भागलपुर शहर की सड़कों के किनारे खड़े सूखे, रोगग्रस्त और झुके हुए पेड़ों से लोगों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है। रविवार को वन प्रमंडल की ओर से वनों के क्षेत्र पदाधिकारी कुमार गौतम के नेतृत्व में शहरी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऐसे पेड़ों और उनकी खतरनाक टहनियों को हटाने का काम कराया गया, जो कभी भी गिरकर जानमाल की क्षति का कारण बन सकते थे। वन विभाग की टीम ने तिलकामांझी चौक से कचहरी चौक के बीच सड़क किनारे मौजूद सूखे, रोगग्रस्त और झुके हुए पेड़ों व उनकी शाखाओं को चिह्नित कर उनकी कटाई और छंटाई कराई। इसके अलावा शहर के अन्य कई स्थानों पर भी ऐसे पेड़ों की पहचान की गई है। खतरा बने पेड़ों को हटाया जाएगा DFO गौतम कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में इन स्थानों पर भी अभियान चलाकर लोगों के लिए खतरा बने पेड़ों को हटाया जाएगा, ताकि आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो और दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके। इस काम में नगर निगम ने भी मदद किया। बता दें कि दैनिक भास्कर ने दो दिन पहले प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर चेतावनी दी थी कि सड़क किनारे खड़े कई सूखे और जर्जर पेड़ “पेड़ नहीं, बल्कि मौत के खंभे” बन चुके हैं। खबर में इन पेड़ों से संभावित हादसों की आशंका जताई गई थी। इसके बाद वन विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए सर्वेक्षण कराया और अभियान शुरू किया। DFO गौतम ने बताया कि सभी सूखे पेड़ अनुपयोगी नहीं होते। कई सूखे वृक्ष ‘स्टैग ट्री’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें कठफोड़वा जैसे कीटभक्षी पक्षी आश्रय लेते हैं, जिनकी संख्या लगातार घट रही है। इसलिए केवल उन्हीं पेड़ों को हटाया जा रहा है, जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं। शहरवासियों से अपील की है कि आंधी-पानी और तेज हवा की चेतावनी पर विशेष ध्यान दें। सूखे और कमजोर पेड़ों से दूरी बनाए रखें। अभियान में वन परिसर पदाधिकारी दिनेश कुमार सिंह, वनरक्षी अमरेश कुमार, नीरज कुमार, आदित्य अभिनव, आदित्य कुमार सिंह तथा वनकर्मी मो. नूर खान, अनमोल, विकास और भरत समेत अन्य कर्मी शामिल रहे। भागलपुर शहर की सड़कों के किनारे खड़े सूखे, रोगग्रस्त और झुके हुए पेड़ों से लोगों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है। रविवार को वन प्रमंडल की ओर से वनों के क्षेत्र पदाधिकारी कुमार गौतम के नेतृत्व में शहरी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऐसे पेड़ों और उनकी खतरनाक टहनियों को हटाने का काम कराया गया, जो कभी भी गिरकर जानमाल की क्षति का कारण बन सकते थे। वन विभाग की टीम ने तिलकामांझी चौक से कचहरी चौक के बीच सड़क किनारे मौजूद सूखे, रोगग्रस्त और झुके हुए पेड़ों व उनकी शाखाओं को चिह्नित कर उनकी कटाई और छंटाई कराई। इसके अलावा शहर के अन्य कई स्थानों पर भी ऐसे पेड़ों की पहचान की गई है। खतरा बने पेड़ों को हटाया जाएगा DFO गौतम कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में इन स्थानों पर भी अभियान चलाकर लोगों के लिए खतरा बने पेड़ों को हटाया जाएगा, ताकि आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो और दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके। इस काम में नगर निगम ने भी मदद किया। बता दें कि दैनिक भास्कर ने दो दिन पहले प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर चेतावनी दी थी कि सड़क किनारे खड़े कई सूखे और जर्जर पेड़ “पेड़ नहीं, बल्कि मौत के खंभे” बन चुके हैं। खबर में इन पेड़ों से संभावित हादसों की आशंका जताई गई थी। इसके बाद वन विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए सर्वेक्षण कराया और अभियान शुरू किया। DFO गौतम ने बताया कि सभी सूखे पेड़ अनुपयोगी नहीं होते। कई सूखे वृक्ष ‘स्टैग ट्री’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें कठफोड़वा जैसे कीटभक्षी पक्षी आश्रय लेते हैं, जिनकी संख्या लगातार घट रही है। इसलिए केवल उन्हीं पेड़ों को हटाया जा रहा है, जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं। शहरवासियों से अपील की है कि आंधी-पानी और तेज हवा की चेतावनी पर विशेष ध्यान दें। सूखे और कमजोर पेड़ों से दूरी बनाए रखें। अभियान में वन परिसर पदाधिकारी दिनेश कुमार सिंह, वनरक्षी अमरेश कुमार, नीरज कुमार, आदित्य अभिनव, आदित्य कुमार सिंह तथा वनकर्मी मो. नूर खान, अनमोल, विकास और भरत समेत अन्य कर्मी शामिल रहे।


