हसदेव में केते एक्सटेंशन माइंस को मंजूरी,सिंहदेव बोले-रामगढ़ को खतरा:कहा-खदान में 7 लाख से अधिक पेड़ कटेंगे, विधानसभा के संकल्प की अनदेखी

हसदेव में केते एक्सटेंशन माइंस को मंजूरी,सिंहदेव बोले-रामगढ़ को खतरा:कहा-खदान में 7 लाख से अधिक पेड़ कटेंगे, विधानसभा के संकल्प की अनदेखी

सरगुजा जिले के हसदेव क्षेत्र में केते एक्सटेंशन खदान को केंद्र सरकार ने विरोध के बावजूद मंजूरी दे दी है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस खदान की स्वीकृति से रामगढ़ पहाड़, राम मंदिर का अस्तित्व खतरे में है। सात लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे। विधानसभा के संकल्प की अनदेखी करते हुए एक कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने यह मंजूरी दी गई है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित व घने वन क्षेत्र का है, जहां 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी। इसमें लगभग 7 लाख पेड़ों की बलि दी जाएगी। रामगढ़ का अस्तित्व खतरे में, मोदी व सीएम होंगे जिम्मेदार
सिंहदेव ने कहा कि यह वन क्षेत्र सरगुजा के ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है। कोल परियोजना से रामगढ़ के मुख्य मंदिर की दूरी 8 किमी की दूरी पर है। यहां अन्य कोल परियोजनाओं के कारण लगातार रामगढ़ की पहाड़ धराशायी हो रही हैं। सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा भाजपा सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केते एक्शटेंशन को मंजूरी दिया जाना रामगढ़ से प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण, हनुमान सहित अन्य मंदिर के अस्तित्व व ऐतिहासिक पहचान को खत्म करने वाला कृत्य है। भविष्य में यदि मंदिर और रामगढ़ का पहाड़ प्रभावित होता है, धराशायी होता है, मंदिर तक जाने का रास्ता बंद होता है तो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय वन सलाहकार समिति, मुख्यमंत्री विष्णु देवसाय, वनमंत्री केदार कश्यप व मंत्री राजेश अग्रवाल जिम्मेदार होंगे, जो कहते हैं कि इससे मंदिर व रामगढ़ पहाड़ को कुछ नहीं होगा। विधानसभा के संकल्प की अनदेखी
टीएस सिंहदेव ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में आगे किसी भी नई कोल परियोजना को खोलने अनुमति या सहमति नहीं दी जाएगी। इसमें सभी दलों के विधायकों ने सहमति दी थी। यह संकल्प केंद्र सरकार को भी भेजा गया था। जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने यह शपथ पत्र प्रस्तुत किया था की हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोल खदानें गैर जरूरी हैं। एक कंपनी के निजी लाभ के लिए खदान
पूर्व डिप्टी सीएम सिंहदेव ने कहा कि मैंने लगातार यह प्रयास किया है कि केते एक्शटेंशन कोल परियोजना को मंजूरी न मिले। इसके लिए पूर्ववर्ती राज्य सरकार जो हमारे कांग्रेस पार्टी की थी हम सबने मिल कर हसदेव अरण्य को बचाने के लिए संवैधानिक तरीकों से प्रयास किया। मौजूदा भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पूरी तरह एक कंपनी के निजी लाभ व उसे खुश करने की है न कि जनहित की है। आदिवासी महापंचायत ने भी किया विरोध
केते एक्सटेंशन खदान शुरू करने का आदिवासी महापंचायत ने भी विरोध किया है। 24 मई को बासेन में आदिवासी महापंचायत की बैठक आयोजित की गई, जिसमें खदान के विरोध का निर्णय लिया गया है।

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