डायबिटीज के मरीजों को दही नहीं खाना चाहिए! क्यों विशेषज्ञ ने कही ये बात

डायबिटीज के मरीजों को दही नहीं खाना चाहिए! क्यों विशेषज्ञ ने कही ये बात

Diabetes Cause: हमारे यहां खाने के साथ दही लेना सबको पसंद है। लेकिन जैसे ही किसी को डायबिटीज या शुगर की बीमारी होती है, उनके मन में डर बैठ जाता है कि कहीं दही से उनकी दिक्कत बढ़ न जाए। अक्सर लोग कन्फ्यूज रहते हैं कि दही खाना चाहिए या नहीं। मशहूर डॉक्टर परमेश्वर अरोड़ा का कहना है कि दही शुगर बढ़ने का तीसरा बड़ा कारण है।

क्या वाकई दही से डायबिटीज होती है? (Factual Check)

बहुत सारे लोग सोचते हैं कि दही में ऐसी कोई चीज नहीं है जिससे शुगर लेवल अचानक से बढ़ जाए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, यानी यह खून में ग्लूकोज को धीरे-धीरे छोड़ता है। लेकिन रात के समय दही खाने से शुगर बहुत जल्दी बढ़ता है इसलिए जितना हो सके इससे बचना चाहिए।

शुगर कैसे बढ़ता है?

दही दूध से बनता है और दूध में प्राकृतिक रूप से एक शुगर पाई जाती है जिसे लैक्टोज (Lactose) कहते हैं। जब दूध से दही जमता है, तो बैक्टीरिया इस लैक्टोज के एक हिस्से को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं, जिससे दही खट्टा हो जाता है। लेकिन दही में फिर भी लैक्टोज की कुछ मात्रा बची रहती है। अगर शरीर इस लैक्टोज को ठीक से पचा नहीं पाता या आप बहुत ज्यादा मात्रा में दही खाते हैं, तो यह ब्लड शुगर लेवल में उछाल ला सकता है।

दही शुगर बढ़ाने का कारण क्यों बन जाता है?

बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद दही में ऊपर से चीनी और प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं, जो शुगर के लिए जहर के समान हैं। रात के समय दही खाने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे शरीर शुगर को सही से प्रोसेस नहीं कर पाता। किसी भी चीज की अति नुकसानदेह है। बहुत ज्यादा दही शरीर में ‘कफ’ बढ़ाता है जो इंसुलिन की कार्यक्षमता को कम कर सकता है।

लैक्टोज के असर से कैसे बचें?

दही जितना ज्यादा खट्टा होगा, उसमें लैक्टोज की मात्रा उतनी ही कम होगी (क्योंकि बैक्टीरिया उसे एसिड में बदल चुके होंगे)। दही को सीधे खाने के बजाय उसमें खूब सारा पानी मिलाकर छाछ या मट्ठा बना लें। इससे उसकी सांद्रता (density) कम हो जाती है और यह शुगर फ्रेंडली बन जाता है। दही या छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और थोड़ी सी अजवाइन जरूर मिलाएं। यह पाचन को तेज करता है और शुगर स्पाइक को रोकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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