पटना जू में ईको-फ्रेंडली ट्रेन चलेगी। जुलाई महीने से ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। इसे बिछाने में 4 से 5 महीने लगेंगे और साल के अंत तक इस पर रेल सेवा शुरू कर दी जाएगी। ट्रेन के लिए इंजन और बोगी पहले मैसूर से आने वाली थी, लेकिन अब समस्तीपुर रेल फैक्ट्री में तैयार की जाएगी। दानापुर रेल मंडल की ओर से 3.7 किमी लंबा नया ट्रैक बनाया जाएगा। प्रशासन ने 5 करोड़ 81 लाख 73 हजार की राशि दानापुर रेल मंडल को ट्रांसफर कर दी है। रेलवे की ओर से जल्द काम शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। ट्रेन में कुल 4 बोगियां होंगी, एक साथ 120 यात्री करेंगे सफर पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बैटरी से संचालित ईको फ्रेंडली इंजन का इस्तेमाल होगा। ट्रेन में कुल 4 बोगियां होंगी। इसमें हर में 20 से 30 यात्रियों को बैठने की क्षमता होगी। ट्रेन चिल्ड्रेन स्टेशन से शुरू होकर हाइना पिंजरा, जू हास्पिटल, शेर, बाघ और भालू के बाड़ों से गुजरते हुए पक्षी पिंजरे तक जाएगी। पर्यटक को पूरे जू का भ्रमण करने के दौरान नया अनुभव मिलेगा। हर दिन 5 से 10 हजार दर्शक पटना जू आते हैं।
पहले से बिछे ट्रैक में कर्व अधिक, इसलिए हो रही देरी इस काम में देरी पर जू के एक अधिकारी ने बताया कि पहले से बिछे ट्रैक में कर्व अधिक है। खासकर जिराफ के इनक्लोजर के पास यह बहुत तीखा है। इसलिए विशेषज्ञ पहले के ट्रैक से अधिक चौड़ी पटरी बिछाना चाहते थे। कम चौड़े ट्रैक पर घुमाव के दौरान ट्रेन के डिरेल का खतरा रहता है। पटना जू का ट्वाय ट्रेन बीते पांच सालों से बंद है। ट्रेन का परिचालन रोकने की वजह पहले से बिछाई गई ट्रैक का स्लीपर का कई जगह टूट जाना रहा। इसके कारण ऐसे जगहों से ट्रेन के गुजरने के दौरान पटरी धंसती थी, जिससे ट्रेन के डिरेल होने का खतरा था। पटना जू में ईको-फ्रेंडली ट्रेन चलेगी। जुलाई महीने से ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। इसे बिछाने में 4 से 5 महीने लगेंगे और साल के अंत तक इस पर रेल सेवा शुरू कर दी जाएगी। ट्रेन के लिए इंजन और बोगी पहले मैसूर से आने वाली थी, लेकिन अब समस्तीपुर रेल फैक्ट्री में तैयार की जाएगी। दानापुर रेल मंडल की ओर से 3.7 किमी लंबा नया ट्रैक बनाया जाएगा। प्रशासन ने 5 करोड़ 81 लाख 73 हजार की राशि दानापुर रेल मंडल को ट्रांसफर कर दी है। रेलवे की ओर से जल्द काम शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। ट्रेन में कुल 4 बोगियां होंगी, एक साथ 120 यात्री करेंगे सफर पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बैटरी से संचालित ईको फ्रेंडली इंजन का इस्तेमाल होगा। ट्रेन में कुल 4 बोगियां होंगी। इसमें हर में 20 से 30 यात्रियों को बैठने की क्षमता होगी। ट्रेन चिल्ड्रेन स्टेशन से शुरू होकर हाइना पिंजरा, जू हास्पिटल, शेर, बाघ और भालू के बाड़ों से गुजरते हुए पक्षी पिंजरे तक जाएगी। पर्यटक को पूरे जू का भ्रमण करने के दौरान नया अनुभव मिलेगा। हर दिन 5 से 10 हजार दर्शक पटना जू आते हैं।
पहले से बिछे ट्रैक में कर्व अधिक, इसलिए हो रही देरी इस काम में देरी पर जू के एक अधिकारी ने बताया कि पहले से बिछे ट्रैक में कर्व अधिक है। खासकर जिराफ के इनक्लोजर के पास यह बहुत तीखा है। इसलिए विशेषज्ञ पहले के ट्रैक से अधिक चौड़ी पटरी बिछाना चाहते थे। कम चौड़े ट्रैक पर घुमाव के दौरान ट्रेन के डिरेल का खतरा रहता है। पटना जू का ट्वाय ट्रेन बीते पांच सालों से बंद है। ट्रेन का परिचालन रोकने की वजह पहले से बिछाई गई ट्रैक का स्लीपर का कई जगह टूट जाना रहा। इसके कारण ऐसे जगहों से ट्रेन के गुजरने के दौरान पटरी धंसती थी, जिससे ट्रेन के डिरेल होने का खतरा था।


