औरंगाबाद में वन विभाग की ओर से गारलैंड ट्रेंचिंग योजना के तहत गया बांध बना है। इसका निर्माण कुटुंबा प्रखंड की डुमरी पंचायत अंतर्गत जौड़ा गांव के पास सहसुआ पहाड़ी की तलहटी में किया गया। ये महज दो साल में क्षतिग्रस्त होकर टूट गया है। साल 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पहाड़ों से बहकर आने वाले बारिश का पानी का संचयन कर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और वन्यजीवों के लिए स्थायी जल स्रोत तैयार करना था। लेकिन बांध टूट जाने के कारण अब बारिश का पानी बिना रुके बह जा रहा है और जलाशय में पानी जमा नहीं हो पा रहा है। 50 लाख की योजना दो साल में ध्वस्त, किसानों में नाराजगी स्थानीय पैक्स अध्यक्ष अभिजीत कुमार सिंह ने बताया कि बांध टूटने के बाद पूरी योजना बेकार साबित हो रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है और गर्मी के दिनों में जंगली जानवर भी पानी की तलाश में गांवों की ओर भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस योजना में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण यह दो साल भी नहीं टिक सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण काम में अनियमितता बरती गई और सरकारी राशि की बंदरबांट की गई। महसु गांव निवासी नीरज कुमार ने कहा कि यदि निर्माण मानकों के अनुरूप काम हुआ होता, तो बांध इतनी जल्दी नहीं टूटता। उन्होंने मामले की तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का उद्देश्य सराहनीय था, लेकिन खराब निर्माण के कारण इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका। वन विभाग को जानकारी भी नहीं मिली संबंध में जानकारी लेने के लिए जब महाराजगंज वन प्रमंडल के आरएफओ अविनाश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कब टूटी है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अब जानकारी मिली है तो वरीय अधिकारियों से बातचीत कर योजना को दुरुस्त कराया जाएगा। ताकि, वन्य प्राणियों और किसानों को इसका फायदा फिर से मिल सके। किसानों और वन्यजीवों के लिए वरदान बनने वाली थी योजना वन विभाग की ओर से तैयार की गई गारलैंड ट्रेंचिंग योजना के तहत सहसुआ पहाड़ी की तलहटी में मिट्टी और बोल्डर से माला के आकार में घेराबंदी कर जल संचयन की व्यवस्था की गई थी। महाराजगंज वन प्रक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर मनोज कुमार मिश्रा ने योजना शुरू होने के समय बताया था कि तीन ओर से पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र में एक ओर बांध बनाकर बारिश के पानी को रोका जाएगा। लगभग 110 मीटर लंबे बांध का निर्माण किया गया था और करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्र को इसका कैचमेंट एरिया बनाया गया था। योजना के तहत पानी निकासी के लिए फाटक और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पईन निर्माण की भी व्यवस्था की जानी थी। इस परियोजना से जौड़ा, भलुआड़ी, महसु, करमडीह, बरवाडीह समेत दर्जनों गांवों के किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद थी। अनुमान था कि संचयित जल से लगभग 150 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसके अलावा डुमरी पंचायत में हर बारिश-गर्मी के दौरान उत्पन्न होने वाले पेयजल संकट को भी दूर करने की योजना थी। वन्यजीवों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना था लक्ष्य जल संचयन होने से भूगर्भ जल स्तर बनाए रखने में मदद मिलती और चापाकल-कुएं सूखने की समस्या कम होती। वन विभाग का दावा था कि इससे ग्रामीणों के साथ-साथ वन्यजीवों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। जानिए क्या है गारलैंड ट्रेंचिंग गारलैंड ट्रेंचिंग पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में जल संरक्षण की एक महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है। इसमें पहाड़ों से निकलने वाले पानी के मार्ग पर ट्रेंच या पईन जैसी संरचना बनाकर बारिश के पानी को रोका जाता है। बाद में इस पानी को जलाशयों में संग्रहित किया जाता है या सिंचाई के लिए खेतों तक पहुंचाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक भूगर्भ जल स्तर बनाए रखने, मिट्टी संरक्षण और सूखे की समस्या से निपटने में काफी प्रभावी है। औरंगाबाद के कुटुंबा के अलावा मदनपुर और देव प्रखंड में भी इसी योजना के तहत कई काम कराए गए हैं। इसका उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था मजबूत करना है। लेकिन जौड़ा क्षेत्र में बांध टूट जाने से योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच और मरम्मत की मांग तेज ग्रामीणों का कहना है कि बांध के क्षतिग्रस्त होने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है और वन क्षेत्र में प्राकृतिक जल स्रोतों के अभाव में जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षतिग्रस्त बांध की शीघ्र मरम्मत, निर्माण काम की तकनीकी जांच और दोषी अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई योजना पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी। औरंगाबाद में वन विभाग की ओर से गारलैंड ट्रेंचिंग योजना के तहत गया बांध बना है। इसका निर्माण कुटुंबा प्रखंड की डुमरी पंचायत अंतर्गत जौड़ा गांव के पास सहसुआ पहाड़ी की तलहटी में किया गया। ये महज दो साल में क्षतिग्रस्त होकर टूट गया है। साल 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पहाड़ों से बहकर आने वाले बारिश का पानी का संचयन कर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और वन्यजीवों के लिए स्थायी जल स्रोत तैयार करना था। लेकिन बांध टूट जाने के कारण अब बारिश का पानी बिना रुके बह जा रहा है और जलाशय में पानी जमा नहीं हो पा रहा है। 50 लाख की योजना दो साल में ध्वस्त, किसानों में नाराजगी स्थानीय पैक्स अध्यक्ष अभिजीत कुमार सिंह ने बताया कि बांध टूटने के बाद पूरी योजना बेकार साबित हो रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है और गर्मी के दिनों में जंगली जानवर भी पानी की तलाश में गांवों की ओर भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस योजना में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण यह दो साल भी नहीं टिक सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण काम में अनियमितता बरती गई और सरकारी राशि की बंदरबांट की गई। महसु गांव निवासी नीरज कुमार ने कहा कि यदि निर्माण मानकों के अनुरूप काम हुआ होता, तो बांध इतनी जल्दी नहीं टूटता। उन्होंने मामले की तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का उद्देश्य सराहनीय था, लेकिन खराब निर्माण के कारण इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका। वन विभाग को जानकारी भी नहीं मिली संबंध में जानकारी लेने के लिए जब महाराजगंज वन प्रमंडल के आरएफओ अविनाश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कब टूटी है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अब जानकारी मिली है तो वरीय अधिकारियों से बातचीत कर योजना को दुरुस्त कराया जाएगा। ताकि, वन्य प्राणियों और किसानों को इसका फायदा फिर से मिल सके। किसानों और वन्यजीवों के लिए वरदान बनने वाली थी योजना वन विभाग की ओर से तैयार की गई गारलैंड ट्रेंचिंग योजना के तहत सहसुआ पहाड़ी की तलहटी में मिट्टी और बोल्डर से माला के आकार में घेराबंदी कर जल संचयन की व्यवस्था की गई थी। महाराजगंज वन प्रक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर मनोज कुमार मिश्रा ने योजना शुरू होने के समय बताया था कि तीन ओर से पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र में एक ओर बांध बनाकर बारिश के पानी को रोका जाएगा। लगभग 110 मीटर लंबे बांध का निर्माण किया गया था और करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्र को इसका कैचमेंट एरिया बनाया गया था। योजना के तहत पानी निकासी के लिए फाटक और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पईन निर्माण की भी व्यवस्था की जानी थी। इस परियोजना से जौड़ा, भलुआड़ी, महसु, करमडीह, बरवाडीह समेत दर्जनों गांवों के किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद थी। अनुमान था कि संचयित जल से लगभग 150 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसके अलावा डुमरी पंचायत में हर बारिश-गर्मी के दौरान उत्पन्न होने वाले पेयजल संकट को भी दूर करने की योजना थी। वन्यजीवों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना था लक्ष्य जल संचयन होने से भूगर्भ जल स्तर बनाए रखने में मदद मिलती और चापाकल-कुएं सूखने की समस्या कम होती। वन विभाग का दावा था कि इससे ग्रामीणों के साथ-साथ वन्यजीवों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। जानिए क्या है गारलैंड ट्रेंचिंग गारलैंड ट्रेंचिंग पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में जल संरक्षण की एक महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है। इसमें पहाड़ों से निकलने वाले पानी के मार्ग पर ट्रेंच या पईन जैसी संरचना बनाकर बारिश के पानी को रोका जाता है। बाद में इस पानी को जलाशयों में संग्रहित किया जाता है या सिंचाई के लिए खेतों तक पहुंचाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक भूगर्भ जल स्तर बनाए रखने, मिट्टी संरक्षण और सूखे की समस्या से निपटने में काफी प्रभावी है। औरंगाबाद के कुटुंबा के अलावा मदनपुर और देव प्रखंड में भी इसी योजना के तहत कई काम कराए गए हैं। इसका उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था मजबूत करना है। लेकिन जौड़ा क्षेत्र में बांध टूट जाने से योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच और मरम्मत की मांग तेज ग्रामीणों का कहना है कि बांध के क्षतिग्रस्त होने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है और वन क्षेत्र में प्राकृतिक जल स्रोतों के अभाव में जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षतिग्रस्त बांध की शीघ्र मरम्मत, निर्माण काम की तकनीकी जांच और दोषी अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई योजना पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी।


