उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित अन्य जिलों में जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नागरिक 7 से 21 मई तक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से प्रगणक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। यह जनगणना 15 साल बाद हो रही है और इस बार की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने (सेल्फ-एन्युमरेशन) की सुविधा दी गई है। स्वयं जानकारी दर्ज करने के लिए नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर जा सकते हैं। उन्हें अपना मोबाइल नंबर और परिवार के मुखिया का नाम दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद मांगी गई सभी जानकारियां भरनी होंगी। फॉर्म जमा होने पर 11 अंकों की एक SE-ID मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। प्रगणक के घर आने पर यह SE-ID उन्हें दिखानी होगी। जनगणना के लिए कुछ खास नियम तय किए गए हैं। ‘रसोई के नियम’ के अनुसार, एक ही रसोई में भोजन करने वाले सभी व्यक्तियों को एक परिवार माना जाएगा। ‘180 दिन के पैमाने’ के तहत, किसी व्यक्ति की गिनती उसी शहर में की जाएगी जहां वह कम से कम छह महीने से रह रहा हो। जनगणना के पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें मकान नंबर, निर्माण सामग्री (जैसे फर्श, दीवार, छत), मकान का उपयोग और उसकी स्थिति, परिवार और सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, सामाजिक वर्ग, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई की सुविधा, गैस कनेक्शन, मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी, कंप्यूटर, वाहन और घर में उपयोग होने वाला मुख्य अनाज जैसी जानकारियां शामिल होंगी। नागरिक 7 से 21 मई के बीच अपने मोबाइल या लैपटॉप से पोर्टल पर अपनी जानकारी अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद 22 मई से प्रगणकों की टीम घर-घर जाकर सर्वे करेगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, तब मेरठ जिले की आबादी 34 लाख 43 हजार 689 थी। इसमें पुरुषों की संख्या 18 लाख 25 हजार 658 और महिलाओं की आबादी 16 लाख 18 हजार 31 थी। उस समय लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 886 महिलाएं था। वर्तमान अनुमान के अनुसार, जिले की आबादी अब लगभग 42 से 44 लाख हो सकती है। जनगणना प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है। पहला चरण 22 मई से 20 जून तक चलेगा, जिसमें केवल मकानों की लिस्टिंग की जाएगी और घर की सुविधाओं (जैसे बिजली, पानी, वाहन) से संबंधित 33 सवाल पूछे जाएंगे। दूसरा चरण अगले साल फरवरी 2027 में होगा, जिसमें व्यक्तियों की वास्तविक गिनती की जाएगी। इस बार की जनगणना की एक खास बात यह भी है कि 1931 के बाद पहली बार जातिगत जनगणना भी की जाएगी।


