बेगूसराय जिला विधिक सेवा प्राधिकार के देखरेख में शनिवार को द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बेगूसराय में कुल 20 बेंचों का गठन किया गया है, जहां अलग-अलग मामलों का निष्पादन किया जाएगा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष ऋषिकांत ने आज पत्रकारों से बात करते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय में 15 बेंच का गठन किया गया। जिसमें सबसे अधिक पांच बेंच में 31 जनवरी 2026 तक काटे गए ट्रैफिक चालान का निष्पादन किया जाएगा। जिले में ट्रैफिक चालान के कीब 35 हजार मामले लंबित हैं, जिसका निष्पादन 50 प्रतिशत छूट के साथ कराया जा सकता है। इसके लिए गांधी स्टेडियम में लोक अदालत लगाया जा रहा है। न्यायालय परिसर में एक बेंच में पारिवारिक मामलो और नौ बेंच में शेष अन्य मामलों का निष्पादन किया जा रहा है। तेघड़ा, मंझौल, बलिया, बखरी अनुमंडलीय न्यायालय और रेलवे कोर्ट बरौनी में 1-1 बेंच का गठन किया जा रहा है। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सुबह 10:30 बजे से किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों के निष्पादन की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। इस दौरान अलग-अलग मामलों का निष्पादन किया जाएगा। अधिकार मित्रों की प्रतिनियुक्ति की गई लोक अदालत को सफल एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, पीएलवी और अधिकार मित्रों की प्रतिनियुक्ति की गई है। आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिविल कोर्ट परिसर और गांधी स्टेडियम में हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। जहां से लोगों को आवश्यक जानकारी, सहायता और संबंधित बेंच तक पहुंचाया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय पाने का सरल, सुलभ और कम खर्चीला माध्यम है। न केवल सालों पुराने विवाद समाप्त होते हैं, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। अधिक से अधिक संख्या में राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचकर अपने लंबित मामलों का निष्पादन कराएं। उन्होंने आगे कहा कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं रहता है। मामलों के निष्पादन में कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है, जिससे लोगों को आर्थिक रूप से भी राहत मिलती है। मौके पर डीएलएसए कर्मी इंद्रसेन शर्मा, सौरभ कुमार, उदय कुमार, संगम मिश्र, शशि कुमार और हाईकोर्ट के अधिवक्ता दीपक कुमार सहित अन्य उपस्थित थे। बेगूसराय जिला विधिक सेवा प्राधिकार के देखरेख में शनिवार को द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बेगूसराय में कुल 20 बेंचों का गठन किया गया है, जहां अलग-अलग मामलों का निष्पादन किया जाएगा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष ऋषिकांत ने आज पत्रकारों से बात करते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय में 15 बेंच का गठन किया गया। जिसमें सबसे अधिक पांच बेंच में 31 जनवरी 2026 तक काटे गए ट्रैफिक चालान का निष्पादन किया जाएगा। जिले में ट्रैफिक चालान के कीब 35 हजार मामले लंबित हैं, जिसका निष्पादन 50 प्रतिशत छूट के साथ कराया जा सकता है। इसके लिए गांधी स्टेडियम में लोक अदालत लगाया जा रहा है। न्यायालय परिसर में एक बेंच में पारिवारिक मामलो और नौ बेंच में शेष अन्य मामलों का निष्पादन किया जा रहा है। तेघड़ा, मंझौल, बलिया, बखरी अनुमंडलीय न्यायालय और रेलवे कोर्ट बरौनी में 1-1 बेंच का गठन किया जा रहा है। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सुबह 10:30 बजे से किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों के निष्पादन की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। इस दौरान अलग-अलग मामलों का निष्पादन किया जाएगा। अधिकार मित्रों की प्रतिनियुक्ति की गई लोक अदालत को सफल एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, पीएलवी और अधिकार मित्रों की प्रतिनियुक्ति की गई है। आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिविल कोर्ट परिसर और गांधी स्टेडियम में हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। जहां से लोगों को आवश्यक जानकारी, सहायता और संबंधित बेंच तक पहुंचाया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय पाने का सरल, सुलभ और कम खर्चीला माध्यम है। न केवल सालों पुराने विवाद समाप्त होते हैं, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। अधिक से अधिक संख्या में राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचकर अपने लंबित मामलों का निष्पादन कराएं। उन्होंने आगे कहा कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं रहता है। मामलों के निष्पादन में कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है, जिससे लोगों को आर्थिक रूप से भी राहत मिलती है। मौके पर डीएलएसए कर्मी इंद्रसेन शर्मा, सौरभ कुमार, उदय कुमार, संगम मिश्र, शशि कुमार और हाईकोर्ट के अधिवक्ता दीपक कुमार सहित अन्य उपस्थित थे।


