Brijbhushan Sharan Singh Latest News: उत्तर प्रदेश की कर्नलगंज विधानसभा सीट लंबे समय से राजघरानों की आपसी टक्कर और दबदबे की राजनीति के लिए जानी जाती रही है। बरगदी कोट के कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ ‘लल्ला भैया’ और भबुआ के योगेश प्रताप सिंह उर्फ ‘योगी भैया’ के बीच दशकों तक सीधी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही। दोनों परिवार बारी-बारी से सत्ता में आते रहे और यही मुकाबला इस सीट की पहचान बन गया।
2022 में बदला खेल, बृजभूषण के समर्थन से जीते अजय सिंह
2022 के विधानसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गया। पहली बार पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले ये दोनों राजघराने एक साथ नजर आए। इसके बावजूद BJP के अजय सिंह ने जीत दर्ज की। इस जीत के पीछे सबसे अहम भूमिका बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह के समर्थन को माना गया, जिसने पूरे चुनावी गणित को बदल दिया।
‘राजशाही खत्म, जनता की राजनीति शुरू’ — अजय सिंह का दावा
मौजूदा विधायक अजय सिंह दावा करते हैं कि उन्होंने कर्नलगंज की राजनीति को राजघरानों के प्रभाव से निकालकर आम जनता तक पहुंचाया है। उनके मुताबिक, पहले विधायक तक पहुंचना मुश्किल होता था, लेकिन अब वे 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं। उनके कार्यकाल में परसपुर ब्लॉक मुख्यालय को मुख्य सड़कों से जोड़ने जैसे काम पूरे हुए, जो आजादी के बाद से अधूरे थे।
विपक्ष का आरोप: विकास नहीं, सिर्फ राजनीति
वहीं समाजवादी पार्टी BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाती है कि पार्टी विकास के बजाय नफरत की राजनीति कर रही है। सपा समर्थकों का मानना है कि पिछली बार कुछ रणनीतिक चूक के कारण योगेश प्रताप सिंह को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2027 में उनकी वापसी तय मानी जा रही है।
जातीय समीकरण और बृजभूषण की ‘किंगमेकर’ भूमिका
स्थानीय जानकारों के अनुसार, कर्नलगंज सीट का पूरा चुनावी गणित जातीय संतुलन पर टिका है। यहां लगभग 80 हजार ब्राह्मण, 55 हजार यादव, 49 हजार क्षत्रिय और 45 हजार मुस्लिम वोटर हैं। ब्राह्मण और ठाकुर वोटों का रुख अक्सर जीत-हार तय करता है। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह की भूमिका ‘किंगमेकर’ के रूप में देखी जा रही है। माना जाता है कि उनका समर्थन जिस उम्मीदवार को मिलता है, उसकी जीत की संभावना काफी बढ़ जाती है।
बदलते रिश्ते, नए समीकरण की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मौजूदा विधायक अजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह के रिश्ते पहले जैसे मजबूत नहीं रहे। ऐसी अटकलें भी हैं कि इस बार बृजभूषण ‘लल्ला भैया’ के बेटे को समर्थन दे सकते हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
2027 की जंग: विरासत बनाम नया चेहरा
अब 2027 के चुनाव की आहट के साथ सवाल यही है कि क्या राजघराने अपनी खोई हुई पकड़ वापस हासिल कर पाएंगे या फिर बृजभूषण शरण सिंह किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाकर बाजी पलट देंगे। कर्नलगंज की इस सियासी लड़ाई में आने वाले समय में कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं।


