छिंदवाड़ा जिले के चौरई के 64 किसानों को करीब एक करोड़ रुपए वापस मिलेंगे। चौरई के एक व्यापारी ने किसानों से अनाज खरीदकर पैसे नहीं दिए थे। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। इस मामले में हाईकोर्ट ने किसानों को पैसे वापस दिलाने का आदेश दिया था। इसके बाद अब सीएम के निर्देश पर किसानों को यह राशि दिलाई जाएगी। छह साल पुराना है मामला यह मामला साल 2019-20 के आसपास शुरू हुआ था। चौरई मंडी की फर्म ज्ञाताश्री ट्रेडर्स ने किसानों से बड़ी मात्रा में अनाज खरीदा था, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया। लगभग 5-6 साल तक यह मामला कानूनी प्रक्रियाओं और अलग-अलग अदालतों में उलझा रहा। 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस मामले में खुद निगरानी की। और मंडी बोर्ड की हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी के बाद अब जाकर किसानों को उनके पैसे वापस दिलाए जाएंगे। मंडी समिति ने जब देखा कि फर्म पैसा नहीं दे रही है, तो तहसीलदार कोर्ट के माध्यम से RRC (रिकवरी) की कार्रवाई शुरू की गई। वसूली गई राशि मंडी के खाते में तो आ गई थी, लेकिन कानूनी अड़चनों (सिविल कोर्ट की अनुमति न मिलने) के कारण किसानों तक नहीं पहुंच पा रही थी। हाईकोर्ट में किसने लगाई थी याचिका? शुरुआत में चौरई मंडी समिति ने फर्म से पैसे वसूलने के लिए तहसीलदार कोर्ट में केस किया। जब जिला और सिविल कोर्ट से किसानों को भुगतान की अनुमति मिलने में तकनीकी देरी होने लगी, तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) ने खुद आगे बढ़कर उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की। मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने अधिवक्ता के माध्यम से इस केस को लड़ा ताकि किसानों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें। हाईकोर्ट ने कब और क्या फैसला दिया? जबलपुर उच्च न्यायालय ने पिछले महीने 30 अप्रैल को इस पर अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मंडी समिति के पास जमा ₹96,51,500 की राशि को किसानों को बांटने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने सरकार के उस तर्क को स्वीकार किया कि फर्म की संपत्ति कुर्क करके वसूली गई राशि पर पहला हक उन किसानों का है जिनकी उपज बेची गई थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि अब बिना किसी देरी के 64 किसानों की सूची के अनुसार उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए।


