दरभंगा में भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन तीन दिन तक चला। जिसमें राजनीतिक चर्चा और भविष्य की रणनीति तय हुई। 107 सदस्यों वाली नई राज्य कमिटी का गठन किया गया। नई राज्य कमिटी ने सर्वसम्मति से कॉमरेड कुणाल को एक बार फिर राज्य सचिव चुना।
नई राज्य कमिटी में महिलाओं, युवाओं और आंदोलनकारी साथियों को विशेष महत्व दिया गया है। इस बार 27 नए चेहरों को राज्य कमिटी में शामिल किया गया, जबकि 13 साथियों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
सम्मेलन में आगामी संघर्षों और अभियानों को लेकर 10 सूत्री कार्यभार भी पारित किए गए। सम्मेलन से 20 मई को ग्रामीण मजदूरों की हड़ताल को व्यापक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया गया। साथ ही बिहार के 10 लाख गरीब परिवारों तक पहुंचकर जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
जनता की आवाज को मजबूत किया जाएगा सम्मेलन में पार्टी की कार्य रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने चर्चा की। राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठन विस्तार, जनआंदोलनों और आगामी संघर्षों को लेकर सुझाव दिए। दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार दोनों कठिन दौर से गुजर रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और गरीबों के जीवन पर लगातार हमले कर रहे हैं। कहा कि यह सम्मेलन बुलडोजर राज, दमनकारी नीतियों और लोकतंत्र विरोधी राजनीति के खिलाफ जनता की आवाज को मजबूत करने का संकल्प है।
पार्टी गांव-गांव और मोहल्लों तक गरीबों, मजदूरों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं और छात्रों के सवालों पर संघर्ष को तेज करेगी। साथ ही कार्यकर्ताओं से नई ऊर्जा और एकजुटता के साथ संगठन को मजबूत करने और सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला करने का आह्वान किया।
बिहार देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य सम्मेलन के पर्यवेक्षक वी शंकर ने कहा कि बिहार हमेशा देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य रहा है। चुनावी परिणाम चाहे जो हों, बिहार की जनता लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली जनता है। देश की प्रगतिशील ताकतें उम्मीद भरी नजरों से बिहार को देख रही हैं। लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की व्यापक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में ध्वनिमत से पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट पारित की गई। जनआंदोलन किया जाएगा
सम्मेलन में महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने, जाति आधारित जनगणना कराने, समता आंदोलन का विस्तार करने और बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किए गए। इसके अलावा बिहार के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान की कड़ी निंदा करते हुए उसे शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया। सम्मेलन का समापन इंकलाबी नारों और लोकतंत्र, संविधान और जनाधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ। दरभंगा में भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन तीन दिन तक चला। जिसमें राजनीतिक चर्चा और भविष्य की रणनीति तय हुई। 107 सदस्यों वाली नई राज्य कमिटी का गठन किया गया। नई राज्य कमिटी ने सर्वसम्मति से कॉमरेड कुणाल को एक बार फिर राज्य सचिव चुना।
नई राज्य कमिटी में महिलाओं, युवाओं और आंदोलनकारी साथियों को विशेष महत्व दिया गया है। इस बार 27 नए चेहरों को राज्य कमिटी में शामिल किया गया, जबकि 13 साथियों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
सम्मेलन में आगामी संघर्षों और अभियानों को लेकर 10 सूत्री कार्यभार भी पारित किए गए। सम्मेलन से 20 मई को ग्रामीण मजदूरों की हड़ताल को व्यापक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया गया। साथ ही बिहार के 10 लाख गरीब परिवारों तक पहुंचकर जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
जनता की आवाज को मजबूत किया जाएगा सम्मेलन में पार्टी की कार्य रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने चर्चा की। राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठन विस्तार, जनआंदोलनों और आगामी संघर्षों को लेकर सुझाव दिए। दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार दोनों कठिन दौर से गुजर रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और गरीबों के जीवन पर लगातार हमले कर रहे हैं। कहा कि यह सम्मेलन बुलडोजर राज, दमनकारी नीतियों और लोकतंत्र विरोधी राजनीति के खिलाफ जनता की आवाज को मजबूत करने का संकल्प है।
पार्टी गांव-गांव और मोहल्लों तक गरीबों, मजदूरों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं और छात्रों के सवालों पर संघर्ष को तेज करेगी। साथ ही कार्यकर्ताओं से नई ऊर्जा और एकजुटता के साथ संगठन को मजबूत करने और सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला करने का आह्वान किया।
बिहार देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य सम्मेलन के पर्यवेक्षक वी शंकर ने कहा कि बिहार हमेशा देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य रहा है। चुनावी परिणाम चाहे जो हों, बिहार की जनता लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली जनता है। देश की प्रगतिशील ताकतें उम्मीद भरी नजरों से बिहार को देख रही हैं। लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की व्यापक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में ध्वनिमत से पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट पारित की गई। जनआंदोलन किया जाएगा
सम्मेलन में महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने, जाति आधारित जनगणना कराने, समता आंदोलन का विस्तार करने और बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किए गए। इसके अलावा बिहार के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान की कड़ी निंदा करते हुए उसे शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया। सम्मेलन का समापन इंकलाबी नारों और लोकतंत्र, संविधान और जनाधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।


