पटना | बिहार को जल्द ही अपना पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट मिलने जा रहा है। यह प्लांट बांका जिले के शंभूगंज में बनेगा। केंद्र सरकार ने राज्य में इसके निर्माण की अनुमति दे दी है। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) को जिम्मेदारी मिली है। एनपीसीआईएल अगले 5 महीने में इसकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। सरकार इसी साल नवंबर में प्लांट का शिलान्यास करने की तैयारी में है। शुरुआती चरण में 700 मेगावाट की दो यूनिट्स लगाई जाएंगी। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इसके लिए 35 से 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए भागलपुर से गंगा का पानी बांका लाया जाएगा। प्लांट के पास एक बड़ा जलाशय भी बनेगा। यहां मानसून का पानी स्टोर होगा। गर्मी में पानी की कमी होने पर गंगा से पानी लिफ्ट किया जाएगा। कूलिंग सिस्टम के लिए लगातार पानी जरूरी होता है। इसी वजह से भागलपुर से आने वाली पाइपलाइन पूरी तरह इस प्लांट के लिए समर्पित होगी।
सवाल : बिहार को इससे क्या फायदा होगा? जवाब: बिहार की बिजली मांग तेजी से बढ़ रही है और इस साल इसके 10 हजार मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। अभी राज्य बिजली के लिए थर्मल पावर पर निर्भर है। यह प्लांट बिहार को भविष्य के बिजली संकट से बचाने और औद्योगिक जरूरतें पूरी करने में मदद करेगा। बैठकों का दौर व अहम फैसले 24 जून 2025 को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री खट्टर ने न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए सैद्धांतिक सहमति दी थी। 20 फरवरी 2026 को ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। इसमें एनपीसीआईएल, एनटीपीसी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है श्रीमती हेमावती देवी के पुत्र ब्रजकिशोर दूबे की रिपोर्ट क्लीन एनर्जी की ओर बिहार का बड़ा कदम बिहार की बढ़ती जरूरत बिहार में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2024 में पीक डिमांड 8005 मेगावाट थी, जो 2025 में 8700 मेगावाट हो गई। इस साल इसके 10 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। अभी राज्य मुख्य रूप से कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भर है। उद्योगों के आने से बिजली की मांग और बढ़ेगी। सवाल : प्लांट के लिए बांका को क्यों चुना गया? जवाब: एनपीसीआईएल के सर्वे में बांका के शंभूगंज और भितरिया को सबसे उपयुक्त पाया गया। यहां जमीन पथरीली है और आबादी कम है। यह इलाका भूकंप के जोन-3 में आता है। भागलपुर से नजदीक होने के कारण यहां गंगा का पानी पाइपलाइन से लाना आसान होगा। सवाल : न्यूक्लियर प्लांट के लिए पानी का इंतजाम कैसे होगा? जवाब: रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी चाहिए। इसके लिए 35 से 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से गंगा का पानी बांका लाया जाएगा। मानसून में पानी स्टोर करने के लिए बड़ा जलाशय बनाया जाएगा। गर्मी में गंगा से पानी लिफ्ट कर जलाशय में डाला जाएगा। 5 महीने में डीपीआर, नवंबर में शिलान्यास की तैयारी बिहार में पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी तैयारी है। अभी राज्य बिजली उत्पादन के लिए मुख्य रूप से कोयले पर आधारित थर्मल पावर पर निर्भर है। बिहार की बिजली मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह प्लांट भविष्य में राज्य के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि नए उद्योगों को भी लगातार और स्वच्छ बिजली मिल सकेगी। पटना | बिहार को जल्द ही अपना पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट मिलने जा रहा है। यह प्लांट बांका जिले के शंभूगंज में बनेगा। केंद्र सरकार ने राज्य में इसके निर्माण की अनुमति दे दी है। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) को जिम्मेदारी मिली है। एनपीसीआईएल अगले 5 महीने में इसकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। सरकार इसी साल नवंबर में प्लांट का शिलान्यास करने की तैयारी में है। शुरुआती चरण में 700 मेगावाट की दो यूनिट्स लगाई जाएंगी। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इसके लिए 35 से 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए भागलपुर से गंगा का पानी बांका लाया जाएगा। प्लांट के पास एक बड़ा जलाशय भी बनेगा। यहां मानसून का पानी स्टोर होगा। गर्मी में पानी की कमी होने पर गंगा से पानी लिफ्ट किया जाएगा। कूलिंग सिस्टम के लिए लगातार पानी जरूरी होता है। इसी वजह से भागलपुर से आने वाली पाइपलाइन पूरी तरह इस प्लांट के लिए समर्पित होगी।
सवाल : बिहार को इससे क्या फायदा होगा? जवाब: बिहार की बिजली मांग तेजी से बढ़ रही है और इस साल इसके 10 हजार मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। अभी राज्य बिजली के लिए थर्मल पावर पर निर्भर है। यह प्लांट बिहार को भविष्य के बिजली संकट से बचाने और औद्योगिक जरूरतें पूरी करने में मदद करेगा। बैठकों का दौर व अहम फैसले 24 जून 2025 को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री खट्टर ने न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए सैद्धांतिक सहमति दी थी। 20 फरवरी 2026 को ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। इसमें एनपीसीआईएल, एनटीपीसी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है श्रीमती हेमावती देवी के पुत्र ब्रजकिशोर दूबे की रिपोर्ट क्लीन एनर्जी की ओर बिहार का बड़ा कदम बिहार की बढ़ती जरूरत बिहार में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2024 में पीक डिमांड 8005 मेगावाट थी, जो 2025 में 8700 मेगावाट हो गई। इस साल इसके 10 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। अभी राज्य मुख्य रूप से कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भर है। उद्योगों के आने से बिजली की मांग और बढ़ेगी। सवाल : प्लांट के लिए बांका को क्यों चुना गया? जवाब: एनपीसीआईएल के सर्वे में बांका के शंभूगंज और भितरिया को सबसे उपयुक्त पाया गया। यहां जमीन पथरीली है और आबादी कम है। यह इलाका भूकंप के जोन-3 में आता है। भागलपुर से नजदीक होने के कारण यहां गंगा का पानी पाइपलाइन से लाना आसान होगा। सवाल : न्यूक्लियर प्लांट के लिए पानी का इंतजाम कैसे होगा? जवाब: रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी चाहिए। इसके लिए 35 से 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से गंगा का पानी बांका लाया जाएगा। मानसून में पानी स्टोर करने के लिए बड़ा जलाशय बनाया जाएगा। गर्मी में गंगा से पानी लिफ्ट कर जलाशय में डाला जाएगा। 5 महीने में डीपीआर, नवंबर में शिलान्यास की तैयारी बिहार में पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी तैयारी है। अभी राज्य बिजली उत्पादन के लिए मुख्य रूप से कोयले पर आधारित थर्मल पावर पर निर्भर है। बिहार की बिजली मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह प्लांट भविष्य में राज्य के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि नए उद्योगों को भी लगातार और स्वच्छ बिजली मिल सकेगी।


