फर्जी डिग्री मामले में फरार चल रहे 25 हजार के इनामी इम्फाल की एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के काउंसलर मयंक भारद्वाज को गाजियाबाद के लोनी से गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार के उसे जेल भेज दिया गया। कानपुर में फरवरी माह में फर्जी डिग्री माफिया नेटवर्क के खुलासे के बाद मयंक का नाम सामने आया था। पुलिस ने उसके मोबाइल से सात डिग्री और प्रमाण पत्र बरामद किए हैं। सरगना शैलेंद्र ओझा ने कराया था 105 लोगों का दाखिला पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मयंक भारद्वाज का नाम फर्जी डिग्री के मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा से पूछताछ में सामने आया था। मयंक इम्फाल की एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का काउंसलर है। यह यूनिविर्सटी चार मंजिला इमारत में संचालित हो रही है। 14 यूनिवर्सिटी की 900 डिग्रियों में एशिन की 280 मार्कशीट मिली थीं। सत्यापन के लिए डिग्रियां भेजी गईं तो यूनिवर्सिटी ने सभी के फर्जी होने की रिपोर्ट दी थी। पूछताछ में पता चला है कि यूनिवर्सिटी यूजीसी से संबद्ध है। इसके लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेज दिया गया है।पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शैलेंद्र आरोपी मयंक के माध्यम से दाखिले कराता था। जांच में सामने आया है कि शैलेंद्र ने 105 लोगों का दाखिला कराया है। ऊंची कीमत पर इन लोगों को डिग्रियां मुहैया कराई गईं। शिकोहाबाद का सचिन छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग करता था, जबकि कर्नाटक का पंकज, गुजरात का मोहित शर्मा और जमशेदपुर का जयनारायण यादव का काम छात्र मुहैया कराना था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब तक इस मामले में यह 10वीं गिरफ्तारी है। आरोपी को जेल भेज दिया गया है। यूनिविर्सटी की संबद्धता शक के घेरे में एडीसीपी साउथ योगेश कुमार ने बताया कि यूनिविर्सटी की संबद्धता शक के घेरे में है। आरोपी मयंक ने एशियन यूनिविर्सिटी के यूजीसी से संबद्ध होने का दावा किया लेकिन पुलिस की जांच इससे इतर है। बहरहाल शिक्षा विभाग को पत्र भेज दिया गया है। सोशल मीडिया से हुआ था संपर्क एडीसीपी साउथ ने बताया कि शैलेंद्र और मयंक की जान पहचान सोशल मीडिया के जरिये वर्ष 2023 में हुआ था। शैलेंद्र और मयंक के बीच पुलिस को डिजिटल और बैकिंग कनेक्शन मिला है। मयंक के खाते में पुलिस को 58 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है। यह ट्रांजेक्शन पिछले तीन साल के दौरान का है। कई राज्यों में है गैंग का नेटवर्क एडीसीपी ने बताया कि गैंग बिना परीक्षा पास कराए हाईस्कूल से लेकर बीटेक, एलएलबी, डी-फार्मा और बी-फार्मा समेत तमाम शैक्षणिक और प्रोफेशनल डिग्रियां 50 हजार से ढाई लाख रुपये में मुहैया कराता था। इस गैंग का नेटवर्क देश के तमाम राज्यों दिल्ली, मणिपुर, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश, सिक्किम, छत्तीसगढ़ तक फैला है। गैंग का सरगना शैलेंद्र वर्ष 2012 से यह काम कर रहा है। अब तक यह लोग जा चुके जेल एडीसीपी के मुताबिक इस मामले में मयंकी अब तक 10वी गिरफ्तारी है। इस मामले में शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेंद्र मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह, विनीत कुमार, मो. अजरूद्दीन, मनीष कुमार उर्फ रवि, अर्जुन यादव और राघव सर्राफ को जेल भेजा जा चुका है।


