विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से शुक्रवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज सभागार में वीबीजी-आरएमजी (VBG-RMG) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय पंच सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने ग्राम विकास, रोजगार सृजन, पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार, सभी खंड विकास अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। योजना की रूपरेखा और पंचायतों की भूमिका पर दी गई जानकारी सम्मेलन में वीबीजी-आरएमजी योजना के उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका, विकसित ग्राम पंचायत योजना का निर्माण एवं अनुमोदन, परिवारों का पंजीकरण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड, परिसंपत्तियों के निर्माण एवं अनुरक्षण, अन्य योजनाओं से अभिसरण, सामाजिक अंकेक्षण, शिकायत निवारण और पारदर्शी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई। ‘125 दिन रोजगार और समय पर मजदूरी सुनिश्चित होगी’ सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायतें ही विकसित भारत-2047 की मजबूत आधारशिला बनेंगी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत पात्र लोगों को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तथा मजदूरी का भुगतान सात दिनों के भीतर श्रमिकों के बैंक खातों में सुनिश्चित किया जाएगा। कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी ने पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। वहीं माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आधारभूत ढांचे के विकास और रोजगार सृजन को ग्रामीण विकास का आधार बताया। विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन ने महिलाओं की अधिकतम भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि इससे महिला सशक्तिकरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। डीएम बोले- नियमों का अध्ययन कर तैयार करें कार्ययोजना जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहले इसके नियमों और दिशा-निर्देशों का गहन अध्ययन करें। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं, ताकि आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और पलायन पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि योजना के तहत प्रत्येक पात्र इच्छुक व्यक्ति को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए गंभीरता और समन्वय के साथ कार्य किया जाए। नियमावली की पुस्तिकाएं वितरित, प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर कार्यक्रम का संचालन उपायुक्त श्रम एवं रोजगार रामेंद्र सिंह ने किया। योजना की विस्तृत जानकारी खंड विकास अधिकारी अरुण सिंह ने प्रस्तुत की, जबकि अंत में परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन के दौरान जनप्रतिनिधियों को योजना की नियमावली एवं शासनादेशों की पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं, ताकि योजना का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।


