दरभंगा के तारडीह प्रखंड क्षेत्र के नदियामी में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ इन दिनों आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। कथा वाचिका जया किशोरी की श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़रही है। कथा की शुरुआत भगवान की आरती से हुई। सात दिवसीय कथा के दूसरे दिन बुधवार को राम राज्य की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल एक आदर्श शासन नहीं, बल्कि ऐसा समाज है जहां धर्म, न्याय और प्रेम का वास होता है।लक्ष्मण की सेवा भावना, भरत के त्याग और भ्रातृ प्रेम और माता कौशल्या के वात्सल्य को जीवन का आदर्श बताया। युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि भक्ति को केवल बुढ़ापे के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्र जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं, इसलिए युवावस्था से ही धर्म और संस्कारों को अपनाना आवश्यक है। प्रवचन के दौरान उन्होंने भजन ‘रघुकुल सा घराना हो’ प्रस्तुत किया, जिससे पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। रीति-रिवाज के साथ हवन और पूजन महायज्ञ परिसर में स्थापित21 फीट ऊंची बजरंगबली की भव्यप्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। महायज्ञ स्थल पर सुबह और शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वैदिक रीति-रिवाज के साथ हवन और पूजन जारी है, यज्ञमंडप की परिक्रमा के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। गांव के 11 मंदिरों में दुर्गासप्तशती का पाठ विधि-विधान से किया जा रहा है। दो मंदिरों में अखंड नवाह संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्ति की ध्वनि सेगूंज रहा है। दरभंगा के तारडीह प्रखंड क्षेत्र के नदियामी में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ इन दिनों आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। कथा वाचिका जया किशोरी की श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़रही है। कथा की शुरुआत भगवान की आरती से हुई। सात दिवसीय कथा के दूसरे दिन बुधवार को राम राज्य की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल एक आदर्श शासन नहीं, बल्कि ऐसा समाज है जहां धर्म, न्याय और प्रेम का वास होता है।लक्ष्मण की सेवा भावना, भरत के त्याग और भ्रातृ प्रेम और माता कौशल्या के वात्सल्य को जीवन का आदर्श बताया। युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि भक्ति को केवल बुढ़ापे के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्र जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं, इसलिए युवावस्था से ही धर्म और संस्कारों को अपनाना आवश्यक है। प्रवचन के दौरान उन्होंने भजन ‘रघुकुल सा घराना हो’ प्रस्तुत किया, जिससे पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। रीति-रिवाज के साथ हवन और पूजन महायज्ञ परिसर में स्थापित21 फीट ऊंची बजरंगबली की भव्यप्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। महायज्ञ स्थल पर सुबह और शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वैदिक रीति-रिवाज के साथ हवन और पूजन जारी है, यज्ञमंडप की परिक्रमा के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। गांव के 11 मंदिरों में दुर्गासप्तशती का पाठ विधि-विधान से किया जा रहा है। दो मंदिरों में अखंड नवाह संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्ति की ध्वनि सेगूंज रहा है।


