सिटी रिपोर्टर|समस्तीपुर अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण, नैतिक मूल्यों एवं न्यायिक गरिमा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), समस्तीपुर द्वारा विधिक सेवा सदन परिसर में एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर समीर कुमार ने की। शिविर का मुख्य विषय बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के भाग-6, अध्याय-2 में वर्णित “पेशेवर आचरण एवं शिष्टाचार के मानक” रहा, जो अधिवक्ता अधिनियम की धारा 49(1)(सी) के तहत निर्धारित हैं। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं के नैतिक दायित्वों, न्यायालय के प्रति कर्तव्यों, मुवक्किलों के साथ व्यवहार, सहकर्मी अधिवक्ताओं के प्रति सम्मान तथा न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अध्यक्षीय संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश समीर कुमार ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। उनके आचरण, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों का सीधा प्रभाव न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर पड़ता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपने पेशे की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखते हुए न्याय के उद्देश्य की पूर्ति में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए निर्धारित आचार संहिता केवल नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में आम लोगों के विश्वास को बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपने पेशेवर जीवन में उच्च नैतिक मानकों का पालन करने की अपील की। कार्यक्रम में जिला वकील संघ के अध्यक्ष गौरीशंकर मिश्र, संयुक्त सचिव कुंज बिहारी वर्मा, वरीय अधिवक्ता विजेंद्र ठाकुर, किरण सिंह, कुमार रविशंकर सहित अधिवक्ताओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने अधिवक्ताओं की भूमिका, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर अपने विचार व्यक्त किए तथा न्यायिक व्यवस्था में पेशेवर नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन वरीय अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा ने किया। इस दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी अपने सुझाव और विचार साझा किए, जिससे कार्यक्रम संवादात्मक और ज्ञानवर्धक बन गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सभी अधिवक्ताओं से न्यायिक व्यवस्था की गरिमा, पारदर्शिता और पेशेवर नैतिकता को और मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया गया। सिटी रिपोर्टर|समस्तीपुर अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण, नैतिक मूल्यों एवं न्यायिक गरिमा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), समस्तीपुर द्वारा विधिक सेवा सदन परिसर में एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर समीर कुमार ने की। शिविर का मुख्य विषय बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के भाग-6, अध्याय-2 में वर्णित “पेशेवर आचरण एवं शिष्टाचार के मानक” रहा, जो अधिवक्ता अधिनियम की धारा 49(1)(सी) के तहत निर्धारित हैं। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं के नैतिक दायित्वों, न्यायालय के प्रति कर्तव्यों, मुवक्किलों के साथ व्यवहार, सहकर्मी अधिवक्ताओं के प्रति सम्मान तथा न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अध्यक्षीय संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश समीर कुमार ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। उनके आचरण, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों का सीधा प्रभाव न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर पड़ता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपने पेशे की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखते हुए न्याय के उद्देश्य की पूर्ति में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए निर्धारित आचार संहिता केवल नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में आम लोगों के विश्वास को बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपने पेशेवर जीवन में उच्च नैतिक मानकों का पालन करने की अपील की। कार्यक्रम में जिला वकील संघ के अध्यक्ष गौरीशंकर मिश्र, संयुक्त सचिव कुंज बिहारी वर्मा, वरीय अधिवक्ता विजेंद्र ठाकुर, किरण सिंह, कुमार रविशंकर सहित अधिवक्ताओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने अधिवक्ताओं की भूमिका, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर अपने विचार व्यक्त किए तथा न्यायिक व्यवस्था में पेशेवर नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन वरीय अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा ने किया। इस दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी अपने सुझाव और विचार साझा किए, जिससे कार्यक्रम संवादात्मक और ज्ञानवर्धक बन गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सभी अधिवक्ताओं से न्यायिक व्यवस्था की गरिमा, पारदर्शिता और पेशेवर नैतिकता को और मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया गया।


