सहरसा में लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों ने बकाया मजदूरी के भुगतान और कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। फूड एंड एलाइड वर्क्स यूनियन तथा राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के बैनर तले मजदूरों ने 5 और 6 जून को दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल और प्रदर्शन किया। हड़ताल के बाद इंटक के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसएफसी (स्टेट फूड कॉरपोरेशन) के जिला प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया गया ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पटना उच्च न्यायालय ने मजदूरों के हित में सीडब्ल्यूजेसी संख्या 7038/2023 (फूड एंड एलाइड वर्क्स यूनियन बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 7 अगस्त 2025 को आदेश पारित किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर 18 फरवरी 2026 को ज्ञापांक-2776 भी जारी किया गया। हालांकि, इन आदेशों को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिससे मजदूरों में भारी नाराजगी है। सकारात्मक पहल न होने से आंदोलन को मजबूर इंटक जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल ने बताया कि इससे पहले भी 21 अप्रैल 2026 को राज्यव्यापी एक दिवसीय हड़ताल और प्रदर्शन के माध्यम से मजदूरों की समस्याओं को उठाया गया था। 13 मई और 26 मई 2026 को भी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर बकाया मजदूरी भुगतान और अन्य समस्याओं पर ध्यान आकर्षित कराया गया था। चौपाल के अनुसार, कोई सकारात्मक पहल न होने के कारण मजदूरों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। मजदूरों की प्रमुख मांगों में उच्च न्यायालय और विभागीय आदेशों के अनुरूप लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान, साथ ही कार्यस्थलों पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शामिल है। दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल-संघ संघ ने चेतावनी दी है कि यह दो दिवसीय हड़ताल केवल सांकेतिक थी। यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी मजदूर कामकाज पूरी तरह ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी समस्या की जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। इस प्रदर्शन में इंटक जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल और सुमित कुमार सहित बड़ी संख्या में लोडिंग-अनलोडिंग मजदूर मौजूद रहे। सहरसा में लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों ने बकाया मजदूरी के भुगतान और कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। फूड एंड एलाइड वर्क्स यूनियन तथा राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के बैनर तले मजदूरों ने 5 और 6 जून को दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल और प्रदर्शन किया। हड़ताल के बाद इंटक के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसएफसी (स्टेट फूड कॉरपोरेशन) के जिला प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया गया ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पटना उच्च न्यायालय ने मजदूरों के हित में सीडब्ल्यूजेसी संख्या 7038/2023 (फूड एंड एलाइड वर्क्स यूनियन बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 7 अगस्त 2025 को आदेश पारित किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर 18 फरवरी 2026 को ज्ञापांक-2776 भी जारी किया गया। हालांकि, इन आदेशों को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिससे मजदूरों में भारी नाराजगी है। सकारात्मक पहल न होने से आंदोलन को मजबूर इंटक जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल ने बताया कि इससे पहले भी 21 अप्रैल 2026 को राज्यव्यापी एक दिवसीय हड़ताल और प्रदर्शन के माध्यम से मजदूरों की समस्याओं को उठाया गया था। 13 मई और 26 मई 2026 को भी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर बकाया मजदूरी भुगतान और अन्य समस्याओं पर ध्यान आकर्षित कराया गया था। चौपाल के अनुसार, कोई सकारात्मक पहल न होने के कारण मजदूरों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। मजदूरों की प्रमुख मांगों में उच्च न्यायालय और विभागीय आदेशों के अनुरूप लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान, साथ ही कार्यस्थलों पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शामिल है। दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल-संघ संघ ने चेतावनी दी है कि यह दो दिवसीय हड़ताल केवल सांकेतिक थी। यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी मजदूर कामकाज पूरी तरह ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी समस्या की जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। इस प्रदर्शन में इंटक जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौपाल और सुमित कुमार सहित बड़ी संख्या में लोडिंग-अनलोडिंग मजदूर मौजूद रहे।


