रात के करीब 3 बजे होंगे। मैं ICU में एडमिट थी। अचानक वार्ड में धुआं उठने लगा। मेरे आसापस काफी मरीज रोए थे। मैंने तुरंत अपना ऑक्सीजन मास्क हटाया और वार्ड से बाहर आ गई। गार्ड को बताया कि अंदर आग लगी है। गार्ड दौड़ा-दौड़ा अस्पताल के अंदर गया। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने मरीजों को लेकर भागने लगे। इसके बाद पुलिस आई। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आईं। कुछ लोग अपनों को लेकर स्ट्रेचर पर दौड़ते दिखे। कुछ लाशों हाथ में उठाकर बाहर निकलते दिखाई दिए। 93 साल की बुजुर्ग राधा देवी ने सबसे पहले मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हादसे की जानकारी गार्ड को दी। इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। 20 से ज्यादा झुलसे हैं। जानिए मुजफ्फरपुर अस्पताल हादसे की आंखों देखी… अस्पताल से धमाकों की आवाज आ रही थी अस्पताल के पास एक मिठाई दुकान में काम करने वाले 25 साल के धीरज गिरी ने बताया, हम लोग सो रहे थे। रात करीब 3 बज रहे होंगे। इसी दौरान अचानक लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज कानों में पड़ी। शोर सुनकर मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अस्पताल के एक हिस्से से धुआं उठ रहा है। कुछ धमाके की आवाज भी आ रही थी। हम लोग तत्काल अस्पताल की ओर दौड़े। किसी को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दे रहे थे, यहां मदद के लिए जो आ रहा था, उसे भी भगा रहे थे। मैंने देखा कि अस्पताल के दो फ्लोर तक सिर्फ धुआं भरा है, मुझे लगा कि अंदर कोई फंसा हो सकता है, मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और भागकर अस्पताल के अंदर घुस गया। अंदर जाने के बाद मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, सिर्फ धुआं था। सांस रोककर मरीज को बाहर निकाला धीरज ने आगे बताया, मेरे साथ दो और लोग भी अंदर गए थे। एक तो धुआं देखकर ही शुरुआत में भाग गया, जबकि दूसरा धुएं की वजह से दम घुटने से जमीन पर गिर गया। मैं सबसे पहले गिरे हुए साथी को बाहर लेकर भागा। इसके बाद दोबारा अंदर गया, सोचा कि एक खिड़की को खोल देता हूं, लेकिन खिड़की नहीं खुल रही थी, सोचा कि शीशा तोड़ दूं, लेकिन कुछ औजार भी नहीं दिखा जिससे कांच तोड़ सकूं। इसके बाद मैंने मुक्का मारकर कांच तोड़ा ताकि धुआं बाहर निकल सके। मेरे हाथ में चोट आई, मैंने 7 से 8 लोगों को बेड समेत खिंचकर बाहर निकाला। अंदर करीब 15 बेड थे, जिस पर करीब 13 लोग एडमिट थे। मैं सांस नहीं ले पा रहा था। अंदर काला धुआं था, लेकिन किसी तरह सांस रोककर लोगों को बाहर निकाला। अपने हाथों से 3 लाशों को बाहर निकाला मुजफ्फरपुर के ही तुर्की के मरीज संजीव प्रसाद के 30 साल के बेटे केशव ने बताया, मैं सुबह करीब चार बजे अस्पताल के नीचे था। लोगों ने शोर मचाया कि आग लग गई। मेरी भी आंख खुली। देखा कि अधिकतर लोग नीचे की ओर भाग रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाई। मरीजों को बचाने के लिए अस्पताल के ऊपर वाले फ्लोर की ओर बढ़े। मैं भी हिम्मत जुटाकर अस्पताल के अंदर पहुंचा। अंदर काफी ज्यादा काला धुआं भरा था। अंदर मुझसे सांस भी नहीं लिया जा रहा था। मैंने अपने हाथों से दो से तीन लाशें बाहर निकाली हैं। उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। आग लगने के बाद अस्पताल के अधिकतर स्टाफ भाग निकले थे, उन्हें मरीजों की मदद करनी चाहिए थी, मरीजों को अलर्ट करना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने के बजाए वो पहले अपनी जान बचाकर भाग निकले। ये घटना हॉस्पिटल की लापरवाही से हुई है। पहले कुछ शॉर्ट सर्किट हुआ होगा, जिसकी वजह से आग इतनी बड़ी मात्रा में फैली, नहीं तो अचानक आग इतनी तेजी से नहीं फैल सकती है। मेरी आखों के सामने ससुर जलकर मर गए बगाही गांव की रहने वाली संगीता कुमारी के ससुर ICU में एडमिट थे। उन्होंने बताया, ससुर बृजनंदन राय सड़क हादसे में घायल हो गए थे। पिछले 4 दिनों से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के लिए हमने जमीन भी बेच दी थी। गुरुवार सुबह करीब 3 बजे मैं ICU के बाहर बैठी थी। अचानक अंदर से अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन दरवाजे और खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। मैंने जब ICU के अंदर झांका तो ससुर आग की लपटों में घिरे हुए थे। मैं उन्हें बचाने के लिए अंदर दौड़ना चाहती थी, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी। मेरी आंखों के सामने मेरे ससुर जल रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। ये कहते हुए संगीता फफक कर रो पड़ीं। अस्पताल की लापरवाही से भाई मर गया औराई के रतनपुर गांव के रहने वाले शशांक की भी हादसे में मौत हुई है। शशांक कुमार अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। उनके भाई निकेश कुमार ने बताया, अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही के कारण मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। अस्पताल के कर्मियों को मदद करना चाहिए था, लेकिन वे लोग मदद के बजाए भाग गए। मर गए हैं तो लाश दे दीजिए मरीज बृजनंदन राय के परिजन मनोज यादव ने बताया कि रविवार को उनका एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद उन्हें ICU में एडमिट कराया था। अचानक आग लगी तो सब भागने लगे कुछ पता ही नहीं चला। मेरे मरीज का कुछ पता नहीं चल रहा है। वो जिंदा है या मर गए, कोई कुछ नहीं बता रहा है। मैं पुलिस-प्रशासन से गुहार लगाता हूं, उनके साथ क्या हुआ है ये तो बता दीजिए। मर गए हैं तो लाश ही लौटा दीजिए। ———– ये खबरें भी पढ़िए… बिहार के मुजफ्फरपुर में हॉस्पिटल में आग, 5 की मौत:20 से ज्यादा झुलसे; ICU के खिड़की-दरवाजे तोड़कर मरीजों को बाहर निकाला बिहार के मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे हुआ। आग शॉर्ट सर्किट से लगी। इसके बाद ICU में लगे एसी में ब्लास्ट हुआ। इसकी वजह से आग तेजी फैली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड अस्पताल पहुंची और आग पर काबू पाया। लोगों ने मौके से स्टाफ के गायब होने का आरोप लगाया। परिजन अपने मरीजों को स्ट्रैचर से बाहर ले जाते दिखे। ICU वार्ड 5वीं फ्लोर पर है, जिसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कत आई। पूरी खबर पढ़िए मरीजों को लेकर भागे लोग, अस्पताल हादसे की 15 तस्वीरें:ICU पूरा जल गया, फर्श पर लाशें पड़ी रहीं; खिड़कियों को तोड़ने लगे लोग मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद ICU में लगे एसी में ब्लास्ट हुआ। जिसके चलते आग तेजी फैली। चारों ओर धुआं फैल गया। वारदात के समय वार्ड में 15 एडमिट थे। परिजन का आरोप है कि, आग लगने के बाद मौके से स्टाफ और डॉक्टर भाग गए। परिजन खुद मरीज को स्ट्रेचर पर बाहर लेकर निकले ICU वार्ड 5वीं फ्लोर पर है। दमकलकर्मियों ने दूसरे वार्डों में फंसे मरीजों को बाहर निकाला। धुआं फैलने के चलते शीशा को तोड़ दिया गया। पूरी खबर पढ़िए रात के करीब 3 बजे होंगे। मैं ICU में एडमिट थी। अचानक वार्ड में धुआं उठने लगा। मेरे आसापस काफी मरीज रोए थे। मैंने तुरंत अपना ऑक्सीजन मास्क हटाया और वार्ड से बाहर आ गई। गार्ड को बताया कि अंदर आग लगी है। गार्ड दौड़ा-दौड़ा अस्पताल के अंदर गया। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने मरीजों को लेकर भागने लगे। इसके बाद पुलिस आई। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आईं। कुछ लोग अपनों को लेकर स्ट्रेचर पर दौड़ते दिखे। कुछ लाशों हाथ में उठाकर बाहर निकलते दिखाई दिए। 93 साल की बुजुर्ग राधा देवी ने सबसे पहले मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हादसे की जानकारी गार्ड को दी। इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। 20 से ज्यादा झुलसे हैं। जानिए मुजफ्फरपुर अस्पताल हादसे की आंखों देखी… अस्पताल से धमाकों की आवाज आ रही थी अस्पताल के पास एक मिठाई दुकान में काम करने वाले 25 साल के धीरज गिरी ने बताया, हम लोग सो रहे थे। रात करीब 3 बज रहे होंगे। इसी दौरान अचानक लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज कानों में पड़ी। शोर सुनकर मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अस्पताल के एक हिस्से से धुआं उठ रहा है। कुछ धमाके की आवाज भी आ रही थी। हम लोग तत्काल अस्पताल की ओर दौड़े। किसी को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दे रहे थे, यहां मदद के लिए जो आ रहा था, उसे भी भगा रहे थे। मैंने देखा कि अस्पताल के दो फ्लोर तक सिर्फ धुआं भरा है, मुझे लगा कि अंदर कोई फंसा हो सकता है, मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और भागकर अस्पताल के अंदर घुस गया। अंदर जाने के बाद मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, सिर्फ धुआं था। सांस रोककर मरीज को बाहर निकाला धीरज ने आगे बताया, मेरे साथ दो और लोग भी अंदर गए थे। एक तो धुआं देखकर ही शुरुआत में भाग गया, जबकि दूसरा धुएं की वजह से दम घुटने से जमीन पर गिर गया। मैं सबसे पहले गिरे हुए साथी को बाहर लेकर भागा। इसके बाद दोबारा अंदर गया, सोचा कि एक खिड़की को खोल देता हूं, लेकिन खिड़की नहीं खुल रही थी, सोचा कि शीशा तोड़ दूं, लेकिन कुछ औजार भी नहीं दिखा जिससे कांच तोड़ सकूं। इसके बाद मैंने मुक्का मारकर कांच तोड़ा ताकि धुआं बाहर निकल सके। मेरे हाथ में चोट आई, मैंने 7 से 8 लोगों को बेड समेत खिंचकर बाहर निकाला। अंदर करीब 15 बेड थे, जिस पर करीब 13 लोग एडमिट थे। मैं सांस नहीं ले पा रहा था। अंदर काला धुआं था, लेकिन किसी तरह सांस रोककर लोगों को बाहर निकाला। अपने हाथों से 3 लाशों को बाहर निकाला मुजफ्फरपुर के ही तुर्की के मरीज संजीव प्रसाद के 30 साल के बेटे केशव ने बताया, मैं सुबह करीब चार बजे अस्पताल के नीचे था। लोगों ने शोर मचाया कि आग लग गई। मेरी भी आंख खुली। देखा कि अधिकतर लोग नीचे की ओर भाग रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाई। मरीजों को बचाने के लिए अस्पताल के ऊपर वाले फ्लोर की ओर बढ़े। मैं भी हिम्मत जुटाकर अस्पताल के अंदर पहुंचा। अंदर काफी ज्यादा काला धुआं भरा था। अंदर मुझसे सांस भी नहीं लिया जा रहा था। मैंने अपने हाथों से दो से तीन लाशें बाहर निकाली हैं। उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। आग लगने के बाद अस्पताल के अधिकतर स्टाफ भाग निकले थे, उन्हें मरीजों की मदद करनी चाहिए थी, मरीजों को अलर्ट करना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने के बजाए वो पहले अपनी जान बचाकर भाग निकले। ये घटना हॉस्पिटल की लापरवाही से हुई है। पहले कुछ शॉर्ट सर्किट हुआ होगा, जिसकी वजह से आग इतनी बड़ी मात्रा में फैली, नहीं तो अचानक आग इतनी तेजी से नहीं फैल सकती है। मेरी आखों के सामने ससुर जलकर मर गए बगाही गांव की रहने वाली संगीता कुमारी के ससुर ICU में एडमिट थे। उन्होंने बताया, ससुर बृजनंदन राय सड़क हादसे में घायल हो गए थे। पिछले 4 दिनों से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के लिए हमने जमीन भी बेच दी थी। गुरुवार सुबह करीब 3 बजे मैं ICU के बाहर बैठी थी। अचानक अंदर से अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन दरवाजे और खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। मैंने जब ICU के अंदर झांका तो ससुर आग की लपटों में घिरे हुए थे। मैं उन्हें बचाने के लिए अंदर दौड़ना चाहती थी, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी। मेरी आंखों के सामने मेरे ससुर जल रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। ये कहते हुए संगीता फफक कर रो पड़ीं। अस्पताल की लापरवाही से भाई मर गया औराई के रतनपुर गांव के रहने वाले शशांक की भी हादसे में मौत हुई है। शशांक कुमार अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। उनके भाई निकेश कुमार ने बताया, अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही के कारण मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। अस्पताल के कर्मियों को मदद करना चाहिए था, लेकिन वे लोग मदद के बजाए भाग गए। मर गए हैं तो लाश दे दीजिए मरीज बृजनंदन राय के परिजन मनोज यादव ने बताया कि रविवार को उनका एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद उन्हें ICU में एडमिट कराया था। अचानक आग लगी तो सब भागने लगे कुछ पता ही नहीं चला। मेरे मरीज का कुछ पता नहीं चल रहा है। वो जिंदा है या मर गए, कोई कुछ नहीं बता रहा है। मैं पुलिस-प्रशासन से गुहार लगाता हूं, उनके साथ क्या हुआ है ये तो बता दीजिए। मर गए हैं तो लाश ही लौटा दीजिए। ———– ये खबरें भी पढ़िए… बिहार के मुजफ्फरपुर में हॉस्पिटल में आग, 5 की मौत:20 से ज्यादा झुलसे; ICU के खिड़की-दरवाजे तोड़कर मरीजों को बाहर निकाला बिहार के मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे हुआ। आग शॉर्ट सर्किट से लगी। इसके बाद ICU में लगे एसी में ब्लास्ट हुआ। इसकी वजह से आग तेजी फैली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड अस्पताल पहुंची और आग पर काबू पाया। लोगों ने मौके से स्टाफ के गायब होने का आरोप लगाया। परिजन अपने मरीजों को स्ट्रैचर से बाहर ले जाते दिखे। ICU वार्ड 5वीं फ्लोर पर है, जिसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कत आई। पूरी खबर पढ़िए मरीजों को लेकर भागे लोग, अस्पताल हादसे की 15 तस्वीरें:ICU पूरा जल गया, फर्श पर लाशें पड़ी रहीं; खिड़कियों को तोड़ने लगे लोग मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद ICU में लगे एसी में ब्लास्ट हुआ। जिसके चलते आग तेजी फैली। चारों ओर धुआं फैल गया। वारदात के समय वार्ड में 15 एडमिट थे। परिजन का आरोप है कि, आग लगने के बाद मौके से स्टाफ और डॉक्टर भाग गए। परिजन खुद मरीज को स्ट्रेचर पर बाहर लेकर निकले ICU वार्ड 5वीं फ्लोर पर है। दमकलकर्मियों ने दूसरे वार्डों में फंसे मरीजों को बाहर निकाला। धुआं फैलने के चलते शीशा को तोड़ दिया गया। पूरी खबर पढ़िए


