मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी क्षेत्र में कमी नहीं रहनी चाहिए। सीएम ने पीएचई विभाग के अफसरों से कहा कि केवल ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करनी होगी और तालाब-सरोवर निर्माण तथा जल रिचार्जिंग पर विशेष फोकस करना होगा। साथ ही केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के लिए 5000 करोड़ रुपए की राशि मिलने जा रही है। जिससे मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। जल जीवन मिशन की प्रगति प्रदेश में जल जीवन मिशन का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित 11 जिलों में शत-प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है। अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। प्रदेश के 75 प्रतिशत परिवार इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन जारी किए गए हैं और 15,238 नए नलकूप व हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। 14,200 गांवों को पहले ही ‘हर घर जल’ घोषित किया जा चुका है। केन्द्र से मिलेंगे 5 हजार करोड़ केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत लगभग 5 हजार करोड़ रुपए का आवंटन मिलने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा दी गई सहमति का स्वागत किया और अधिकारियों को केंद्र के साथ समन्वय तेज करने के निर्देश दिए। वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को 5 हजार करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन 2.0 की भी तैयारी शुरू कर दी गई है। सीएम बोले- हवा में मत रहिए, हम भागीरथपुरा देख चुके हैं
पीएचई की बैठक में एसीएस मनीष रस्तोगी जब ये बता रहे थे कि जल जीवन मिशन के जरिए इतने गांवों में जल प्रदाय योजनाओं के काम हो चुके हैं। इसी दौरान सीएम ने कहा आप लोग ज्यादा हवा में मत रहिए पेयजल के साथ सीवेज प्रबंधन की भी चिंता कीजिए। हम अभी कुछ समय पहले भागीरथपुरा की स्थिति देख चुके हैं। मैं जब इंदौर जाता हूं तो सीवेज की गंदगी देखकर शर्म आती है। जल निगम का नाम बदलेगा
बैठक में सीएम ने यह निर्देश दिए कि अब जल निगम का नाम जल एवं सीवेज प्रबंधन निगम होगा। अब पेयजल के साथ ही सीवेज प्रबंधन के कामों पर भी ध्यान दिया जाएगा। मेट्रोपॉलिटिन रीजन के लिए पानी प्रबंधन पर काम करो
बैठक में सीएम ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटिन एरिया में जब क्षेत्र बढ़ेगा तो पानी की जरूरत बढ़ेगी। तब पानी कहां से लाएंगे। इसके लिए सरफेस वाटर मैनेजमेंट प्लान बनाओ। दोनों मेट्रोपॉलिटिन रीजन में पेयजल, उद्योग और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता हो ऐसा प्लान बनाकर तैयार करो। केवल ट्यूबवैल पर निर्भर मत रहो, तालाब सरोवर से वॉटर रिचार्जिंग बढ़ाओ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साफ कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अब केवल ट्यूबवेल पर आश्रित न रहे। तालाब व सरोवर निर्माण, जल संग्रहण और वॉटर रिचार्जिंग को प्राथमिकता दी जाए। इससे जल संरक्षण, भूजल स्तर में वृद्धि और नल योजनाओं को स्थायी जल स्रोत मिलेंगे। इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (MAPCAST) की विशेषज्ञता ली जाएगी। ट्यूबवैल में गिरने की दुर्घटनाएं रोकने एमपी ने देश में सबसे पहले बनाई पॉलिसी सुरक्षा, नवाचार और जनभागीदारी मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने बोरवेल अधिनियम बनाया है, ताकि बोरवेल में गिरकर होने वाली दुर्घटनाएं रोकी जा सकें। विभाग सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दे रहा है। बेहतर कार्य करने वाले गांवों और ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। जल महोत्सव और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जन भागीदारी बढ़ाई जा रही है। जल दर्पण पोर्टल के माध्यम से शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। अन्य महत्वपूर्ण फैसले


