मधुमेह व बीपी की दवा खाने वाले हीट स्ट्रोक के प्रति रहें सतर्क : सिविल सर्जन

हेल्थ रिपोर्टर|मधुबनी जिला में तापमान में लगातार तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही गर्म हवा व चिलचिलाती धूप का प्रभाव काफी है। ऐसे में लू लगने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। हीटस्ट्रोक या लू से बचने के लिए सर्तकता व जानकारी जरूरी है। खानपान सहित धूप में बाहर जाने के दौरान सावधानियां बरतें ताकि कोई अनहोनी नहीं हो। सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि शरीर में पानी की कमी इसका मुख्य कारण है। इसके अलावा गर्म हवा और धूप में लगातार काम करने या बाहर निकलने आदि से भी लू लगता है। अधिकतर हीट स्ट्रोक के मामलों उन लोगों के साथ देखा गया है जो बिना तरल पदार्थ लिये या खाली पेट बहुत अधिक देर तक गर्म व तेज धूप में रहते हैं। शिशुओं, छोटे बच्चों व बुजुर्गों सहित गर्भवती महिलाओं के लिए विशेषतौर पर सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। इसके अलावा मधुमेह, मानसिक बीमारी, ब्लड प्रेशर की दवा का सेवन करने वालों के प्रति भी हीट स्ट्रोक को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉ रौशन कुमार व डॉ विनय कुमार ने बताया कि लू लगने से बचने के सर्तकता व जानकारी जरूरी है। सुबह 11 बजे से 3 बजे तक घर से बिल्कूल बाहर नहीं निकलें। यदि बाहर निकलना बहुत जरूरी हो तो पूरी तैयारी के साथ निकलें ताकि हीटस्ट्रोक से बचा जा सके। साथ इन्होंने ने बचाव को लेकर मेडिकल सलाह भी दिया है। डॉ एसएन झा ने कहा कि हीटस्ट्रोक का असर होने पर व्यक्ति को बुखार आ जाता है। इसके साथ ही उल्टी व दस्त की शिकायत होती है। ऐसे में मरीज का बुखार कम करने के लिए तुरंत पारासिटामोल दवा व उल्टी व दस्त होने पर नमक, चीनी व पानी या ओआरएस का घोल देना चाहिए। लू से पीड़ित व्यक्ति को ठंडे पानी से नहलायें, व्यक्ति के शरीर पर पानी से भिगोकर कपड़ा लपेट दें, अधिक से अधिक बार पानी व ओआरएस पिलायें, आवश्यक पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें, बेल या नींबू का शर्बत लाभकारी है, कच्चे आम का शर्बत बना कर पियें, पानी में नींबू और नमक मिलाकर पियें, पानी में ग्लूकोज मिलाकर पीते रहें, कच्चे आम के लेप से तलवों की मालिश करत रहें। हेल्थ रिपोर्टर|मधुबनी जिला में तापमान में लगातार तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही गर्म हवा व चिलचिलाती धूप का प्रभाव काफी है। ऐसे में लू लगने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। हीटस्ट्रोक या लू से बचने के लिए सर्तकता व जानकारी जरूरी है। खानपान सहित धूप में बाहर जाने के दौरान सावधानियां बरतें ताकि कोई अनहोनी नहीं हो। सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि शरीर में पानी की कमी इसका मुख्य कारण है। इसके अलावा गर्म हवा और धूप में लगातार काम करने या बाहर निकलने आदि से भी लू लगता है। अधिकतर हीट स्ट्रोक के मामलों उन लोगों के साथ देखा गया है जो बिना तरल पदार्थ लिये या खाली पेट बहुत अधिक देर तक गर्म व तेज धूप में रहते हैं। शिशुओं, छोटे बच्चों व बुजुर्गों सहित गर्भवती महिलाओं के लिए विशेषतौर पर सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। इसके अलावा मधुमेह, मानसिक बीमारी, ब्लड प्रेशर की दवा का सेवन करने वालों के प्रति भी हीट स्ट्रोक को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉ रौशन कुमार व डॉ विनय कुमार ने बताया कि लू लगने से बचने के सर्तकता व जानकारी जरूरी है। सुबह 11 बजे से 3 बजे तक घर से बिल्कूल बाहर नहीं निकलें। यदि बाहर निकलना बहुत जरूरी हो तो पूरी तैयारी के साथ निकलें ताकि हीटस्ट्रोक से बचा जा सके। साथ इन्होंने ने बचाव को लेकर मेडिकल सलाह भी दिया है। डॉ एसएन झा ने कहा कि हीटस्ट्रोक का असर होने पर व्यक्ति को बुखार आ जाता है। इसके साथ ही उल्टी व दस्त की शिकायत होती है। ऐसे में मरीज का बुखार कम करने के लिए तुरंत पारासिटामोल दवा व उल्टी व दस्त होने पर नमक, चीनी व पानी या ओआरएस का घोल देना चाहिए। लू से पीड़ित व्यक्ति को ठंडे पानी से नहलायें, व्यक्ति के शरीर पर पानी से भिगोकर कपड़ा लपेट दें, अधिक से अधिक बार पानी व ओआरएस पिलायें, आवश्यक पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें, बेल या नींबू का शर्बत लाभकारी है, कच्चे आम का शर्बत बना कर पियें, पानी में नींबू और नमक मिलाकर पियें, पानी में ग्लूकोज मिलाकर पीते रहें, कच्चे आम के लेप से तलवों की मालिश करत रहें।  

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