ईरान पर हमले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बड़ा बयान, कहा- तेहरान से समझौता अब भी संभव

ईरान पर हमले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बड़ा बयान, कहा- तेहरान से समझौता अब भी संभव

Marco Rubio on US-Iran Conflict: ईरान की मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइंस बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाए जाने के बाद भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता अभी भी संभव है, भले ही अमेरिका के ताजा हमलों ने पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों और नाजुक संघर्ष-विराम पर संदेह पैदा कर दिया हो।

जयपुर की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान रूबियो ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘कतर में आज कुछ बातचीत चल रही है, इसलिए देखेंगे कि क्या कोई प्रगति हो पाती है। मुझे लगता है कि शुरुआती मसौदे की भाषा को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी चर्चा चल रही है, इसलिए इसमें कुछ दिन लग सकते हैं।’

इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के साथ समझौता करने के लिए अब भी प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ने इसे लेकर अपनी इच्छा स्पष्ट की है। वह या तो एक अच्छा समझौता करेंगे या फिर कोई समझौता नहीं होगा।’

अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब ईरानी ठिकानों पर अमेरिका के नए हमलों ने उन वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जो महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए कतर में चल रही थीं। वरिष्ठ ईरानी वार्ताकार बातचीत के एक और दौर के लिए दोहा पहुंचे थे।

‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए’

मार्को रूबियो ने वैश्विक ऊर्जा कॉरिडोर को खुला रखने की आवश्यकता दोहराते हुए कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए। किसी न किसी तरीके से यह खुला रहेगा। इसका खुला रहना जरूरी है।’ उन्होंने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित करने की किसी भी कोशिश को ‘गैरकानूनी’, ‘अवैध’ और ‘दुनिया के लिए अस्थिर करने वाला’ बताया।

ईरान में लगभग 90 दिनों बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल

ईरान में करीब तीन महीने बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल करने संबंधी आदेश राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दिए हैं। इंटरनेट ऑब्जर्वेटरी नेटब्लॉक्स के अनुसार, अधिकांश ईरानी नागरिक 87 दिनों से वर्ल्ड वाइड वेब तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे। केवल कुछ लोगों के पास महंगे और उन्नत वीपीएन की सुविधा थी, जिनकी मदद से वे प्रतिबंधों को दरकिनार कर पा रहे थे।

ईरानी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के जवाब में अधिकारियों ने शुरुआत में 8 जनवरी से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। फरवरी में धीरे-धीरे कनेक्शन सामान्य होने लगे थे, लेकिन 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमलों की शुरुआत के बाद इंटरनेट सेवाएं फिर से बंद कर दी गई थीं।

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