भू-माफिया गंगदयाल यादव पर ED-EOU का शिकंजा:गोपालगंज में 42 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की तैयारी, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

भू-माफिया गंगदयाल यादव पर ED-EOU का शिकंजा:गोपालगंज में 42 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की तैयारी, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

गोपालगंज में कुख्यात भू-माफिया गंगदयाल यादव के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर गंगदयाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ED और EOU को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में गंगदयाल यादव और उसके परिजनों के नाम पर 42 करोड़ रुपए से अधिक की संदिग्ध चल और अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान जब गंगदयाल और उसके परिवार से इन संपत्तियों के बारे में पूछताछ की गई, तो वे इनके लिए कोई वैध आय का स्रोत प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस का मानना है कि यह पूरी संपत्ति जमीन की अवैध खरीद-बिक्री, रंगदारी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों से अर्जित काले धन से बनाई गई है। यह जिले में अपराध और अवैध कमाई के साम्राज्य पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। हत्या के प्रयास, रंगदारी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज गंगदयाल यादव का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ गोपालगंज और आसपास के इलाकों में हत्या के प्रयास, रंगदारी, जालसाजी, धोखाधड़ी और जमीन पर अवैध कब्जे सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से इलाके में आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। प्रस्ताव मंजूर होते ही ED और EOU इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज करेंगी। इसके बाद गंगदयाल यादव और उसके करीबियों की 42 करोड़ रुपये की इन अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जांच में यह भी सामने आया है कि गंगदयाल यादव को गहरा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। इसी रसूख और बाहुबल के दम पर यह गिरोह सीधे-साधे लोगों की जमीनों पर जबरन कब्जा करता था। गंगदयाल यादव का नेटवर्क सिर्फ गोपालगंज तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पटना सहित अन्य जिलों से भी जुड़े हुए थे। नगर थाने में 11 आपराधिक मामले दर्ज पुलिस ने गहन जांच के दौरान उन सफेदपोशों और मददगारों की भी पहचान कर ली है, जो इस गिरोह को पर्दे के पीछे से संरक्षण और सहयोग दे रहे थे।भू-माफिया गंग दयाल यादव पिछले 5 अप्रैल से गोपालगंज जेल में बंद है। नगर थाने में उसके खिलाफ अब तक कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। एसपी विनय तिवारी ने इन सभी मामलों की विस्तृतये समीक्षा की है और आरोपियों को जल्द से जल्द कानूनन सजा दिलाने के लिए कोर्ट में स्पीडी ट्रायल शुरू करने का आदेश जारी किया है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों की जान-माल और जमीन की सुरक्षा के लिए संगठित अपराध के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। गंग दयाल यादव के दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने हजियापुर रोड में पूर्व सांसद अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव के आवास के पास बनी पीपीसी सड़क को जेसीबी लगवाकर उखड़वा दिया था। उसने उस सरकारी सड़क को अपनी निजी जमीन बताकर तत्कालीन अंचलाधिकारी से अपने पक्ष में रिपोर्ट भी तैयार करवा ली थी। इस पर नगर परिषद ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य सफाई जमादार धर्मेंद्र सिंह के माध्यम से नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सीजेएम कोर्ट में सुलह का दिया आवेदन इसके बाद गंग दयाल ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सिंह को केस वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया हालांकि, जब सीजेएम कोर्ट में सुलह का आवेदन दिया गया, तो अदालत ने इसे खारिज करते हुए नगर परिषद को कड़ी फटकार लगाई और तलब कर लिया। कोर्ट का यह कड़ा रुख देखकर गंग दयाल वहां से खिसक गया था। गंग दयाल यादव की गिरफ्तारी बंजारी इलाके में एक मकान और कीमती जमीन को कब्जा करने के प्रयास के दौरान हुई थी। वह उचकागांव थाने के नरकटिया गांव के रहने वाले स्वर्गीय सूचित सिंह के बेटा शैलेंद्र कुमार सिंह के शहर स्थित बंजारी के मकान और जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठा था। वह लगातार पीड़ित परिवार पर मकान और जमीन को उसके नाम पर लिख देने का दबाव बना रहा थामामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने डीएसपी नीरव कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया था। इस स्पेशल टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 5 अप्रैल को गंग दयाल यादव को धर दबोचा था गोपालगंज में कुख्यात भू-माफिया गंगदयाल यादव के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर गंगदयाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ED और EOU को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में गंगदयाल यादव और उसके परिजनों के नाम पर 42 करोड़ रुपए से अधिक की संदिग्ध चल और अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान जब गंगदयाल और उसके परिवार से इन संपत्तियों के बारे में पूछताछ की गई, तो वे इनके लिए कोई वैध आय का स्रोत प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस का मानना है कि यह पूरी संपत्ति जमीन की अवैध खरीद-बिक्री, रंगदारी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों से अर्जित काले धन से बनाई गई है। यह जिले में अपराध और अवैध कमाई के साम्राज्य पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। हत्या के प्रयास, रंगदारी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज गंगदयाल यादव का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ गोपालगंज और आसपास के इलाकों में हत्या के प्रयास, रंगदारी, जालसाजी, धोखाधड़ी और जमीन पर अवैध कब्जे सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से इलाके में आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। प्रस्ताव मंजूर होते ही ED और EOU इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज करेंगी। इसके बाद गंगदयाल यादव और उसके करीबियों की 42 करोड़ रुपये की इन अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जांच में यह भी सामने आया है कि गंगदयाल यादव को गहरा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। इसी रसूख और बाहुबल के दम पर यह गिरोह सीधे-साधे लोगों की जमीनों पर जबरन कब्जा करता था। गंगदयाल यादव का नेटवर्क सिर्फ गोपालगंज तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पटना सहित अन्य जिलों से भी जुड़े हुए थे। नगर थाने में 11 आपराधिक मामले दर्ज पुलिस ने गहन जांच के दौरान उन सफेदपोशों और मददगारों की भी पहचान कर ली है, जो इस गिरोह को पर्दे के पीछे से संरक्षण और सहयोग दे रहे थे।भू-माफिया गंग दयाल यादव पिछले 5 अप्रैल से गोपालगंज जेल में बंद है। नगर थाने में उसके खिलाफ अब तक कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। एसपी विनय तिवारी ने इन सभी मामलों की विस्तृतये समीक्षा की है और आरोपियों को जल्द से जल्द कानूनन सजा दिलाने के लिए कोर्ट में स्पीडी ट्रायल शुरू करने का आदेश जारी किया है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों की जान-माल और जमीन की सुरक्षा के लिए संगठित अपराध के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। गंग दयाल यादव के दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने हजियापुर रोड में पूर्व सांसद अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव के आवास के पास बनी पीपीसी सड़क को जेसीबी लगवाकर उखड़वा दिया था। उसने उस सरकारी सड़क को अपनी निजी जमीन बताकर तत्कालीन अंचलाधिकारी से अपने पक्ष में रिपोर्ट भी तैयार करवा ली थी। इस पर नगर परिषद ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य सफाई जमादार धर्मेंद्र सिंह के माध्यम से नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सीजेएम कोर्ट में सुलह का दिया आवेदन इसके बाद गंग दयाल ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सिंह को केस वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया हालांकि, जब सीजेएम कोर्ट में सुलह का आवेदन दिया गया, तो अदालत ने इसे खारिज करते हुए नगर परिषद को कड़ी फटकार लगाई और तलब कर लिया। कोर्ट का यह कड़ा रुख देखकर गंग दयाल वहां से खिसक गया था। गंग दयाल यादव की गिरफ्तारी बंजारी इलाके में एक मकान और कीमती जमीन को कब्जा करने के प्रयास के दौरान हुई थी। वह उचकागांव थाने के नरकटिया गांव के रहने वाले स्वर्गीय सूचित सिंह के बेटा शैलेंद्र कुमार सिंह के शहर स्थित बंजारी के मकान और जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठा था। वह लगातार पीड़ित परिवार पर मकान और जमीन को उसके नाम पर लिख देने का दबाव बना रहा थामामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने डीएसपी नीरव कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया था। इस स्पेशल टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 5 अप्रैल को गंग दयाल यादव को धर दबोचा था  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *