तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट (Tamil Nadu Floor Test) से पहले बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कजगम (AMMK) पार्टी के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने अपनी पार्टी के इकलौते विधायक एस कामराज को तुरंत पार्टी से निकाल दिया है।
कामराज पर आरोप है कि उन्होंने बिना पार्टी की अनुमति के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और उनकी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (टीवीके) सरकार को खुला समर्थन दे दिया है।
समर्थन का खुला ऐलान, फिर सजा
विधानसभा में कामराज ने मंगलवार को टीवीके के पक्ष में अपना रुख साफ कर दिया। कुछ घंटों के अंदर दिनाकरन ने एक्स पर पोस्ट करके जानकारी दी कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है।
उन्होंने लिखा कि कामराज ने पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ जाकर काम किया है। दिनकरन ने साफ कहा- कामराज अब AMMK के बेसिक मेंबर भी नहीं रहे। उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।
यह कदम दिनाकरन के लिए बड़ा झटका है क्योंकि कामराज मन्नारगुड़ी सीट से जीते थे। उन्होंने डीएमके के उम्मीदवार टीआरबी राजा को महज 1,566 वोटों से हराया था।
पहले से विवाद
दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ पिछले शनिवार से शुरू हुई। टीवीके पर आरोप लगा था कि उन्होंने कामराज के समर्थन पत्र की जाली कॉपी गवर्नर को सौंपी। दिनाकरन ने इसे लेकर जोरदार हमला बोला था। उन्होंने विजय को चुनौती दी थी कि असली पत्र और वीडियो गवर्नर के सामने पेश करें।
दिनाकरन ने कहा था- अगर सच है तो वीडियो और मूल पत्र गवर्नर को दें। जाली दस्तावेज देकर क्या साबित करना चाहते हैं? उन्होंने लोक भवन जाकर गवर्नर को ज्ञापन भी सौंपा और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
टीवीके ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि कामराज ने खुशी-खुशी अपना समर्थन पत्र लिखा था। टीवीके का कहना था कि दिनाकरन सच छिपा रहे हैं।
AMMK ने पहले क्या कहा था?
दिनाकरन ने पहले भी साफ कर दिया था कि उनका पार्टी एनडीए और AIADMK गठबंधन के साथ है। वे एडप्पडी के पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा मानते हैं। कामराज का टीवीके की तरफ जाना इस स्टैंड के बिल्कुल उलट था।
बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। बहुमत के लिए 118 चाहिए, इसलिए विजय छोटे दलों और निर्दलियों का समर्थन जुटा रहे हैं।
कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआई(एम) पहले ही टीवीके को समर्थन दे चुके हैं। अब कामराज का साथ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दिनाकरन के कड़े कदम ने सब गड़बड़ कर दिया।


