शुक्रवार की सुबह आयी एक सूचना ने सभी को झकझोर दिया। यह सूचना थी युवा व्यवसायी अंबरीश श्रीवास्तव के मौत की। अंबरीश की जिंदादिली के कायल लोगों को सहसा इस सूचना पर विश्वास नहीं हुआ कि उनकी मौत अपनी ही लाइसेंसी बंदूक की गोली से हो गई। इस मौत ने केवल उनके परिवार को ही नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग को अंदर तक झकझोर दिया था। सबके जुबान तो बंद थे लेकिन आंखों में एक ही सवाल था कि ऐसा कैसे हो सकता है। घटना स्थल हो, पोस्टमार्टम हाउस हो, घर हो या फिर अंतिम संस्कार के दौरान राप्ती नदी का घाट, अंबरीश की लोकप्रियता की गवाही दे रहे थे। बड़ी संख्या में नेता, अधिकारी, व्यापारी, ठेकेदार, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की मौजूदगी यह बयां कर रही थी कि अंबरीश को हर वर्ग को जोड़े रखने में किस कदर महारत हासिल थी। जैसे ही गोली लगने की सूचना आयी, नेता, अधिकारी और शुभचिंतक मौके पर दौड़ पड़े। पोस्टमार्टम होने तक लोग एम्स के पोस्टमार्टम हाउस पर जमे रहे। इधर सिविल लाइंस स्थित आवास पर शुभचिंतकों का आना-जाना लगा रहा। अंबरीश के घर समाज के हर वर्ग के लोग पहुंचे। जिसको मौत की सूचना मिली, वह स्तब्ध और दुखी मन से घर की ओर गया। अंबरीश के पिता अजय कुमार श्रीवास्तव उर्फ अतुल के इर्द-गिर्द व्यापारियों, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी रही। शाम को घर से शवयात्रा शुरू होने तक लोग वहीं जमे रहे। घर पहुंचने वालों में विधायक डा. विमलेश पासवान, एसएसपी डा. कौस्तुभ, एडीएम सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट आदि शामिल रहे। पोस्टमार्टम हाउस पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. धर्मेंद्र सिंह एवं सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ला भी पहुंचे। राप्ती नदी के तट पर स्थित राजघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अंबरीश के छोट भाई नितिन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, जीडीए उपाध्यक्ष आनन्द वर्द्धन, एसपी सिटी एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी यहां आए थे। अंबरीश का रुझान राजनीति की ओर भी था। वह खुद तो राजनीति की मुख्य धारा में सक्रिय नहीं थे लेकिन इस क्षेत्र में सक्रिय रहने वालों के संपर्क में वह बने रहते थे। छात्र राजनीति में भी उनका दखल रहता था। जब भी चुनाव हुआ, वह छात्र नेताओं के साथ खड़े नजर आते थे। उनकी हर संभव मदद भी करते थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके निधन का समाचार मिलते ही मुख्यमंत्री ने पत्र जारी कर शोक जताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी शोक व्यक्त किया। व्यापार के क्षेत्र में तेजी से चढ़ रहे थे सफलता की सीढ़ियां अंबरीश के घर में टेंट हाउस एवं मैरेज हाल का पुस्तैनी बिजनेस था। उनके पिता ने इस क्षेत्र में काफी नाम कमाया। शुरू में अंबरीश भी उनके साथ जुड़े। बाद में अपने पिता के मार्गदर्शन में वह टेंट का काम देखने लगे। इस काम को अंबरीश ने विस्तार दिया। कोई बड़ा प्रोजेक्ट हाथ आता तो दूसरे जिले के टेंट व्यवसायी के साथ उसे पूरा करते। जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो उनके कार्यक्रम अक्सर गोरखपुर में लगने लगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के सफल आयोजन का इतना अनुभव अंबरीश के पास हो चला था कि वह इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील आयोजन की सफल जिम्मेदारी निभाने में कभी नहीं चूकते थे। टेंट का काम जब अंबरीश को मिलता था तो अधिकारी भी निश्चिंत नजर आते थे।
इसके बाद अंबरीश ने ठेकेदारी की ओर भी कदम बढ़ाया। इस समय जीडीए, नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी में वह बड़े पैमाने पर काम कर रहे थे। अंबरीश में युवाओं को जोड़कर रखने की क्षमता थी। उन्होंने कई युवाओं का खुद का रोजगार शुरू कराया। सोशल मीडिया पर छाया रहा निधन का समाचार अंबरीश के मौत की सूचना मिलने के बाद सोशल मीडिया पर शुभचिंतकों ने श्रद्धांजलि दी। इस वर्चुअल दुनिया में शुक्रवार को अंबरीश की मौत की सूचना ही छायी रही। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री डा. राधामोहन दास अग्रवाल, उपाध्यक्ष डा. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डा. विमलेश पासवान आदि लोगों ने उनके निधन का समाचार पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी।


