Amul-Mother Dairy ने फिर दिया झटका, Milk Price ₹2/litre बढ़ा, जानें आपके शहर में नए रेट्स

Amul-Mother Dairy ने फिर दिया झटका, Milk Price ₹2/litre बढ़ा, जानें आपके शहर में नए रेट्स

देश की प्रमुख दूध और दुग्ध उत्पाद कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने बुधवार को दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दीं। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही युद्ध के कारण बढ़ा हुआ था और इससे घरों का बजट भी प्रभावित होगा। यह मूल्यवृद्धि 14 मई से लागू होगी।
माना जा रहा है कि क्षेत्रीय डेयरी कंपनियां भी इसी तरह कीमतें बढ़ा सकती हैं।

गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ), जो अमूल ब्रांड के तहत दूध और दूध उत्पादों की बिक्री करता है, ने एक बयान में कहा कि उसने ‘‘पूरे भारत में दूध के विभिन्न पैक के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।’’
वहीं मदर डेयरी ने कहा कि उसने अपने दूध की विभिन्न किस्मों की उपभोक्ता कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है, जो बृहस्पतिवार से प्रभावी होगी।
जीसीएमएमएफ द्वारा पिछली मूल्य वृद्धि एक मई, 2025 को की गई थी, जबकि मदर डेयरी ने अप्रैल, 2025 में कीमतें बढ़ाई थीं।

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भारत के दो सबसे बड़े संगठित दूध विक्रेताओं द्वारा की गई इस मूल्य वृद्धि से खाद्य महंगाई और बढ़ेगी, जो हाल के सप्ताह में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पहले ही बढ़ चुकी है।
अप्रैल में खाद्य महंगाई चार प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई है।
जीसीएमएमएफ ने कहा कि कीमतों में हुई यह वृद्धि लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत प्रति लीटर के बराबर है, जो औसत खाद्य महंगाई दर से कम है।
जीसीएमएमएफ ने कहा, ‘‘यह मूल्य वृद्धि दूध के परिचालन और उत्पादन की कुल लागत में हुई बढ़ोतरी के कारण की जा रही है। इस वर्ष के दौरान पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी वृद्धि हुई है।’’

सहकारी संस्था ने कहा कि उसकी सदस्य यूनियनों ने भी किसानों के लिए खरीद मूल्य में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा (फैट) की बढ़ोतरी की है, जो मई, 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है।
कीमतों में बढ़ोतरी पर मदर डेयरी ने कहा, ‘‘यह बदलाव इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि किसानों से खरीद की कीमतों में पिछले एक साल में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग छह प्रतिशत के बराबर है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर इसका असर कम करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही थीं।’’
उसने कहा कि कीमतों में यह बदलाव बढ़ी हुई लागत का सिर्फ एक हिस्सा ही है, और इसका मकसद ‘‘किसानों के कल्याण और उपभोक्ताओं के हितों के बीच एक सही संतुलन साधना’’ है।

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अमूल और मदर डेयरी, दोनों ही अपनी बिक्री से होने वाली कमाई का लगभग 75-80 प्रतिशत हिस्सा दूध उत्पादकों को देती हैं।
मदर डेयरी पूरे देश में हर दिन 55 लाख लीटर दूध बेचती है। यह दिल्ली-एनसीआर में दूध की एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अमूल की नई दरों के अनुसार, 500 मिली के पैक के लिए स्लिम एन किस्म की कीमत 27 रुपये, ताजा की 30 रुपये, गाय के दूध की 31 रुपये और गोल्ड की 36 रुपये होगी। हालांकि, भैंस के दूध की कीमत में चार रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसकी कीमत अब 80 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
मदर डेयरी ने बताया कि टोन्ड दूध (जो थोक में बेचा जाता है) की कीमतें 56 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 58 रुपये प्रति लीटर कर दी गई हैं। फुल क्रीम दूध (जो पैकेट में आता है) की कीमत 72 रुपये प्रति लीटर होगी।

टोन्ड दूध (जो पैकेट में आता है) की कीमत 58 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डबल-टोन्ड दूध की कीमत 54 रुपये प्रति लीटर होगी। गाय के दूध की कीमतें 60 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 62 रुपये प्रति लीटर कर दी गई हैं।
जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी, किसानों के मालिकाना हक वाली डेयरी सहकारी संस्था है, जिसमें 36 लाख किसान शामिल हैं। यह 50 से ज्यादा देशों में अमूल के दूध और दुग्ध उत्पादों का विपणन करती है।
यह हर दिन तीन करोड़ लीटर से ज्यादा दूध इकट्ठा करती है और हर साल अमूल के 24 अरब से ज्यादा पैकेट बेचती है। इन उत्पादों में दूध, मक्खन, चीज, घी और आइसक्रीम वगैरह शामिल हैं।
जीसीएमएमएफ का कारोबार पिछले वित्त वर्ष से 11 प्रतिशत बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गया, जो उससे पिछले वित्तवर्ष में 65,911 करोड़ रुपये था।

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मदर डेयरी, जिसकी शुरुआत वर्ष 1974 में हुई थी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूरी तरह से स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। पिछले वित्त वर्ष में, दूध उत्पादों और खाद्य तेल की बेहतर मांग के कारण, कंपनी के कारोबार में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 20,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह कंपनी मदर डेयरी ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पाद बेचती है। यह धारा ब्रांड के तहत खाद्य तेल का विपणन करती है।
मदर डेयरी के पास दूध प्रसंस्करण के नौ संयंत्र और बागवानी उत्पादों के प्रसंस्करण के चार संयंत्र हैं।

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