देवरिया में गैंगस्टर तारबाबू के चचेरे भाई और उसके गिरोह के सदस्य हृदयानंद यादव की लगभग 2.10 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्ति को लेकर अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गैंगस्टर कोर्ट ने हृदयानंद की कुर्क की गई संपत्ति को यथावत रखने का आदेश दिया है, साथ ही उसकी अपील खारिज कर दी है। बनकटा थाना क्षेत्र के रुस्तम बहियारी गांव निवासी तारबाबू के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और गैंगस्टर सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। हाल ही में प्रशासन ने उसकी लगभग 6.50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की थी। तारबाबू का चचेरा भाई हृदयानंद यादव पुत्र उमाशंकर यादव भी उसके आपराधिक गिरोह का सक्रिय सदस्य था। जांच में यह सामने आया था कि उसने भी कथित तौर पर गैंगस्टर गतिविधियों के माध्यम से बड़ी संपत्ति अर्जित की थी। इस संबंध में बनकटा पुलिस ने एक रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर के आदेश पर 11 सितंबर 2020 को हृदयानंद यादव की संपत्तियां कुर्क की गई थीं। इस कार्रवाई के तहत सलेमपुर क्षेत्र के पिपरा मोहन स्थित मकान, गांव की भूमि और अन्य संपत्तियों को जब्त कर तहसील प्रशासन को सौंप दिया गया था। इसके बाद हृदयानंद यादव ने गैंगस्टर कोर्ट में कुर्की की कार्रवाई को निरस्त करने के लिए याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट एफटीसी-2 जगन्नाथ की अदालत में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया। इसके बाद आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कुर्क की गई संपत्तियों पर प्रशासन का कब्जा बरकरार रखने का आदेश दिया। विशेष लोक अभियोजक वाचस्पति मिश्र ने बताया कि अदालत ने गैंगस्टर के आरोपी की अपील खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद लगभग 2.10 करोड़ रुपये मूल्य की कुर्क की गई संपत्ति की स्थिति यथावत बनी रहेगी।


