औरंगाबाद सदर अस्पताल की एम्बुलेंस बनी परेशानी:धक्का मारकर किया स्टार्ट, राजद नेता बोले- स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह फेल

औरंगाबाद सदर अस्पताल में आज एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाना था। मरीज को ले जाने के लिए उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस स्टार्ट नहीं हुई और उसे चालू करने के लिए अस्पताल कर्मियों व अन्य लोगों को धक्का लगाना पड़ा। काफी प्रयास के बाद एम्बुलेंस स्टार्ट हुई, तब जाकर मरीज को रवाना किया जा सका।घटना के दौरान मौजूद लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आपातकालीन सेवा के लिए तैनात एम्बुलेंस का इस तरह खराब होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि किसी गंभीर मरीज को तत्काल रेफर करना हो, तो ऐसी स्थिति में उसकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है। राजद ने स्वास्थ्य विभाग पर साधा निशाना मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जिला प्रवक्ता डॉ. रमेश यादव ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल मॉडल अस्पताल के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की एम्बुलेंस स्वयं ही बीमार हालत में है और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं दिख रही है। औरंगाबाद जिला ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का स्वास्थ्य विभाग ही बीमार है। डॉ. यादव ने कहा कि समस्या केवल एम्बुलेंस तक सीमित नहीं है। अस्पताल में कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इसके कारण इलाज के लिए आने वाले अनेक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों और चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है। व्यवस्था में सुधार करने की मांग उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ही आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो राजद इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने पर मजबूर होगी। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल की एम्बुलेंस समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल जांच और सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल सदर अस्पताल ही नहीं बल्कि जिले के अन्य सरकारी अस्पताल की भी हालत खराब है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर खानापूर्ति की जाती है और मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। रेफरल अस्पताल की स्थिति और भी बदतर है। जिले के लगभग सभी रेफरल अस्पताल रेफर अस्पताल बनकर रह गए। औरंगाबाद सदर अस्पताल में आज एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाना था। मरीज को ले जाने के लिए उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस स्टार्ट नहीं हुई और उसे चालू करने के लिए अस्पताल कर्मियों व अन्य लोगों को धक्का लगाना पड़ा। काफी प्रयास के बाद एम्बुलेंस स्टार्ट हुई, तब जाकर मरीज को रवाना किया जा सका।घटना के दौरान मौजूद लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आपातकालीन सेवा के लिए तैनात एम्बुलेंस का इस तरह खराब होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि किसी गंभीर मरीज को तत्काल रेफर करना हो, तो ऐसी स्थिति में उसकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है। राजद ने स्वास्थ्य विभाग पर साधा निशाना मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जिला प्रवक्ता डॉ. रमेश यादव ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल मॉडल अस्पताल के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की एम्बुलेंस स्वयं ही बीमार हालत में है और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं दिख रही है। औरंगाबाद जिला ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का स्वास्थ्य विभाग ही बीमार है। डॉ. यादव ने कहा कि समस्या केवल एम्बुलेंस तक सीमित नहीं है। अस्पताल में कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इसके कारण इलाज के लिए आने वाले अनेक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों और चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है। व्यवस्था में सुधार करने की मांग उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ही आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो राजद इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने पर मजबूर होगी। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल की एम्बुलेंस समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल जांच और सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल सदर अस्पताल ही नहीं बल्कि जिले के अन्य सरकारी अस्पताल की भी हालत खराब है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर खानापूर्ति की जाती है और मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। रेफरल अस्पताल की स्थिति और भी बदतर है। जिले के लगभग सभी रेफरल अस्पताल रेफर अस्पताल बनकर रह गए।  

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