Stock Market में फिर बड़ी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम, जानिए बिकवाली के 5 बड़े कारण

Stock Market में फिर बड़ी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम, जानिए बिकवाली के 5 बड़े कारण
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में निवेशकों को निराशा हाथ लगी। दिन के दौरान अच्छी बढ़त दिखाने के बाद बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ गई और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार लाल निशान में बंद हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 74,267.34 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 165.15 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,382.60 अंक पर पहुंच गया। गौरतलब है कि दिन के दौरान सेंसेक्स 75,367.93 अंक तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में करीब 1000 अंक फिसल गया। निफ्टी भी 23,733.70 के उच्च स्तर से नीचे आ गया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते पर अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस कारण वैश्विक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
बता दें कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। अस्थायी आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को करीब 21,106 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सूचकांकों में हालिया पुनर्संतुलन के कारण भी विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली की है।
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी अभी भी महत्वपूर्ण औसत स्तरों के नीचे कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 23,400 और 23,200 अंक निफ्टी के लिए प्रमुख समर्थन स्तर हैं, जबकि 23,900 और 24,100 अंक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर बने हुए हैं। यदि निफ्टी 23,200 के नीचे जाता है तो और बिकवाली देखने को मिल सकती है।
इस बीच बाजार में डर और अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक भी बढ़ा है। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत तेजी के लिए अस्थिरता सूचकांक का 15 के नीचे रहना जरूरी है।
गौरतलब है कि कमजोर मानसून की आशंकाओं ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। मौसम से जुड़ी चिंताओं के कारण उपभोक्ता वस्तु और वाहन क्षेत्र के शेयरों में दबाव देखा गया। निवेशकों को डर है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और विप्रो में खरीदारी देखने को मिली। वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले इंडिया और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा में सुधार नहीं आता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत होगी।

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