जोजरी-नदी में 4किमी पाइपलाइन से छोड़ रहे थे गंदा पानी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-यह सब कौन होने दे रहा है, क्या हम सीबीआई जांच करवाएं

जोजरी-नदी में 4किमी पाइपलाइन से छोड़ रहे थे गंदा पानी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-यह सब कौन होने दे रहा है, क्या हम सीबीआई जांच करवाएं

राजस्थान की जोजरी-लूणी नदी में लगातार हो रहे प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की हैं। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जोजरी नदी में 4 किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन से उद्योगों का प्रदूषित पानी छोड़ने के मामले में सरकार से पूछा कि यह सब कौन होने दे रहा है, क्या हम मामलें में सीबीआई जांच के आदेश दें। दरअसल, इन नदियों में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नियुक्ति समिति को जोधपुर के पास 4 किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन मिली थी। इस पाइपलाइन से जोजरी नदी में गंदा पानी डाला जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी भूमिगत डिस्चार्ज प्रणाली बिना एजेंसियों की जानकारी के कैसे संचालित होती रही। बैंच ने कहा कि लगातार निगरानी के बावजूद ऐसा कैसे हो गया, स्थानीय अधिकारी क्या कर रहे थे। सीबीआई जांच की जरूरत नहीं, एसआईटी करेगी जांच
इस पर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कहा कि 27 मई को समिति के निरीक्षण के दौरान अवैध डिस्चार्ज का मामला सामने आते ही कठोर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। जयपुर से विशेष टीम तत्काल जोधपुर भेजी गई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया, वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया गया, आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ की गई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होने कोर्ट को आश्वस्त किया कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी और सीनियर आईपीएस अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाएगा। ऐसे में फिलहाल सीबीआई जांच की जरूरत नहीं हैं। पर्यावरण की ऐसी दुर्दशा चिंताजनक
बैंच ने नदी में प्रदूषण के स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सालों से न्यायिक निगरानी और हस्तक्षेप के बावजूद राजस्थान में पर्यावरण की ऐसी दुर्दशा अत्यंत चिंताजनक हैं। कोर्ट ने सरकार द्वारा दिए आश्वासन को रिकोर्ड पर लेते हुए कहा कि इस अवैध डिस्चार्ज प्रणाली में नीचे से लेकर ऊपर तक के प्रत्येक व्यक्ति की पहचान करके उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। न्यायालय ने समिति की उस रिपोर्ट पर भी संज्ञान लिया, जिसमें समिति ने जोजरी-बांडी-लूणी नदी के तल में जमा स्लज को तुरंत हटाने की सिफारिश की हैं।

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