 1 साल से अधिक और 1.5 साल से कम | 6.75% |
| यस बैंक | 336 दिन से लेकर 12 महीने से कम तक | 6.66% |
| सिटी यूनियन बैंक | 365 दिन से 443 दिन तक | 6.65% |
| बैंक ऑफ इंडिया | 1 साल | 6.50% |
| SBI | 1 साल से 2 साल से कम | 6.25% |
| HDFC बैंक | 1 साल से 15 महीने से कम | 6.25% |
| पंजाब नेशनल बैंक | 1 साल | 6.25% |
| फेडरल बैंक | 1 साल | 6.25% |
| केनरा बैंक | 1 साल से 1 साल 3 महीने तक | 6.25% |
| उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक | 181 दिन से 370 दिन तक | 6.00% |
FD में निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, FD चुनते वक्त यह भी तय करना चाहिए कि आपको कितने समय के लिए पैसा लगाना है, क्योंकि हर बैंक में अलग-अलग अवधि पर ब्याज दरें अलग होती हैं। इस वक्त सिटी यूनियन बैंक 555 दिनों की FD पर सामान्य नागरिकों को 7.25 फीसदी ब्याज दे रहा है। वहीं, बात करें सीनियर सीटीजन के लिए तो ब्याज दर 7.50 फीसदी मिल रही है। इसके अलावा प्री-मेच्योर विड्रॉल की शर्तें, ऑटो-रिन्यूअल का ऑप्शन और सीनियर सिटीजन के लिए अतिरिक्त ब्याज की सुविधा भी जरूर चेक करें।
FD पर टैक्स के नियम
FD में निवेश किए गए मूलधन पर कोई ब्याज नहीं लगता, केवल उस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। ब्याज से मिलने वाली राशि को आपकी कुल आय में गिना जाता है। इसलिए इस पर आपको टैक्स स्लैब के हिसाब से आयकर चुकाना पड़ता है। वहीं, अगर एक वित्त वर्ष में किसी बैंक से मिलने वाला एफडी ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाती है, तो बैंक 10 फीसदी की दर से TDS (Tax Deducted at Source) भी काट सकता है। हालांकि, यदि आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आप बैंक में फॉर्म 15G या 15H जमा करके TDS कटने से बच सकते हैं।


