शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 16 तक आयोग से मांगा जवाब

शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 16 तक आयोग से मांगा जवाब

स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मामले में गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने शनिवार को मामले की सुनवाई की। डोरंडा स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन में कमेटी के अध्यक्ष एवं झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष सरकार और जेएसएससी की ओर से पूर्व में मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। कोर्ट के समक्ष कुछ दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी पेश की गई, लेकिन कमेटी ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कमेटी ने स्पष्ट कहा कि सभी दस्तावेज शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करें। इसके लिए जेएसएससी की ओर से समय देने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने जेएसएससी को अंतिम मौका देते हुए 16 मई तक का अंतिम समय दिया है। सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक और जेएसएससी की ओर से उपसचिव उपस्थित रहे। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, शेखर प्रसाद गुप्ता एवं अन्य ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई अब 16 मई को पुराने हाईकोर्ट भवन में होगी। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सरकार और जेएसएससी को कई अहम जानकारियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। कमेटी ने राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट, नियुक्त किए गए शिक्षकों के नाम, उनके प्राप्तांक, नियुक्ति तिथि और चयन प्रक्रिया से संबंधित अन्य दस्तावेज मांगे थे। यह सभी सूचनाएं हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मांगी गई थीं। सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक और जेएसएससी के उपसचिव ने दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन कमेटी ने इसे स्वीकार नहीं किया। महिला पर्यवेक्षक बहाली मामले में जेएसएससी को निर्णय लेने का निर्देश झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षक नियुक्ति मामले में दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बाद अब तक नियुक्ति नहीं दिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए जेएसएससी को निर्देश दिया कि प्रार्थी वंदना कुमारी की उम्मीदवारी पर तत्काल निर्णय लिया जाए। अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थी नियुक्ति के लिए पात्र हैं तो उन्हें तुरंत नियुक्ति के लिए अनुशंसा भेजें। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि न तो याचिकाकर्ता को कोई शो-कॉज नोटिस दिया गया और न ही आयोग ने उनके नाम पर विचार नहीं किए जाने का कोई स्पष्ट कारण दिया है। स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मामले में गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने शनिवार को मामले की सुनवाई की। डोरंडा स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन में कमेटी के अध्यक्ष एवं झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष सरकार और जेएसएससी की ओर से पूर्व में मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। कोर्ट के समक्ष कुछ दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी पेश की गई, लेकिन कमेटी ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कमेटी ने स्पष्ट कहा कि सभी दस्तावेज शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करें। इसके लिए जेएसएससी की ओर से समय देने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने जेएसएससी को अंतिम मौका देते हुए 16 मई तक का अंतिम समय दिया है। सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक और जेएसएससी की ओर से उपसचिव उपस्थित रहे। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, शेखर प्रसाद गुप्ता एवं अन्य ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई अब 16 मई को पुराने हाईकोर्ट भवन में होगी। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सरकार और जेएसएससी को कई अहम जानकारियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। कमेटी ने राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट, नियुक्त किए गए शिक्षकों के नाम, उनके प्राप्तांक, नियुक्ति तिथि और चयन प्रक्रिया से संबंधित अन्य दस्तावेज मांगे थे। यह सभी सूचनाएं हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मांगी गई थीं। सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक और जेएसएससी के उपसचिव ने दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन कमेटी ने इसे स्वीकार नहीं किया। महिला पर्यवेक्षक बहाली मामले में जेएसएससी को निर्णय लेने का निर्देश झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षक नियुक्ति मामले में दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बाद अब तक नियुक्ति नहीं दिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए जेएसएससी को निर्देश दिया कि प्रार्थी वंदना कुमारी की उम्मीदवारी पर तत्काल निर्णय लिया जाए। अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थी नियुक्ति के लिए पात्र हैं तो उन्हें तुरंत नियुक्ति के लिए अनुशंसा भेजें। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि न तो याचिकाकर्ता को कोई शो-कॉज नोटिस दिया गया और न ही आयोग ने उनके नाम पर विचार नहीं किए जाने का कोई स्पष्ट कारण दिया है।  

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