गोरियाकोठी में 32 एनीमिक गर्भवतियों को FCM ट्रीटमेंट:मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की महत्वपूर्ण पहल

सीवान के गोरियाकोठी प्रखंड में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से होने वाली जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इन्फ्यूजन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में गंभीर एनीमिया से पीड़ित 32 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम उपचार प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार राज एवं जिला प्रबन्धक पिरामल बलिंद्र सिंह की उपस्थिति एवं निगरानी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उन्हें प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना था, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके। शिविर के दौरान लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की समुचित व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम के सफल संचालन में आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, एएनएम, स्वास्थ्य कर्मियों, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक तथा पिरामल फाउंडेशन की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।सभी के समन्वित प्रयासों से पात्र गर्भवती महिलाओं की पहचान,रेफरल,परामर्श एवं उपचार सुनिश्चित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार राज ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में समय पर उपचार नहीं मिलने से गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को समय पर एफसीएम उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग की जा रही है। पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाकर समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि प्रखंड की कोई भी एनीमिक गर्भवती महिला उपचार से वंचित न रहे। जिला प्रबंधक,पिरामल स्वास्थ्य बलिंद्र सिंह ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य केयर कोऑर्डिनेशन कार्यक्रम के तहत एनीमिया की शीघ्र पहचान, उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की निगरानी तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार एफसीएम उपचार शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा कर हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ाने में सहायक होता है। सीवान के गोरियाकोठी प्रखंड में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से होने वाली जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इन्फ्यूजन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में गंभीर एनीमिया से पीड़ित 32 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम उपचार प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार राज एवं जिला प्रबन्धक पिरामल बलिंद्र सिंह की उपस्थिति एवं निगरानी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उन्हें प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना था, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके। शिविर के दौरान लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की समुचित व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम के सफल संचालन में आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, एएनएम, स्वास्थ्य कर्मियों, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक तथा पिरामल फाउंडेशन की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।सभी के समन्वित प्रयासों से पात्र गर्भवती महिलाओं की पहचान,रेफरल,परामर्श एवं उपचार सुनिश्चित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार राज ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में समय पर उपचार नहीं मिलने से गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को समय पर एफसीएम उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग की जा रही है। पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाकर समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि प्रखंड की कोई भी एनीमिक गर्भवती महिला उपचार से वंचित न रहे। जिला प्रबंधक,पिरामल स्वास्थ्य बलिंद्र सिंह ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य केयर कोऑर्डिनेशन कार्यक्रम के तहत एनीमिया की शीघ्र पहचान, उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की निगरानी तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार एफसीएम उपचार शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा कर हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ाने में सहायक होता है।  

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