पटना उच्च न्यायालय ने मोतिहारी पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। यह मामला पिपरा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग रेप पीड़िता के अपहरण से संबंधित है। अदालत ने जांच में गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात को पीड़िता की तत्काल बरामदगी और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद जिला पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। पुलिस अधीक्षक ने मामले के जांच पदाधिकारी रोहित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। चकिया एसडीपीओ संतोष कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तीन फरार आरोपियों के घरों पर इश्तेहार चस्पा कर उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है। सुनवाई से पहले रेप पीड़िता का अपहरण यह मामला 14 अगस्त 2024 को पिपरा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई नाबालिग से रेप की घटना से जुड़ा है। पीड़िता की मां के आवेदन पर पिपरा थाना में नौशाद आलम के खिलाफ कांड संख्या 214/24 दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो वर्तमान में मोतिहारी केंद्रीय कारागार में बंद है। बताया गया है कि 24 फरवरी 2026 को आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता को बयान के लिए पेश करने का निर्देश दिया था। उसी रात पीड़िता का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। मां ने 5 लोगों के खिलाफ FIR कराया दर्ज इसके बाद पीड़िता की मां ने आरोपी के परिजनों सहित पांच लोगों के खिलाफ कांड संख्या 92/26 दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक बुजुर्ग आरोपी का नाम जांच के दौरान हटा दिया गया। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी का अपहरण गवाही रोकने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायत करने पर उन्हें धमकियां भी मिलीं। फिलहाल, अपहृत पीड़िता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। किडनैपिंग के 5 दिन बाद तक नहीं हुई शिकायत दर्ज उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपहरण की घटना के पांच दिन बाद तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। साथ ही, जांच पदाधिकारी ने केस डायरी भी नहीं लिखी थी।अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की।
न्यायालय ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए उम्मीद जताई कि पीड़िता को जल्द बरामद कर न्याय दिलाया जाएगा। वहीं पुलिस ने मामले में तेजी से छापेमारी शुरू कर दी है। पटना उच्च न्यायालय ने मोतिहारी पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। यह मामला पिपरा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग रेप पीड़िता के अपहरण से संबंधित है। अदालत ने जांच में गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात को पीड़िता की तत्काल बरामदगी और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद जिला पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। पुलिस अधीक्षक ने मामले के जांच पदाधिकारी रोहित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। चकिया एसडीपीओ संतोष कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तीन फरार आरोपियों के घरों पर इश्तेहार चस्पा कर उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है। सुनवाई से पहले रेप पीड़िता का अपहरण यह मामला 14 अगस्त 2024 को पिपरा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई नाबालिग से रेप की घटना से जुड़ा है। पीड़िता की मां के आवेदन पर पिपरा थाना में नौशाद आलम के खिलाफ कांड संख्या 214/24 दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो वर्तमान में मोतिहारी केंद्रीय कारागार में बंद है। बताया गया है कि 24 फरवरी 2026 को आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता को बयान के लिए पेश करने का निर्देश दिया था। उसी रात पीड़िता का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। मां ने 5 लोगों के खिलाफ FIR कराया दर्ज इसके बाद पीड़िता की मां ने आरोपी के परिजनों सहित पांच लोगों के खिलाफ कांड संख्या 92/26 दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक बुजुर्ग आरोपी का नाम जांच के दौरान हटा दिया गया। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी का अपहरण गवाही रोकने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायत करने पर उन्हें धमकियां भी मिलीं। फिलहाल, अपहृत पीड़िता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। किडनैपिंग के 5 दिन बाद तक नहीं हुई शिकायत दर्ज उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपहरण की घटना के पांच दिन बाद तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। साथ ही, जांच पदाधिकारी ने केस डायरी भी नहीं लिखी थी।अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की।
न्यायालय ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए उम्मीद जताई कि पीड़िता को जल्द बरामद कर न्याय दिलाया जाएगा। वहीं पुलिस ने मामले में तेजी से छापेमारी शुरू कर दी है।


