बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकारी खजाने से उद्योग लगाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद, अधिकांश लाभार्थी योजना का लाभ लेने के बाद काम शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिससे इस पूरी कवायद पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। जिले से सामने आए साल 2024-26 के चौंकाने वाले आंकड़े इस योजना की जमीनी हकीकत को बयां करने के लिए काफी है। इस अवधि में योजना के तहत कुल 299 बेरोजगारों का चयन किया गया था, जिनमें से अब तक महज 54 लाभार्थियों ने ही तीनों किस्तें प्राप्त कर उद्योग की स्थापना की है और उत्पादन शुरू किया है। बाकी लाभार्थियों की उदासीनता का आलम यह है कि वे सरकारी राशि लेकर बैठे तो हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम शुरू नहीं किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही पहली किस्त जारी की जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो चयनित 299 में से 22 अभ्यर्थियों ने अब तक एक भी किस्त नहीं ली है। वहीं, 277 लाभुकों ने पहली किस्त के रूप में चार लाख रुपये तो प्राप्त कर लिए, लेकिन उनमें से 116 अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने अब तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाई है। स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब दूसरी किस्त लेने वाले लाभार्थियों का जिक्र आता है। विभाग के मुताबिक, 161 लाभुकों ने पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र देकर दूसरी किस्त की राशि ली, लेकिन इनमें से 107 लाभार्थियों ने अभी तक खर्च का हिसाब या उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है। नतीजा यह है कि उनकी तीसरी किस्त की राशि पूरी तरह से अटक गई है। लाभार्थियों पर कार्रवाई की तलवार हालांकि, विभाग के अधिकारियों का एक पक्ष यह भी है कि कुछ लाभार्थी दूसरी किस्त की राशि से मशीनें खरीदकर उत्पादन तो शुरू कर देते हैं, लेकिन वे अंतिम किस्त के लिए आवेदन ही नहीं करते। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने लाखों रुपये डकार लिए हैं और उद्योग का नामो-निशान नहीं है। अब इन लाभार्थियों पर विभाग की पैनी नजर है। कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सचिन कुमार ने स्पष्ट किया है कि पहली और दूसरी किस्त ले चुके अभ्यर्थियों से लगातार उपयोगिता प्रमाण पत्र की मांग की जा रही है, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। सख्त कार्रवाई की चेतावनी उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर समय रहते उपयोगिता पत्र जमा नहीं किए गए और उद्योग चालू नहीं हुआ, तो ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ सरकारी राशि के गबन का मामला दर्ज करते हुए नीलाम पत्रवाद (सर्टिफिकेट केस) और रिकवरी की कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्हें नोटिस भेजकर अंतिम चेतावनी भी दी जा रही है ताकि शेष प्रक्रिया पूरी कर उन्हें अगली किस्त दी जा सके। बता दें, इस योजना के तहत 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जिसमें 50 फीसदी अनुदान का प्रावधान है। राशि तीन किस्तों में दी जाती है, जिसमें पहली किस्त शेड निर्माण के लिए 4 लाख, दूसरी किस्त मशीनें खरीदने के लिए 4 लाख और तीसरी किस्त वर्किंग कैपिटल के लिए 2 लाख रुपए मुहैया कराई जाती है। लेकिन, सरकारी निवेश और बेरोजगारों की उदासीनता के बीच यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में फिलहाल विफल साबित हो रही है। बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकारी खजाने से उद्योग लगाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद, अधिकांश लाभार्थी योजना का लाभ लेने के बाद काम शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिससे इस पूरी कवायद पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। जिले से सामने आए साल 2024-26 के चौंकाने वाले आंकड़े इस योजना की जमीनी हकीकत को बयां करने के लिए काफी है। इस अवधि में योजना के तहत कुल 299 बेरोजगारों का चयन किया गया था, जिनमें से अब तक महज 54 लाभार्थियों ने ही तीनों किस्तें प्राप्त कर उद्योग की स्थापना की है और उत्पादन शुरू किया है। बाकी लाभार्थियों की उदासीनता का आलम यह है कि वे सरकारी राशि लेकर बैठे तो हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम शुरू नहीं किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही पहली किस्त जारी की जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो चयनित 299 में से 22 अभ्यर्थियों ने अब तक एक भी किस्त नहीं ली है। वहीं, 277 लाभुकों ने पहली किस्त के रूप में चार लाख रुपये तो प्राप्त कर लिए, लेकिन उनमें से 116 अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने अब तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाई है। स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब दूसरी किस्त लेने वाले लाभार्थियों का जिक्र आता है। विभाग के मुताबिक, 161 लाभुकों ने पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र देकर दूसरी किस्त की राशि ली, लेकिन इनमें से 107 लाभार्थियों ने अभी तक खर्च का हिसाब या उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है। नतीजा यह है कि उनकी तीसरी किस्त की राशि पूरी तरह से अटक गई है। लाभार्थियों पर कार्रवाई की तलवार हालांकि, विभाग के अधिकारियों का एक पक्ष यह भी है कि कुछ लाभार्थी दूसरी किस्त की राशि से मशीनें खरीदकर उत्पादन तो शुरू कर देते हैं, लेकिन वे अंतिम किस्त के लिए आवेदन ही नहीं करते। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने लाखों रुपये डकार लिए हैं और उद्योग का नामो-निशान नहीं है। अब इन लाभार्थियों पर विभाग की पैनी नजर है। कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सचिन कुमार ने स्पष्ट किया है कि पहली और दूसरी किस्त ले चुके अभ्यर्थियों से लगातार उपयोगिता प्रमाण पत्र की मांग की जा रही है, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। सख्त कार्रवाई की चेतावनी उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर समय रहते उपयोगिता पत्र जमा नहीं किए गए और उद्योग चालू नहीं हुआ, तो ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ सरकारी राशि के गबन का मामला दर्ज करते हुए नीलाम पत्रवाद (सर्टिफिकेट केस) और रिकवरी की कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्हें नोटिस भेजकर अंतिम चेतावनी भी दी जा रही है ताकि शेष प्रक्रिया पूरी कर उन्हें अगली किस्त दी जा सके। बता दें, इस योजना के तहत 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जिसमें 50 फीसदी अनुदान का प्रावधान है। राशि तीन किस्तों में दी जाती है, जिसमें पहली किस्त शेड निर्माण के लिए 4 लाख, दूसरी किस्त मशीनें खरीदने के लिए 4 लाख और तीसरी किस्त वर्किंग कैपिटल के लिए 2 लाख रुपए मुहैया कराई जाती है। लेकिन, सरकारी निवेश और बेरोजगारों की उदासीनता के बीच यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में फिलहाल विफल साबित हो रही है।


