वाराणसी कोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में छात्र पर जानलेवा हमला करने के प्रयास के मामले में षड़यंत्र के आरोपी अभिषेक उपाध्याय को अदालत से जमानत मिल गई है। अपर सत्र न्यायाधीश,(पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने कैमूर बिहार निवासी अभिषेक उपाध्याय को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो प्रतिभू पत्र प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन, विवेक शंकर तिवारी ने पैरवी की। अभियोजन ने बताया कि रोशन मिश्रा बीए तृतीय वर्ष का छात्र है। आरोप है कि 23 फरवरी 2026 की रात करीब 9 से 9:30 बजे वह अपने साथी विशाल के साथ बिरला छात्रावास के गेट पर खड़ा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल से पहुंचे पीयूष कुमार तिवारी, ऋषभ और तपस ने उस पर जान से मारने की नीयत से चार गोलियां चलाईं। एफआईआर के मुताबिक एक गोली छात्र के सिर के पास से निकल गई, जबकि दूसरी छाती के पास से गुजरी। छात्र जान बचाने के लिए छात्रावास के अंदर भागा तो पीछे से भी दो गोलियां चलाए जाने का आरोप है। अभियोजन ने इस घटना के पीछे पूर्व निष्कासित छात्र अभिषेक उपाध्याय के इशारे पर षड्यंत्र किए जाने का आरोप लगाया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने सहअभियुक्तों को गिरफ्तार किया था तथा एक सहअभियुक्त की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त .32 बोर की पिस्टल बरामद किए जाने का उल्लेख केस डायरी में किया गया। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि अभिषेक उपाध्याय निर्दोष है और रंजिश के कारण झूठे तथ्यों के आधार पर उसे मुकदमे में फंसाया गया है। आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और उसके विरुद्ध घटना का षड्यंत्र रचने का कोई ठोस साक्ष्य केस डायरी में उपलब्ध नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया गया, लेकिन कैमरा काफी दूर होने के कारण फुटेज में घटनाक्रम स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। आरोपी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि उसने 3 अगस्त 2026 को न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया था और तभी से जेल में निरुद्ध था। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि मामले के अन्य सहअभियुक्तों को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने आरोपी के आपराधिक इतिहास में दर्ज मुकदमों को छात्र आंदोलनों से संबंधित बताते हुए कहा कि किसी भी मामले में उसे दोषसिद्ध नहीं किया गया है।


