कैंसर मरीज 30 से 35 साल के युवा सबसे ज्यादा:खैनी-सिगरेट कोशिकाओं को कर रही डैमेज, मुंह में बार-बार छाले और लाल-सफेद धब्बे बीमारी के संकेत

कैंसर मरीज 30 से 35 साल के युवा सबसे ज्यादा:खैनी-सिगरेट कोशिकाओं को कर रही डैमेज, मुंह में बार-बार छाले और लाल-सफेद धब्बे बीमारी के संकेत

ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। पटना सहित राज्य के विभिन्न अस्पतालों में 30 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में लंबे समय तक खैनी, गुटका, जर्दा या अन्य धुआं रहित तंबाकू के सेवन का इतिहास मिलता है। विशेषज्ञ पहले ओरल कैंसर को आमतौर पर 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में देखते थे, लेकिन अब कम उम्र के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कैंसर विशेषज्ञों ने क्या कहा, कैसे करनी है बचाव, क्या बतरतनी है सावधानियां, पढ़ें रिपोर्ट…
किशोरावस्था से ही तंबाकू सेवन कम उम्र में बीमारी का है कारण वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि तंबाकू सेवन केवल मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर तक सीमित नहीं है। यह हृदय रोग, न्यूरो वैस्कुलर विकार, नेत्र रोग, ब्लड कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि देश में 40 प्रतिशत ओरल कैंसर के मामलों का मुख्य कारण तंबाकू सेवन है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था या युवावस्था में तंबाकू सेवन शुरू करने की प्रवृत्ति कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे एक बड़ा कारण है। आज देश भर में 1.8 मिलियन लोग कैंसर से ग्रसित हैं, जो एक चौंकाने वाला आंकड़ा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खैनी का उपयोग सामाजिक रूप से काफी स्वीकार्य है। कई लोग इसे दिनभर में कई बार लेते हैं। शुरुआती लक्षणों को लोग समझते हैं सामान्य

डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि ओरल कैंसर के शुरुआती संकेतों को लोग गंभीरता से नहीं लेते। मुंह में सफेद या लाल धब्बे, बार-बार छाले होना, मुंह कम खुलना, गाल या जीभ में गांठ बनना, निगलने में परेशानी या लंबे समय तक घाव का न भरना जैसे लक्षण अक्सर शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
कई मरीज इन लक्षणों को सामान्य समझकर महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं। जब तक वे अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बीमारी तीसरी या चौथी अवस्था में पहुंच चुकी होती है। ऐसे मामलों में उपचार अधिक जटिल, लंबा और खर्चीला हो जाता है। शौक बन जाती है लत डॉ. अभिषेक आनंद (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंबाकू केवल एक आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर को खत्म करने वाला जहर है। इसके सेवन से मुंह का कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. अभिषेक आनंद ने कहा कि आज युवाओं में गुटखा-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। शुरुआत शौक से होती है, लेकिन बाद में यह लत बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई मरीज इलाज के दौरान यह स्वीकार करते हैं कि अगर समय रहते तंबाकू छोड़ देते तो गंभीर बीमारी से बच सकते थे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों और किशोरों पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि घर और समाज में जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यदि परिवार के सदस्य खुद तंबाकू से दूर रहेंगे तो बच्चे भी इससे बचेंगे। खैनी और चूना का खतरनाक मेल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खैनी के साथ इस्तेमाल किया जाने वाला चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) मुंह की भीतरी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे तंबाकू में मौजूद रसायनों का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
जब कोई व्यक्ति वर्षों तक नियमित रूप से खैनी और चूने का सेवन करता है तो मुंह की कोशिकाओं में लगातार जलन और सूक्ष्म क्षति होती रहती है। यही प्रक्रिया आगे चलकर कैंसर की आशंका को बढ़ा सकती है।
बिहार में क्यों चिंता बढ़ी हुई है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में धुआं रहित तंबाकू का उपयोग व्यापक स्तर पर होता है। कई परिवारों और सामाजिक समूहों में खैनी का सेवन सामान्य व्यवहार का हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि किशोर और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता की कमी, नियमित स्क्रीनिंग का अभाव और शुरुआती लक्षणों की अनदेखी स्थिति को और गंभीर बना रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच भी एक चुनौती है। समय रहते पहचान हो तो इलाज संभव

डॉक्टरों का कहना है कि ओरल कैंसर का समय पर पता चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बेहतर रहती है। शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी और अन्य उपचारों के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि मुंह में कोई असामान्य बदलाव लंबे समय तक बना रहे तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। विशेष रूप से तंबाकू सेवन करने वाले लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए। ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। पटना सहित राज्य के विभिन्न अस्पतालों में 30 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में लंबे समय तक खैनी, गुटका, जर्दा या अन्य धुआं रहित तंबाकू के सेवन का इतिहास मिलता है। विशेषज्ञ पहले ओरल कैंसर को आमतौर पर 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में देखते थे, लेकिन अब कम उम्र के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कैंसर विशेषज्ञों ने क्या कहा, कैसे करनी है बचाव, क्या बतरतनी है सावधानियां, पढ़ें रिपोर्ट…
किशोरावस्था से ही तंबाकू सेवन कम उम्र में बीमारी का है कारण वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि तंबाकू सेवन केवल मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर तक सीमित नहीं है। यह हृदय रोग, न्यूरो वैस्कुलर विकार, नेत्र रोग, ब्लड कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि देश में 40 प्रतिशत ओरल कैंसर के मामलों का मुख्य कारण तंबाकू सेवन है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था या युवावस्था में तंबाकू सेवन शुरू करने की प्रवृत्ति कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे एक बड़ा कारण है। आज देश भर में 1.8 मिलियन लोग कैंसर से ग्रसित हैं, जो एक चौंकाने वाला आंकड़ा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खैनी का उपयोग सामाजिक रूप से काफी स्वीकार्य है। कई लोग इसे दिनभर में कई बार लेते हैं। शुरुआती लक्षणों को लोग समझते हैं सामान्य

डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि ओरल कैंसर के शुरुआती संकेतों को लोग गंभीरता से नहीं लेते। मुंह में सफेद या लाल धब्बे, बार-बार छाले होना, मुंह कम खुलना, गाल या जीभ में गांठ बनना, निगलने में परेशानी या लंबे समय तक घाव का न भरना जैसे लक्षण अक्सर शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
कई मरीज इन लक्षणों को सामान्य समझकर महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं। जब तक वे अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बीमारी तीसरी या चौथी अवस्था में पहुंच चुकी होती है। ऐसे मामलों में उपचार अधिक जटिल, लंबा और खर्चीला हो जाता है। शौक बन जाती है लत डॉ. अभिषेक आनंद (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंबाकू केवल एक आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर को खत्म करने वाला जहर है। इसके सेवन से मुंह का कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. अभिषेक आनंद ने कहा कि आज युवाओं में गुटखा-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। शुरुआत शौक से होती है, लेकिन बाद में यह लत बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई मरीज इलाज के दौरान यह स्वीकार करते हैं कि अगर समय रहते तंबाकू छोड़ देते तो गंभीर बीमारी से बच सकते थे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों और किशोरों पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि घर और समाज में जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यदि परिवार के सदस्य खुद तंबाकू से दूर रहेंगे तो बच्चे भी इससे बचेंगे। खैनी और चूना का खतरनाक मेल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खैनी के साथ इस्तेमाल किया जाने वाला चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) मुंह की भीतरी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे तंबाकू में मौजूद रसायनों का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
जब कोई व्यक्ति वर्षों तक नियमित रूप से खैनी और चूने का सेवन करता है तो मुंह की कोशिकाओं में लगातार जलन और सूक्ष्म क्षति होती रहती है। यही प्रक्रिया आगे चलकर कैंसर की आशंका को बढ़ा सकती है।
बिहार में क्यों चिंता बढ़ी हुई है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में धुआं रहित तंबाकू का उपयोग व्यापक स्तर पर होता है। कई परिवारों और सामाजिक समूहों में खैनी का सेवन सामान्य व्यवहार का हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि किशोर और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता की कमी, नियमित स्क्रीनिंग का अभाव और शुरुआती लक्षणों की अनदेखी स्थिति को और गंभीर बना रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच भी एक चुनौती है। समय रहते पहचान हो तो इलाज संभव

डॉक्टरों का कहना है कि ओरल कैंसर का समय पर पता चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बेहतर रहती है। शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी और अन्य उपचारों के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि मुंह में कोई असामान्य बदलाव लंबे समय तक बना रहे तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। विशेष रूप से तंबाकू सेवन करने वाले लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *