US-Iran War: मध्य पूर्व में चल रही जंग अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रह गई है, यह एक बड़ा आर्थिक और मानवीय सवाल बन चुकी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ युद्ध पर अब तक 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम से क्या हासिल हुआ, और क्या इससे बेहतर विकल्प हो सकता था?
हर दिन 2 अरब डॉलर खर्च, बड़ा खुलासा
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन (Pentagon) के एक अधिकारी ने पहली बार इस युद्ध की लागत का आधिकारिक अनुमान दिया है। उनके मुताबिक, अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। इसका मतलब है कि हर दिन करीब 2 अरब डॉलर इस युद्ध पर खर्च किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रहा है।
इतने पैसों से बच सकती थीं करोड़ों जिंदगियां, UN
यूनाइटेड नेशन्स (UN) की मानवीय एजेंसी ने इस खर्च पर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी के प्रमुख टॉम फ्लेचर (Tom Fletcher) के मुताबिक, अगर यही पैसा राहत कार्यों में लगाया जाता तो करीब 8.7 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि दुनिया में भुखमरी और गरीबी से जूझ रहे लोगों के लिए यह रकम बेहद अहम हो सकती थी, लेकिन अब यह मौका हाथ से निकल चुका है।
महंगाई और गरीबी पर पड़ेगा असर
इस युद्ध का असर आने वाले कई सालों तक दुनिया झेलेगी। खासकर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हालात और खराब हो सकते हैं। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। अनुमान है कि महंगाई 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे गरीब देशों में रहने वाले लाखों लोग और मुश्किल में आ सकते हैं।
संसद में तीखी बहस, सरकार पर सवाल
इस युद्ध का असर अब अमेरिकी राजनीति में भी साफ दिखने लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सामने मिडटर्म चुनाव में चुनौती बढ़ती नजर आ रही है। विपक्षी डेमोक्रेट्स इस युद्ध को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं और इसे महंगाई और आम लोगों की परेशानियों से जोड़ रहे हैं। अमेरिकी संसद में भी इस मुद्दे पर जोरदार बहस हो रही है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से सवाल पूछे गए और इस युद्ध को ‘आर्थिक और राजनीतिक आपदा’ तक बताया गया। हालांकि, हेगसेथ ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि यह युद्ध जरूरी था। उन्होंने आलोचना करने वाले नेताओं को गैरजिम्मेदार तक बता दिया।
बढ़ते रक्षा बजट की मांग
इसी बीच अमेरिकी सरकार ने 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट की मांग भी रखी है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में सेना को मजबूत रखना जरूरी है। लेकिन विपक्ष का तर्क है कि इतना बड़ा खर्च देश की अर्थव्यवस्था पर और दबाव डाल सकता है। युद्ध अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। एक तरफ सैन्य ताकत दिखाने की होड़ है, तो दूसरी तरफ करोड़ों लोग भूख और गरीबी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या युद्ध ही हर समस्या का हल है?


