बिहारशरीफ सदर अस्पताल ने रचा इतिहास:सी-आर्म मशीन की मदद से बच्चे के सीने में फंसी बुलेट निकाला; गोलीबारी में पिता-पुत्र हुए थे घायल

बिहारशरीफ सदर अस्पताल ने रचा इतिहास:सी-आर्म मशीन की मदद से बच्चे के सीने में फंसी बुलेट निकाला; गोलीबारी में पिता-पुत्र हुए थे घायल

बिहारशरीफ सदर अस्पताल ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डॉक्टरों ने अपनी तत्परता और आधुनिक तकनीक से 13 साल करे बच्चे के सीने में फंसी गोली को निकालकर उसे नई जीवन दान दी है। उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के नेतृत्व में सफल ऑपरेशन किया गया। सदर अस्पताल के इतिहास में पहली बार सी-आर्म(C-Arm) मशीन का उपयोग कर गोली निकालने में सफलता पाई गई है। गुरुवार शाम करीब सवा आठ बजे इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल था। एक ही परिवार के दो सदस्यों को गोली लगने के बाद गंभीर स्थिति में इलाज के लिए लाया गया था। घायलों में बिहार थाना क्षेत्र के सुफीनगर निवासी मो.सोहन और उनका बेटा अली फरहान शामिल था। पिता को पटना किया रेफर डॉ. राजीव रंजन, डॉ. रोहित और एनेस्थीसिया की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। अधेड़ के जबड़े में लगी गोली आर-पार हो चुकी थी, जिससे उनकी स्थिति काफी क्रिटिकल थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत पटना PMCH रेफर कर दिया गया। दूसरी ओर, बच्चे की स्थिति भी काफी गंभीर थी। बुलेट सीने के दाहिने हिस्से में ऊपरी लोब के पास फंसी हुई थी। बच्चे के शरीर में ‘एंट्री वुंड’ तो था लेकिन ‘एग्जिट वुंड’ नहीं था, जिसका सीधा मतलब था कि गोली अंदर ही मौजूद थी। समय की नजाकत को देखते हुए डॉक्टरों ने बच्चे को रेफर करने के बजाय यहीं ऑपरेशन करने का साहसिक निर्णय लिया।
मशीन की मदद से सफल ऑपरेशन इस चुनौतीपूर्ण कार्य में अस्पताल में हाल ही में स्थापित की गई अत्याधुनिक सी-आर्म मशीन वरदान साबित हुई। इस मशीन की मदद से डॉक्टरों ने शरीर के अंदर मौजूद बुलेट का सटीक लोकेशन पता लगाया। जिसके बाद सफलतापूर्वक उसे बाहर निकाल लिया। बच्चे की हालत खतरे से बाहर डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। उसे आईसीयू में रखा गया है। राहत की बात यह है कि सुबह से बच्चे ने तरल आहार लेना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम और अस्पताल में उपलब्ध कराई गई आधुनिक सुविधाओं को दिया है। सिविल सर्जन को भी इस ऐतिहासिक सर्जरी की जानकारी दे दी गई है। जनमानस में एक नया विश्वास अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिस तरह से पूर्व में शीतला मंदिर की घटना के दौरान उनकी टीम सक्रिय रही थी, वैसी ही मुस्तैदी इस बार भी दिखाई गई। जिससे एक मासूम की जान बचाई जा सकी। सदर अस्पताल की इस उपलब्धि ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति आम जनमानस में एक नया विश्वास जगाया है। बिहारशरीफ सदर अस्पताल ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डॉक्टरों ने अपनी तत्परता और आधुनिक तकनीक से 13 साल करे बच्चे के सीने में फंसी गोली को निकालकर उसे नई जीवन दान दी है। उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के नेतृत्व में सफल ऑपरेशन किया गया। सदर अस्पताल के इतिहास में पहली बार सी-आर्म(C-Arm) मशीन का उपयोग कर गोली निकालने में सफलता पाई गई है। गुरुवार शाम करीब सवा आठ बजे इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल था। एक ही परिवार के दो सदस्यों को गोली लगने के बाद गंभीर स्थिति में इलाज के लिए लाया गया था। घायलों में बिहार थाना क्षेत्र के सुफीनगर निवासी मो.सोहन और उनका बेटा अली फरहान शामिल था। पिता को पटना किया रेफर डॉ. राजीव रंजन, डॉ. रोहित और एनेस्थीसिया की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। अधेड़ के जबड़े में लगी गोली आर-पार हो चुकी थी, जिससे उनकी स्थिति काफी क्रिटिकल थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत पटना PMCH रेफर कर दिया गया। दूसरी ओर, बच्चे की स्थिति भी काफी गंभीर थी। बुलेट सीने के दाहिने हिस्से में ऊपरी लोब के पास फंसी हुई थी। बच्चे के शरीर में ‘एंट्री वुंड’ तो था लेकिन ‘एग्जिट वुंड’ नहीं था, जिसका सीधा मतलब था कि गोली अंदर ही मौजूद थी। समय की नजाकत को देखते हुए डॉक्टरों ने बच्चे को रेफर करने के बजाय यहीं ऑपरेशन करने का साहसिक निर्णय लिया।
मशीन की मदद से सफल ऑपरेशन इस चुनौतीपूर्ण कार्य में अस्पताल में हाल ही में स्थापित की गई अत्याधुनिक सी-आर्म मशीन वरदान साबित हुई। इस मशीन की मदद से डॉक्टरों ने शरीर के अंदर मौजूद बुलेट का सटीक लोकेशन पता लगाया। जिसके बाद सफलतापूर्वक उसे बाहर निकाल लिया। बच्चे की हालत खतरे से बाहर डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। उसे आईसीयू में रखा गया है। राहत की बात यह है कि सुबह से बच्चे ने तरल आहार लेना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम और अस्पताल में उपलब्ध कराई गई आधुनिक सुविधाओं को दिया है। सिविल सर्जन को भी इस ऐतिहासिक सर्जरी की जानकारी दे दी गई है। जनमानस में एक नया विश्वास अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिस तरह से पूर्व में शीतला मंदिर की घटना के दौरान उनकी टीम सक्रिय रही थी, वैसी ही मुस्तैदी इस बार भी दिखाई गई। जिससे एक मासूम की जान बचाई जा सकी। सदर अस्पताल की इस उपलब्धि ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति आम जनमानस में एक नया विश्वास जगाया है।  

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