भागलपुर में बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर 2 दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। धरने के दौरान महासंघ के प्रक्षेत्रीय पदाधिकारी शंकराचार्य उपाध्याय ने कर्मचारियों की समस्याओं को रखते हुए प्रशासन पर आरोप लगाए। शंकराचार्य उपाध्याय ने कहा, “महासंघ के आह्वान पर हमलोग अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना पर बैठे हैं। सबसे बड़ी समस्या कोषांग से मिलने वाले वेतन में कटौती की है। बिना किसी स्पष्ट कारण के कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी गई है, जिसे हम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि इस कटौती को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों से लंबित है कहा, “कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों से लंबित है। चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में और तृतीय वर्गीय कर्मचारियों को उच्च पदों पर पदोन्नति नहीं दी जा रही है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है। हम चाहते हैं कि समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाए।” स्थानांतरण के मुद्दे पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से कर्मचारियों का दूसरे विश्वविद्यालयों में स्थानांतरण किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ रहा है। स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए।”
मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज होगा बताया कि वेतनमान को लेकर उन्होंने सरकार के पत्र संख्या 3972 का हवाला देते हुए कहा, इस पत्र के अनुसार चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को उचित वेतनमान मिलना चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। धरना के कारण विश्वविद्यालय परिसर में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित रहा।। भागलपुर में बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर 2 दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। धरने के दौरान महासंघ के प्रक्षेत्रीय पदाधिकारी शंकराचार्य उपाध्याय ने कर्मचारियों की समस्याओं को रखते हुए प्रशासन पर आरोप लगाए। शंकराचार्य उपाध्याय ने कहा, “महासंघ के आह्वान पर हमलोग अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना पर बैठे हैं। सबसे बड़ी समस्या कोषांग से मिलने वाले वेतन में कटौती की है। बिना किसी स्पष्ट कारण के कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी गई है, जिसे हम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि इस कटौती को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों से लंबित है कहा, “कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों से लंबित है। चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में और तृतीय वर्गीय कर्मचारियों को उच्च पदों पर पदोन्नति नहीं दी जा रही है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है। हम चाहते हैं कि समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाए।” स्थानांतरण के मुद्दे पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से कर्मचारियों का दूसरे विश्वविद्यालयों में स्थानांतरण किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ रहा है। स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए।”
मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज होगा बताया कि वेतनमान को लेकर उन्होंने सरकार के पत्र संख्या 3972 का हवाला देते हुए कहा, इस पत्र के अनुसार चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को उचित वेतनमान मिलना चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। धरना के कारण विश्वविद्यालय परिसर में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित रहा।।


