बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) योजना इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रही है। पिछले छह से सात महीनों से प्रशिक्षण और भुगतान प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे राज्यभर के कई केंद्र बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। विभागीय उदासीनता और लगातार बदलते नियमों के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। मंगलवार को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 100 से अधिक KYP केंद्र संचालकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। संचालकों ने बताया कि पिछले छह माह से प्रशिक्षण और भुगतान बाधित है, जबकि पिछले दो माह से नवीनीकरण के नाम पर नए नामांकन भी रोक दिए गए हैं। इस स्थिति के कारण कई केंद्र आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बंद होने की कगार पर हैं। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में 25 लाख युवा प्रशिक्षित संचालकों ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत वर्ष 2015 में शुरू किया गया कुशल युवा कार्यक्रम बिहार के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन का एक प्रमुख माध्यम रहा है। इस योजना के तहत अब तक 25 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और यह राज्य के 534 प्रखंडों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 हजार लोगों को रोजगार मिला है, और एक लाख से अधिक परिवारों की आजीविका इस योजना पर निर्भर करती है। केंद्र संचालकों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में हुए प्रशासनिक बदलावों ने पूरी व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। ऑटो-रिन्यूअल पर रोक, भुगतान में देरी, नामांकन प्रक्रिया में जटिलता और प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं मिलने जैसी समस्याओं ने योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया है। राज्य सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया बैठक में कहा गया कि हाल ही में राज्य सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया और बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) को भी इस विभाग के अधीन लाया गया। लेकिन संचालकों का आरोप है कि योजनाओं को मजबूत करने के बजाय ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिला प्रतिनिधिमंडल इसी मुद्दे को लेकर 24 मई को KYP संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें योजना की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। संचालकों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के युवाओं के हित में इस योजना का सुचारु संचालन बेहद जरूरी है और इसे प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें संचालकों ने सरकार के समक्ष कई अहम मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि BSDM GB-15 दिनांक 25 मार्च 2021 के प्रावधानों के अनुसार KYP केंद्रों का ऑटो-रिन्यूअल तत्काल बहाल किया जाए और 40 प्रतिशत से कम इनटेक वाले केंद्रों के नवीनीकरण पर लगी रोक हटाई जाए। इसके अलावा BELTRON और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा KYP प्रमाणपत्र को IT एवं डेटा एंट्री पदों के लिए मान्यता देने, संशोधित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के अनुसार प्रशिक्षण दरें लागू करने और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित जारी करने की मांग भी की गई।
AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए कोर्स जोड़ने की मांग संचालकों ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में KYP को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने AI, साइबर सिक्योरिटी, डेटा माइनिंग और IoT जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों को योजना में शामिल करने की मांग की, ताकि बिहार के युवाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।
सात निश्चय-3 में नहीं मिली जगह कुशल युवा कार्यक्रम के संचालक ज्ञानेंद्र शरण ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को अब नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय योजना-3 में KYP को जगह नहीं दी गई, जिससे लाखों परिवार बेरोजगारी के संकट के सामने खड़े हैं।
उन्होंने दावा किया कि योजना के तहत 30 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था, जिसमें करीब 20 लाख का लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि 10 लाख का लक्ष्य अभी बाकी है।
समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो खत्म हो सकती है योजना संचालकों ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो बिहार की यह महत्वपूर्ण कौशल विकास योजना धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ सकती है। वहीं, यदि इसे नई तकनीकों और व्यावहारिक नीतियों के साथ मजबूत किया गया तो KYP वर्ष 2025-30 के दौरान राज्य की सबसे प्रभावी रोजगारपरक योजनाओं में शामिल हो सकती है। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) योजना इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रही है। पिछले छह से सात महीनों से प्रशिक्षण और भुगतान प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे राज्यभर के कई केंद्र बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। विभागीय उदासीनता और लगातार बदलते नियमों के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। मंगलवार को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 100 से अधिक KYP केंद्र संचालकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। संचालकों ने बताया कि पिछले छह माह से प्रशिक्षण और भुगतान बाधित है, जबकि पिछले दो माह से नवीनीकरण के नाम पर नए नामांकन भी रोक दिए गए हैं। इस स्थिति के कारण कई केंद्र आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बंद होने की कगार पर हैं। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में 25 लाख युवा प्रशिक्षित संचालकों ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत वर्ष 2015 में शुरू किया गया कुशल युवा कार्यक्रम बिहार के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन का एक प्रमुख माध्यम रहा है। इस योजना के तहत अब तक 25 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और यह राज्य के 534 प्रखंडों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 हजार लोगों को रोजगार मिला है, और एक लाख से अधिक परिवारों की आजीविका इस योजना पर निर्भर करती है। केंद्र संचालकों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में हुए प्रशासनिक बदलावों ने पूरी व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। ऑटो-रिन्यूअल पर रोक, भुगतान में देरी, नामांकन प्रक्रिया में जटिलता और प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं मिलने जैसी समस्याओं ने योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया है। राज्य सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया बैठक में कहा गया कि हाल ही में राज्य सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया और बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) को भी इस विभाग के अधीन लाया गया। लेकिन संचालकों का आरोप है कि योजनाओं को मजबूत करने के बजाय ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिला प्रतिनिधिमंडल इसी मुद्दे को लेकर 24 मई को KYP संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें योजना की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। संचालकों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के युवाओं के हित में इस योजना का सुचारु संचालन बेहद जरूरी है और इसे प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें संचालकों ने सरकार के समक्ष कई अहम मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि BSDM GB-15 दिनांक 25 मार्च 2021 के प्रावधानों के अनुसार KYP केंद्रों का ऑटो-रिन्यूअल तत्काल बहाल किया जाए और 40 प्रतिशत से कम इनटेक वाले केंद्रों के नवीनीकरण पर लगी रोक हटाई जाए। इसके अलावा BELTRON और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा KYP प्रमाणपत्र को IT एवं डेटा एंट्री पदों के लिए मान्यता देने, संशोधित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के अनुसार प्रशिक्षण दरें लागू करने और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित जारी करने की मांग भी की गई।
AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए कोर्स जोड़ने की मांग संचालकों ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में KYP को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने AI, साइबर सिक्योरिटी, डेटा माइनिंग और IoT जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों को योजना में शामिल करने की मांग की, ताकि बिहार के युवाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।
सात निश्चय-3 में नहीं मिली जगह कुशल युवा कार्यक्रम के संचालक ज्ञानेंद्र शरण ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को अब नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय योजना-3 में KYP को जगह नहीं दी गई, जिससे लाखों परिवार बेरोजगारी के संकट के सामने खड़े हैं।
उन्होंने दावा किया कि योजना के तहत 30 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था, जिसमें करीब 20 लाख का लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि 10 लाख का लक्ष्य अभी बाकी है।
समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो खत्म हो सकती है योजना संचालकों ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो बिहार की यह महत्वपूर्ण कौशल विकास योजना धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ सकती है। वहीं, यदि इसे नई तकनीकों और व्यावहारिक नीतियों के साथ मजबूत किया गया तो KYP वर्ष 2025-30 के दौरान राज्य की सबसे प्रभावी रोजगारपरक योजनाओं में शामिल हो सकती है।


