6 माह से 6 वर्ष तक बच्चे को रखने की सुविधा

6 माह से 6 वर्ष तक बच्चे को रखने की सुविधा

आम तौर पर होता ये है कि ऑफिस में जब लंच का समय होता है तो मां खुद पालना घर पहुंच जाती हैं। इसका फायदा ये होता है कि उन्हें अपने बच्चों को अपनी निगरानी में भोजन कराने और बच्चों के साथ कुछ समय बिताने का भी अवसर मिल जाता है। ड्यूटी पर मौजूद क्रेच वर्कर ने बताया औसतन प्रतिदिन सात आठ बच्चे तो पालना घर में नियमित रूप से दिन भर रहते ही हैं। कार्यालय अवधि समाप्त होने पर पालना घर बंद हो जाता है। पालना घर में छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां खेल सामग्री, विश्राम व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिल सके। माताओं के लिए सुरक्षित व गोपनीय स्तनपान कक्ष भी उपलब्ध है, जहां वे सम्मानजनक माहौल में शिशुओं को स्तनपान करा सकती हैं। दीवारों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग्स, फर्श पर अक्षर व चित्र और खिलौनों की व्यवस्था बच्चों को आकर्षित करती है। यहां डे-केयर सुविधा है। भास्कर न्यूज| अररिया समाहरणालय परिसर में संचालित पालना घर कामकाजी महिलाओं के लिए उपयोगी सुविधा साबित हो रहा है। 10 बच्चों की क्षमता वाले इस केंद्र में वर्तमान में 8 बच्चों की निःशुल्क और सुरक्षित देखभाल की जा रही है, जिससे महिलाएं ड्यूटी के दौरान निश्चिंत रह पाती हैं। पालना घर में नियुक्त क्रेच वर्कर और क्रेच हेल्पर बच्चों की देखरेख के साथ उनके पोषण और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दे रही हैं। आईसीडीएस की डीपीओ व नोडल पदाधिकारी कविता कुमारी ने बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आईसीडीएस कार्यालय के हॉल में यह सुविधा संचालित है, जिसका उद्देश्य कार्यरत महिलाओं को सहयोग और बच्चों की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। आम तौर पर होता ये है कि ऑफिस में जब लंच का समय होता है तो मां खुद पालना घर पहुंच जाती हैं। इसका फायदा ये होता है कि उन्हें अपने बच्चों को अपनी निगरानी में भोजन कराने और बच्चों के साथ कुछ समय बिताने का भी अवसर मिल जाता है। ड्यूटी पर मौजूद क्रेच वर्कर ने बताया औसतन प्रतिदिन सात आठ बच्चे तो पालना घर में नियमित रूप से दिन भर रहते ही हैं। कार्यालय अवधि समाप्त होने पर पालना घर बंद हो जाता है। पालना घर में छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां खेल सामग्री, विश्राम व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिल सके। माताओं के लिए सुरक्षित व गोपनीय स्तनपान कक्ष भी उपलब्ध है, जहां वे सम्मानजनक माहौल में शिशुओं को स्तनपान करा सकती हैं। दीवारों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग्स, फर्श पर अक्षर व चित्र और खिलौनों की व्यवस्था बच्चों को आकर्षित करती है। यहां डे-केयर सुविधा है। भास्कर न्यूज| अररिया समाहरणालय परिसर में संचालित पालना घर कामकाजी महिलाओं के लिए उपयोगी सुविधा साबित हो रहा है। 10 बच्चों की क्षमता वाले इस केंद्र में वर्तमान में 8 बच्चों की निःशुल्क और सुरक्षित देखभाल की जा रही है, जिससे महिलाएं ड्यूटी के दौरान निश्चिंत रह पाती हैं। पालना घर में नियुक्त क्रेच वर्कर और क्रेच हेल्पर बच्चों की देखरेख के साथ उनके पोषण और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दे रही हैं। आईसीडीएस की डीपीओ व नोडल पदाधिकारी कविता कुमारी ने बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आईसीडीएस कार्यालय के हॉल में यह सुविधा संचालित है, जिसका उद्देश्य कार्यरत महिलाओं को सहयोग और बच्चों की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है।  

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