जमुई के झाझा थाना में रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी इकाई ने कार्रवाई की है। इस दौरान एक सरकारी चालक सिपाही को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दिन थाना प्रभारी का अवकाश पर जाना और उनका मोबाइल बंद मिलना चर्चा का विषय बन गया है। मंगलवार को पटना से आई विशेष निगरानी इकाई की टीम ने झाझा थाना में छापेमारी की। टीम ने सरकारी चालक सिपाही जितेंद्र कुमार को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई ट्रैक्टर चालक उमेश यादव की शिकायत पर की गई थी। प्रतिदिन 12 हजार रुपये तक की अवैध वसूली
उमेश यादव ने शिकायत में आरोप लगाया था कि बालू ढुलाई के लिए प्रति ट्रिप तीन हजार रुपये और प्रतिदिन 12 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही थी। परिवादी ने अपने आवेदन में चालक सिपाही जितेंद्र कुमार के साथ-साथ झाझा थाना प्रभारी लाल बहादुर सिंह का भी नाम लिया था। शिकायत के सत्यापन के बाद विशेष निगरानी इकाई ने दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि जिस दिन निगरानी टीम झाझा पहुंची, उसी दिन थाना प्रभारी ने दो दिनों की छुट्टी के लिए आवेदन दे दिया था। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान निगरानी टीम को थाना प्रभारी नहीं मिले। थाना प्रभारी द्वारा अवकाश का आवेदन दिया गया
उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया गया। निगरानी टीम देर रात तक उनकी तलाश करती रही, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद टीम पटना लौट गई। मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब गिरफ्तार चालक ने पूछताछ में बताया कि बरामद की गई राशि उसके लिए नहीं, बल्कि थाना प्रभारी तक पहुंचाने के लिए ली जा रही थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने पर ही हो सकेगी। बुधवार को जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि थाना प्रभारी द्वारा अवकाश का आवेदन दिया गया था और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्राथमिकी में उनका नाम शामिल है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि निगरानी की कार्रवाई और थाना प्रभारी के अवकाश का समय एक ही दिन कैसे मिला। क्या यह महज संयोग है या जांच में कोई और तथ्य सामने आएंगे, इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से मिल सकेगा जमुई के झाझा थाना में रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी इकाई ने कार्रवाई की है। इस दौरान एक सरकारी चालक सिपाही को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दिन थाना प्रभारी का अवकाश पर जाना और उनका मोबाइल बंद मिलना चर्चा का विषय बन गया है। मंगलवार को पटना से आई विशेष निगरानी इकाई की टीम ने झाझा थाना में छापेमारी की। टीम ने सरकारी चालक सिपाही जितेंद्र कुमार को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई ट्रैक्टर चालक उमेश यादव की शिकायत पर की गई थी। प्रतिदिन 12 हजार रुपये तक की अवैध वसूली
उमेश यादव ने शिकायत में आरोप लगाया था कि बालू ढुलाई के लिए प्रति ट्रिप तीन हजार रुपये और प्रतिदिन 12 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही थी। परिवादी ने अपने आवेदन में चालक सिपाही जितेंद्र कुमार के साथ-साथ झाझा थाना प्रभारी लाल बहादुर सिंह का भी नाम लिया था। शिकायत के सत्यापन के बाद विशेष निगरानी इकाई ने दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि जिस दिन निगरानी टीम झाझा पहुंची, उसी दिन थाना प्रभारी ने दो दिनों की छुट्टी के लिए आवेदन दे दिया था। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान निगरानी टीम को थाना प्रभारी नहीं मिले। थाना प्रभारी द्वारा अवकाश का आवेदन दिया गया
उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया गया। निगरानी टीम देर रात तक उनकी तलाश करती रही, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद टीम पटना लौट गई। मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब गिरफ्तार चालक ने पूछताछ में बताया कि बरामद की गई राशि उसके लिए नहीं, बल्कि थाना प्रभारी तक पहुंचाने के लिए ली जा रही थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने पर ही हो सकेगी। बुधवार को जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि थाना प्रभारी द्वारा अवकाश का आवेदन दिया गया था और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्राथमिकी में उनका नाम शामिल है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि निगरानी की कार्रवाई और थाना प्रभारी के अवकाश का समय एक ही दिन कैसे मिला। क्या यह महज संयोग है या जांच में कोई और तथ्य सामने आएंगे, इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से मिल सकेगा


