Used Car Market Growth: भारत का यूज्ड-कार बाजार वित्त वर्ष 2031 तक करीब 70 अरब डॉलर हो सकता है। यह कहना है रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स की एक नई रिपोर्ट का। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी हर साल करीब 60 लाख यूज्ड कार बिकती हैं, जो अगले पांच साल में 90 से 100 लाख तक पहुंच सकती हैं। रेडसीर के असोसिएट पार्टनर कुशल भटनागर के मुताबिक जो खरीदार सालाना 20 लाख रुपये या उससे ज्यादा कमा रहे हैं, वे अब नई एंट्री-लेवल कार के बजाय पुरानी प्रीमियम SUV को खरीदना पंसद कर रहे हैं।
नई-पुरानी गाड़ी की सोच बदल रही
कार24 के भारत में सीएफओ शिवांशु मक्कड़ कहते हैं कि अब यूज्ड कार को सेकंड चॉइस नहीं माना जा रहा बल्कि खरीदार जानबूझकर पुरानी गाड़ी खरीद रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है लगभग 65 फीसदी यूज्ड-कार खरीदार पहली बार कार के मालिक बन रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कार24 जैसे प्लेटफॉर्म जो नई-पुरानी कारों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाते है वे ट्रांसपेरेंसी, फाइनेंसिंग, इंस्पेक्शन और वारंटी जैसी सुविधाएं दे रहे हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि यूज्ड कार की कीमत नई कार के मुकाबले औसतन 57 फीसदी कम होती है। यानी उसी बजट में खरीदार ज्यादा बड़ी और फीचर्स से भरपूर गाड़ी घर ला सकता है।
SUV का बढ़ रहा क्रेज
यूज्ड-कार बाजार में SUV की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 के 12 से 16 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2031 तक 19 से 22 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही गाड़ी बदलने का साइकिल भी पहले के 7 से 8 साल से घटकर अब 4 से 5 साल पर आ गया है। इसका मतलब है कि अच्छी कंडीशन की कम पुरानी गाड़ियां अब बाजार में ज्यादा आ रही हैं। कई खरीदार अब नई कार की पूरी डेप्रिसिएशन का बोझ उठाने के बजाय यूज्ड कार लेकर बचाए गए पैसे को निवेश, शादी या घर की जरूरतों में लगा रहे हैं।
नहीं चुकानी पड़ती भारी EMI
अब तक यूज्ड कार पर लोन लेना आसान नहीं था क्योंकि बैंक और NBFC गाड़ी की कंडीशन और रिसेल वैल्यू को लेकर आश्वस्त नहीं रहते थे। लेकिन यह भी बदल रहा है। रेडसीर का अनुमान है कि यूज्ड-कार फाइनेंसिंग की पेनिट्रेशन यानी कि फाइनेंसिंग के जरिए खरीदी गई यूज्ड-कार का आंकड़ा वित्त वर्ष 2027 तक 20 से 30 फीसदी से बढ़कर 30 से 40 फीसदी हो सकती है।
डिजिटल इंस्पेक्शन और रियल-टाइम प्राइसिंग डेटा की मदद से लेंडर्स का भरोसा बढ़ रहा है। मक्कड़ कहते हैं कि खरीदार अब गाड़ी की पूरी कीमत नहीं, बल्कि मंथली EMI देखकर फैसला कर रहे हैं, जो इस बाजार को और बड़ा बनाने वाला बदलाव है।


