शिवहर जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम तरियानी प्रखंड के राजाडीह और पिपराही प्रखंड के बसैहिया शेख गांव में हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर और आत्मा, शिवहर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। क्षेत्र में सब्जी और धान आधारित खेती की प्रमुखता को देखते हुए, किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के विभिन्न वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई। उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए खेती नाबार्ड के डीडीएम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती केवल वर्तमान उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। डीडीएम ने फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान पंजीकरण के माध्यम से किसानों का प्रमाणित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा इस डेटाबेस से किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदानों, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने किसानों से समय पर फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील भी की। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन, धान की सीधी बुवाई और सरकारी योजनाओं से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। अंत में, किसानों से आह्वान किया गया कि वे खेतों की उर्वरता बनाए रखने, जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन आंदोलन का रूप दें। इसका लक्ष्य खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। शिवहर जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम तरियानी प्रखंड के राजाडीह और पिपराही प्रखंड के बसैहिया शेख गांव में हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर और आत्मा, शिवहर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। क्षेत्र में सब्जी और धान आधारित खेती की प्रमुखता को देखते हुए, किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के विभिन्न वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई। उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए खेती नाबार्ड के डीडीएम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती केवल वर्तमान उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। डीडीएम ने फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान पंजीकरण के माध्यम से किसानों का प्रमाणित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा इस डेटाबेस से किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदानों, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने किसानों से समय पर फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील भी की। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन, धान की सीधी बुवाई और सरकारी योजनाओं से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। अंत में, किसानों से आह्वान किया गया कि वे खेतों की उर्वरता बनाए रखने, जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन आंदोलन का रूप दें। इसका लक्ष्य खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।


