अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने‎ बैंकों की चिंता बढ़ा दी है। ठगी के मामलों में ‎तेजी आने के बाद कुछ बैंक अब तकनीक के‎ साथ मनोवैज्ञानिक तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। अमेरिका के सबसे बड़े बैंक जेपी मोर्गन ने‎इसी उद्देश्य से व्यवहार साइंटिस्ट की नियुक्ति ‎की है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के‎ इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के अनुसार 2025‎ में साइबर अपराधों से लोगों को 2 लाख करोड़ ‎रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। यह 2024‎ की तुलना में 25% ज्यादा और 2020 के 42‎ हजार करोड़ रुपए से करीब चार गुना है।‎ जेपी मॉर्गन ने दो वर्ष पहले व्यवहार साइंटिस्ट‎ एलिजाबेथ हपर्ट को नियुक्त किया था। उनका‎ काम कॉल सेंटर और बैंक शाखाओं के‎ कर्मचारियों को यह समझाना है कि ठग किस ‎तरह लोगों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें बैंक ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎की सलाह पर संदेह करने के लिए तैयार करते ‎हैं। कई मामलों में ठग महीनों तक अपने शिकार‎ से संपर्क बनाए रखते हैं और फिर उनसे खुद ही ‎पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। बैंक अब संदिग्ध‎ मामलों में ग्राहकों से सीधे संपर्क कर रहे हैं।‎ स्कैम विशेषज्ञ सवाल पूछकर और संदेह के‎ आधार पर ग्राहकों को ठगी के जाल से बाहर‎ निकालने की कोशिश करते हैं। बैंक पासवर्ड दर्ज‎ करते समय असामान्य रुकावट, हिचकिचाहट या ‎किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्क्रीन साझा करना‎ संभावित धोखाधड़ी के संकेत मान रहे हैं।‎

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