रीवा शहर में जमीन में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी का आरोप लगाते हुए कई लोग शनिवार रात मऊगंज निवासी विवेक तिवारी को पकड़कर सिविल लाइन थाने ले पहुंचे। पीड़ितों का आरोप है कि विवेक ने जमीन में निवेश कर बेहतर मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर कई लोगों से लाखों रुपए लिए, लेकिन बाद में न तो उन्हें जमीन मिली और न ही रकम वापस की गई। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग लोगों से ली गई रकम मिलाकर यह राशि करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए तक पहुंचती है। हालांकि, पुलिस ने अभी आरोपों की जांच शुरू की है। किसी से 5 लाख तो किसी से 10 लाख लेने का आरोप पीड़ित आशीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि विवेक तिवारी ने उनसे 8 लाख रुपए लिए थे। इसी तरह अन्य लोगों से किसी से 5 लाख तो किसी से 10 लाख रुपए तक लिए जाने की बात सामने आई है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें जमीन में पैसा लगाने पर अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया गया था। इसी विश्वास में कई लोगों ने आरोपी को बड़ी रकम दी, लेकिन बाद में न तो जमीन मिली और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई। पीड़ित की पहचान से सामने आया आरोपी आशीष मिश्रा के मुताबिक, विवेक तिवारी दुबई से लौटने के बाद शनिवार रात एक चाय की दुकान पर खड़ा था। इसी दौरान एक पीड़ित के दोस्त की पत्नी की नजर उस पर पड़ गई। उसने विवेक को पहचान लिया और इसकी जानकारी अन्य लोगों को दी। सूचना मिलते ही जमीन में निवेश के नाम पर रकम देने वाले कई लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने विवेक को पकड़ लिया और उसे सिविल लाइन थाने लेकर पहुंचे। थाने पहुंचकर पीड़ितों ने दी शिकायत पीड़ितों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। उनका आरोप है कि विवेक तिवारी ने कई लोगों से निवेश के नाम पर रकम ली और बाद में वापस नहीं की। पीड़ितों ने पुलिस के सामने अपने-अपने लेनदेन और रकम से संबंधित जानकारी भी रखी है। उनका दावा है कि कई लोगों से रकम लेने के कारण कुल राशि एक करोड़ रुपए से अधिक है और यह करीब 1.30 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। पुलिस बोली- आरोपों की जांच जारी सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि मामले में शिकायत प्राप्त हुई है। पीड़ितों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस शिकायत में बताए गए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करेगी। लेनदेन, रकम और जमीन में निवेश से संबंधित दावों की पुष्टि के बाद मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने लोगों से कितनी राशि ली गई और इस पूरे मामले में आरोपी की भूमिका क्या रही है।


