इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के कटरा गडरियान में तीन लोगों पर एसिड फेंकने के आरोपी राजेंद्र को सत्र अदालत से सुनाई गई सात साल की कैद की सजा को सही माना और कहा कि दी गई सजा उचित है जिसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध साबित करने में सफल रहा।
तीनों चश्मदीद घायलों के बयान व अन्य साक्ष्य दोष साबित करने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने सत्र अदालत आगरा के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने राजेंद्र की सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।
सत्र अदालत ने घटना के एक साल के भीतर अपराध की सजा सुना दी थी और हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील का फैसला होने में 41 का समय बीत गया। 1985 में अपील 41 साल बाद सजा की पुष्टि की मालूम हो कि सुभाष अशोक व दिनेश लाउडस्पीकर लगाकर आ रहे थे कि रास्ते में मारने की नीयत से आरोपी ने उनपर एसिड फेका। कोर्ट ने कहा इनमें से किसी घायल की मौत हो जाती तो निश्चित ही यह हत्या का अपराध होता। किंतु घायलों पर एसिड बेकर घायल करने का साक्ष्य है। घटना के चश्मदीद गवाह भी है। एक साइकिल व जला हुआ तहमद बरामद किया गया है।सत्र अदालत ने 20 अक्टूबर 85 को सजा सुनाई। 2 अक्टूबर 84 की घटना की एफआईआर 3 अक्टूबर 84 को दर्ज की गई। ट्रायल कोर्ट ने एक साल के भीतर सजा सुना दी और 1985 मे दाखिल अपील पर हाईकोर्ट का फैसला सजा के 41 साल बाद आया। जिसमें सुनाई गई सजा की पुष्टि की।


